Inspirational Stories-5-जब तक जीवन है तब तक आप विद्यार्थी ही है

 जब तक जीवन है तब तक  आप विद्यार्थी ही हैं. लेकिन आज के जमाने में इसे कोई नहीं मानता है और ना ही इसे कोई मानने वाला है. अब ऐसा भी नहीं है कि एक भी परसेंट दुनिया में आदमी नहीं है जो इस कथन को मानते नहीं. मानने वाले मानते हैं और मानने वाले का ही आगे चलकर कल्याण  भी होता है. 





जो व्यक्ति इंजीनियर या डॉक्टर या कुछ भी बन कर केवल जीवन यापन करता है और उसके बाद अध्ययन छोड़ देता है वह नितांत ही मूर्ख आदमी है उसका कल्याण नहीं होने वाला है. क्योंकि यह शरीर एक कपड़े की तरह है जैसे कपड़ा फट जाने पर आप नए कपड़े धारण कर लेते हैं ठीक उसी तरह इस शरीर के छोड़ने पर आपको नया शरीर फिर से मिल जाएगा यानी फिर से आपको वही जीने -मरने की प्रक्रिया और वहीं दुनियाभर की समस्या को झेलना पड़ेगा. 


यदि धर्म ग्रंथ गीता की बात को पूरे अंतर्मन से स्वीकार किया जाए तो उसमें यही लिखा है कि मृत व्यक्तियों का जन्म निश्चित है और जन्म होने वाले व्यक्ति का मरण निश्चित है. 

तो आपको जिंदगी इतनी ही हसीन लगती है और बस आपको यही लगता है कि इसमें केवल मजा ही मजा है कोई सजा नहीं है तो आप वैसे ही जिए जैसे आप जीना चाहते हैं लेकिन अगर आप इसी तरह के जीवन से ऊब गए हैं और कहीं ना कहीं आपको यह लग रहा है कि अगली बार फिर जन्म लेना पड़ेगा और फिर समस्या झेलनी पड़ेगी तब आप, अपने आप को विद्यार्थी समझ कर ही ज्ञान प्राप्त करते रहें ज्ञान एक साधना की तरह है. और साधना को शुद्ध मन से लंबे समय तक करने के बाद ही हमें मुक्ति मिलती है जिसे हम मौक्ष कहते हैं. 


मौक्ष मिलना एक अमृत के बराबर होता है , उसके बाद इंसान बार-बार के जीने और मरने की प्रक्रिया से मुक्त हो जाता है. अतः आपको गीता का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए गीता का ज्ञान प्राप्त करने के लिए उसमें आपको मनोभाव से पढ़ना होगा और उसके अर्थ को समझना होगा, अर्थ को समझना ही केवल काफी नहीं है बल्कि समझ कर उसे अपने जीवन में उतारना होगा और उतारकर उसी तरह आचरण करना होगा, इस तरह आप धीरे-धीरे साधक के पथ पर चलते हुए साधना करने लगेंगे, यही साधना आराधना कहलाती है और जब आराधना का रंग गहरा हो जाता है तब आप मौक्ष को प्राप्त कर लेते हैं. 



ऐसा नहीं है कि गीता का ज्ञान केवल पढ़कर ही प्राप्त किया जा सकता है आप उसे सुनकर भी प्राप्त कर सकते हैं बशर्ते रोज सुनते रहिए. ताकि निरंतरता बनी रहे.

अब दिमाग में प्रश्न यह भी उठता है की

 क्या गीता का ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें दुनियादारी छोड़नी पड़ेगी ? 

अगर यह प्रश्न आपके दिमाग में चल रहा है तो उत्तर है नहीं. आप अपने दैनिक जीवन का काम करते हुए भी भगवान की साधना कर सकते हैं, और अच्छे लाभ को प्राप्त कर सकते हैं. भगवान अलौकिक हैं उसी तरह अलौकिक माता भी होती हैं आप दोनों लोगों में से किसी का भी भाव- भजन कर सकते हैं. या चाहे तो दोनों लोगों का भी भजन कर सकते हैं यह सब कुछ आपके भक्ति भाव पर डिपेंड करता है. 

भक्तिभाव करते रहना चाहिए लेकिन इसका प्रचार नहीं करना चाहिए खासकरके मूर्खों के बीच में क्योंकि वह इसे नहीं समझते हैं और निरादर करते हैं. 

प्रचार वही करना चाहिए जहां पर कुछ समझदार लोग हो, अगर आप इस लाइन में नए हैं तो बिल्कुल ही इधर-उधर ना करें एक बार पूर्णता ज्ञान प्राप्त हो जाने के बाद आप किसी से भी कुछ भी शेयर कर सकते हैं क्योंकि तब तक आप ज्ञानी हो जाएंगे और आपको पता चल जाएगा कि किस से क्या बात करनी है और कितनी बात करनी है? 


ज्ञानी व्यक्ति हमेशा ज्ञान के लिए उत्सुक रहता है जबकि अज्ञानी व्यक्ति अपने अज्ञान को ही ज्ञान समझता है. ज्ञान का कोई अंत नहीं है क्योंकि ज्ञान अनंत है. गीता में लिखा गया है कि सभी विद्याओं में अध्यात्म रूपी धर्म का ज्ञान ही सर्वश्रेष्ठ है. 

अर्थात  क्योंकि फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ, बायो इत्यादि का ज्ञान केवल आपको जीने खाने का उपाय देगी आपको मुक्ति प्रदान नहीं करेगी, जबकि अध्यात्म रूपी धर्म का ज्ञान आपको इस शरीर से मुक्त कर देता है और अमर बना देता है जिसको कि हम मोक्ष  करते हैं. 


इंद्रियों को ज्यादा छूट ना देना अर्थात केवल इंद्रियों के आराम देने के चक्कर में ही जिंदगी व्यतीत ना करना, इंद्रियों में ज्यादातर हम जननेंद्रिय के भरण पोषण में लगे रहते जिसको की आम भाषा में सेक्स इच्छा कहते  हैं , दूसरी सबसे बड़ी इच्छा जो आती है वह है स्वाद की इच्छा. यानी इस्त्री भोग और स्वाद की इच्छा में हम गिरे पड़े रहते हैं. और पूरे शरीर की शक्ति बस इन्हीं दो चीजों पर काम करती है. इंद्रियों से मिलकर बना है मन और मन से बना है बुद्धि . जब तक आपका बुद्धि इंद्रियों इच्छापूर्ति मैं ही लगा है तब तक आप साधना के योग्य नहीं है और जो व्यक्ति साधना के योग्य ही नहीं है वह भला आराधना कैसे कर सकता है और इस तरह आप ना आराधना कर पाएंगे और ना ही अमर हो पाएंगे अर्थात नाही मोक्ष को प्राप्त कर पाएंगे. और जब तक मोक्ष को प्राप्त नहीं कर पाएंगे तब तक ऐसे ही ना जाने कितनी  बार आप जन्म लेंगे दुख झेलेंगे और मरते रहेंगे और इसी सिलसिले में न जाने आप कितने युग बीते देंगे. 


तो आपके पास सब कुछ है आप चाहे इंद्रियों या जनन इंद्रियों के मजे में इस मनुष्य जीवन को बर्बाद कीजिए या इस मनुष्य जीवन का फायदा उठाते हुए अमरत्व को प्राप्त कीजिए सबकुछ आपके ऊपर है. 


याद रखिएगा आम इंसान तो किसी को कुछ भी दे देता है और किसी को कुछ भी ले लेता है, लेकिन भगवान किसी को उसकी योग्यता के अनुसार ही चीजें देते खास करके मोक्ष की चीजें अगर आप मोक्ष प्राप्ति के योग्य नहीं है तो आप को मोक्ष नहीं मिलेगा और यह तब तक नहीं मिलेगा जब तक आप इसके योग्य नहीं हो जाते हैं. 

साधना के दौरान अगर आपकी साधना किसी कारणवश चाहे वह बहुत ही अच्छा ही क्यों न हो,  टूट जाती है तो आपको अगले जन्म में वही से साधना शुरू करनी होती है जहां से आप ने छोड़ी थी. तो इस तरह से फायदा यह है कि आपने जितना साधना किया था वह खत्म नहीं हुआ बस केवल यह शरीर और वह दौर खत्म हो जाता है. 


 आप खुद सोचिए कि क्या वस्त्र बदलने से इंसान का बुद्धि विवेक बदल जाता है, ठीक उसी तरह इस शरीर को छोड़ने के बाद जब आप दूसरा शरीर लेंगे तो क्या आपकी बुद्धि विवेक अचानक से दूसरी हो जाएगी, बिल्कुल नहीं, इसीलिए कहा गया है कि जहां से आप साधना छोड़े रहते हैं वहीं से आपका जीवन अगली बार शुरू होता है, दुनिया में कितने ही लोग हैं जो संसारी जीवन से परेशान होकर आत्महत्या कर लेते हैं, तो आप खुद इसका उत्तर दीजिए कि क्या उनकी आत्महत्या कर देने से उनको मुक्ति मिल जाती है, क्योंकि उनको मोक्ष नहीं मिला है, उनका केवल शरीर का नाश हुआ है, और शरीर एक कपड़े की तरह की है, इसलिए उनको अगले जन्म में उन्हें शरीर मिल जाता है और उसी बुद्धि विवेक से उनका जीवन आगे बढ़ता है जो उन्होंने पिछले जन्म में छोड़ा था. 

इसलिए आत्महत्या करने वाले मूर्ख ही नहीं महामूर्ख है, और इस तरह का आचरण , अज्ञानी लोग ही करते हैं. 


जो कि जीवन मरण के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, कैसे शरीर मिलता है क्यों मिलता है इस शरीर को पाने का क्या उद्देश्य होना चाहिए उनको किसी भी प्रकार का कोई ज्ञान नहीं होता है. ऐसे लोगों की जिंदगी जब तक चलती रहती है तब तक चलती -रहती है लेकिन जब समस्या बढ़ती है तो उस समस्या का समाधान ऐसे लोग नहीं ढूंढ पाते हैं और जब समस्या बढ़ती ही जाती है और समाधान नहीं मिलता है तो ऐसे लोग अपनी जीवन लीला समाप्त कर देते यह सोचकर कि उन्हें समस्या से मुक्ति मिल गई जबकि समस्या से मुक्ति मिलती ही नहीं, भला समस्या से मुक्ति मिलती तो हर कोई यही करता . भला इस तरह के अज्ञानी कहां समझते हैं कि जिससे वह छुटकारा पाना चाहते हैं वह मोक्ष ही प्राप्त होगा, 

और मोक्ष प्राप्ति तभी होती है जब आप ज्ञानी होते हैं, और ज्ञान आपको तभी आएगा जब आप ज्ञान के रास्ते चलेंगे, इसीलिए इस पोस्ट का टाइटल रखा गया था कि जब तक आपका जीवन है तबतक आप विद्यार्थी हैं. 


आप लोगों में से कुछ लोग सोच रहे होंगे कि अरे गीता पढ़ना उसे समझना कौन सी बड़ी बात है मैंने तो तमाम तरह के किताबे पर डाली है और समझते हुए padhi  है यह गीता भला क्या चीज है. 

कुछ लोगों का ऐसा कहना सही भी हो सकता है. हो सकता है कि वह पढ़ने लिखने में तेज हो और चीजों को जल्दी से समझ जाए, या फिर यह भी हो सकता है कि वह पढ़ने लिखने में भी तेज हो और समझदार भी हो और चीजों को जल्दी से समझ भी जाए. 

और इसे करने में वह बहुत ही कम समय भी ले . 

तो इस तरह से देखा जाए तो वह व्यक्ति ज्ञानी हो गया और चुकी व ज्ञानी हो गया इसलिए वह मोक्ष प्राप्त कर लिया और हो गया अमर. मिल गया बार-बार जीने मरने से छुटकारा. हो गए जादूगर. 


अगर इस तरह का विचार दिमाग में है तो इस तरह का विचार दिमाग से निकाल दीजिए क्योंकि यह चीज यहां पर काम करने वाली नहीं है. क्योंकि गीता को पढ़ लेना और उसे तुरंत समझ लेना हो सकता है कि यह आसान हो, लेकिन केवल पढ़ लेना और उसे समझ लेना ही बहादुरी नहीं है, गीता को पढ़कर समझ कर उसे अपने जीवन में उतारना होता है और उसी तरह आचरण करना होता है, आचरण करने से ही आप पवित्र होते हैं और साधना के पथ पर चलते हैं, और तभी जाकर मोक्ष प्राप्त होता है, अब चीजों को जान लेना और समझ लेना अलग चीज होता है लेकिन उसे अपने जीवन में उतारना बहुत ही कठिन चीज होता है, 

अच्छे से अच्छे पढ़े-लिखे और ज्ञानी लोग भी जानते हैं की 

गलत ढंग से पैसा कमाना

 दूसरे की स्त्री पर गलत नजर रखना

 जबरजस्ती शारीरिक संबंध बनाना 

 धन के लिए भाई बंधुओं को ही प्रताड़ना करना 

 अपना मान सम्मान बचाने के लिए अपने ही भाई बंधुओं का नाश करना 

 माता-पिता की सेवा नहीं करना 

  दारु शराब का सेवन करना 

 मुझे गलत भाषा का प्रयोग करना 

 हमेशा हड़पने की ही प्रवृत्ति रखना 

अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए पशु पक्षियों की बलि चढ़ा देना 

पैसे के लिए माता पिता से झगड़ा करना 

किसी भी स्त्री को माता न समझकर उसे भोग विलास की वस्तु समझना 

पुरुषों का अपनी पत्नियों से गलत व्यवहार और उनका निराधार करना & vice versa 


इत्यादि बातें गलत है फिर भी लोग करते रहते हैं. अब ऐसा नहीं है कि इस तरह की बातें लोग समझते नहीं. समझने को लगभग हर कोई भी समझ लेता है यह कोई बड़ी बात भी नहीं है. चाहे कोई ज्यादा पढ़ा लिखा हो या कम पढ़ा लिखा हो या बिल्कुल ही पढ़ा लिखा नही हो फिर भी वह इस तरह की बातों को समझ ही लेगा. लेकिन समझना अलग चीज होती है और जीवन में उतारना अलग चीज होती है. 


चलिए मान लेते हैं कि कम पढ़े लिखे लोग ज्ञानी और समझदार नहीं होते इसलिए वह इन चीजों को कम समझ रहे हैं और अपने अंदर उतार नहीं पा रहे हैं, अर्थात उपयुक्त चीजों को समझते हुए भी वे आचरण नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वह कम पढ़े लिखे हैं. 


लेकिन जो लोग बहुत ही ज्यादा पढ़े लिखे हुए हैं और अपनी पढ़ाई और लिखाई पर बहुत ही ज्यादा हुंकार भरते हुए ऐंठते  हैं . ऐसे लोग जो अपने आपको काफी समझदार भी बताते हैं और गीता जैसी पवित्र ग्रंथों को बहुत ही छोटी दृष्टि से देखते हैं ऐसे ही लोग इसे क्यों नहीं अपने जिंदगी में उतार लेते हैं. क्यों पशुओं और कुत्तों की तरह गिरे रहते हैं. 

अगर दम है तो इसे वास्तव में जल्दी से उतार कर दिखाएं. या इसे उतारने का प्रयास करें फिर खुद ही समझ में आ जाएगा. 


वाकही में मित्रों अब बहुत से बड़े बड़े लोगों को देखा ही होगा जो कि पैसे से लेकर भौतिक ज्ञान तक, हर तरह से भरे हुए रहते हैं फिर भी उनके हरकत अर्थात आचरण अर्थात जीने का ढंग काफी छोटा और घटिया होता है. 

क्योंकि उपयुक्त कमियां जो हमने ऊपर बताएं उसी कमियों में ए कहीं न कहीं अपने आपको पाते हैं. 

ऐसे ही लोगों को शिक्षित अज्ञानी कहा जाता है. अर्थात भौतिक ज्ञान का पढ़ा-लिखा मूर्ख. अब सवाल यह उठता है कि जिस व्यक्ति ने इंजरिंग ,डॉक्टरी इत्यादि की पढ़ाई की है उसने तो ज्ञान प्राप्त करने के लिए मेहनत किया ही है फिर भी वह मूर्ख हो जैसा आचरण क्यों करता है . क्यों उल्टे -सीधे रास्ते चलता है, जो दूसरे की स्त्री पर नजर डालता है, क्यों दूसरे की स्त्री के साथ शारीरिक संबंध जबरदस्ती बनाता है, क्यों पैसे की चोरी करता है, क्यों दारु शराब पीता है, क्यों अपने ही परिवार के लोगों पर गलत नजर रखता है,.... इत्यादि. इसका मतलब तो साफ-साफ यही निकल कर आता है कि उसका ज्ञान ठीक नहीं है. अर्थात जो उसने बहुत ही ज्ञान प्राप्त किया है वह पूर्णता ठीक नहीं है. 

क्योंकि वह ज्ञान अगर पूर्णता ठीक होता तो वह इस तरह की छोटी गलतियां करता ही नहीं. और आपने अधिकतर देखा होगा कि , बुड्ढों से लेकर जवान तक आज कर लोग यही गलतियां कर रहे, और पूछने पर वे अपने आप को पढ़ा-लिखा बताते है अर्थात ज्ञानी ही बताते हैं. 

फिर प्रश्न यही उठता है कि जब ज्ञानी ही है तो  अज्ञानियों जैसा आचरण क्यों कर रहे हैं? 

उत्तर यही है कि वह वास्तव में अज्ञानी  ही है. अब अज्ञानी व्यक्तित्व वाला मनुष्य ही अपने आप को ज्ञानी कहता है. 

इसीलिए श्री भगवत गीता में कहा गया है कि सभी विद्या के ज्ञान में, अध्यात्म रूपी विद्या का ज्ञान सबसे बड़ा होता है, और हमारे अध्यात्म रूपी विद्या का ज्ञान का स्रोत जो है वह श्री भगवत गीता ही है. 

क्योंकि यह में इस तरह का ज्ञान देती है कि हमें संसारी जीवन से मुक्ति दिला देती है और अमर बनाने का ज्ञान देती है ,अच्छा व्यवहार करने का ज्ञान देती है ,अच्छा आचरण करने का ज्ञान देती है अर्थात सब कुछ देती है और इस तरह का ज्ञान हमें धर्म के ज्ञान में ही मिलता है ना कि इंजीनियरिंग और डॉक्टरी वाले विद्या के अध्ययन में अर्थात b.tech -m.techऔर mbbs-md-ms के ज्ञान में. यह तो मात्र हमें पेट भरने वाला ज्ञान देती है. 

कुछ लोग सोच रहे होंगे कि क्या इन सभी ज्ञानो का कोई मतलब नहीं है? तो इसका उत्तर यही है कि बिल्कुल मतलब है लेकिन इतना भी मतलब नहीं है कि आपको यह अमरत्व दिला सके और दुनिया भर की सांसारिक समस्याओं से मुक्ति दिला सकते क्योंकि यह ज्ञान अपने आप में पूर्ण ज्ञान नहीं होता है और यह पूर्ण हितकारी ना होकर मात्र अल्प ही हितकारी होता है. और इस तरह का ज्ञान लंबे समय तक के लिए काम नहीं करता है. शरीर छोड़ते ही इस तरह का ज्ञान मिट जाता है जबकि अध्यात्म का ज्ञान शरीर छोड़ने के बाद भी अगली बार जब शरीर मिलता है फिर उसके आगे चलना शुरू कर देता है वह भी वहीं से जहां से इसने पिछले जन्म में छोड़ा था.


इस तरह से आप समझ ही गए होंगे कि टाइटल यह क्यों लिखा गया है कि जब तक जीवन है तब तक आप विद्यार्थी हैं. क्योंकि एक विद्यार्थी ही गीता के ज्ञान को जीवन भर मेहनत करके अपने आचरण में उतारने की कोशिश कर सकता है साधारण व्यक्ति नहीं. 

इसके साथ ही साथ आप लोगों ने यह भी जाना होगा कि किस तरह का ज्ञान हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है और क्यों सर्वश्रेष्ठ है यदि आप जान ही गए


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