Motivational Stories-3-मुर्ख और अज्ञानी पशुओ जैसा जीवन जीने से बचे

 यदि इस बार आपका जन्म इंसान के रूप में हुआ है तो अगली बार भी आपका  जन्म इंसान के रूप में हो यह जरूरी नहीं यह सब आपके कर्म पर डिपेंड करता है कि आपने इंसान का रूप में किस तरह का कर्म किया है. 


यदि मृत्यु के समय आपके अंदर रजोगुण की मात्रा अधिक रहती है तो आप अगले जन्म में इंसान ही बनते हैं वहीं अगर मृत्यु के समय आपके अंदर तमोगुण की मात्रा अधिक रहती हैं तो आप कीट - पतंगा इत्यादि बनते हैं, अगर तमोगुण में कुछ रजोगुण की मात्रा है तो आप रेंगने वाले जीव बनते हैं. वहीं अगर मृत्यु के समय आपके सतोगुण की  अधिक मात्रा है तो आप जीवन मरण से मुक्त हो जाते हैं अर्थात moksh ko प्राप्त कर लेते हैं अर्थात आपको फिर जन्म नहीं लेना पड़ता है. इस तरह से देखा जाए तो आप जीवन मरण से मुक्त होते हुए अर्थात मोक्ष ko प्राप्त होते हुए आप अमर हो जाते हैं और हमेशा - हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं फिर आपको जीवन -मरण के चक्र में नहीं फंसना पड़ता है. 


अर्थात कहने का मतलब यह हुआ कि आप को न तो बार-बार जन्म लेना पड़ता है और ना ही बार-बार मरना पड़ता है इन सब से आप मुक्त हो जाते हैं यही है सतोगुण का कमाल. 

सतोगुण की वृद्धि को कैसे बढ़ाएं- सतोगुण की वृद्धि मृत्यु के समय ज्यादा मात्रा में  हो   तो इसके लिए हमें क्या करना चाहिए . 




हमारे अंदर मृत्यु के समय सतोगुण की मात्रा अधिक हो इसके लिए हमें चाहिए कि हम धर्म के रास्ते पर चलें और धर्म के रास्ते पर हम तभी चल पाएंगे जब हमें धर्म का ज्ञान रहेगा और धर्म का ज्ञान हमें धर्म की किताब पढ़ने से ही आएगा और हमारे लिए धर्म का ज्ञान प्राप्त करना भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली हुई गीता से अच्छा और कोई नहीं हो सकता है, अर्थात हमें धर्म का ज्ञान प्राप्त करने के लिए श्री भगवत गीता की किताब पढ़नी चाहिए, और धर्म का ज्ञान प्राप्त करके, उसी के अनुसार आचरण करना चाहिए, ताकि यह अमृत रूपी ज्ञान की बातें हमारे जीवन में समाविष्ट हो सके और उसका हम ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकें, इसी धर्म के ज्ञान को अपने अंदर विकसित करने से हमारे अंदर सतोगुण की स्थापना होगी और मृत्यु के समय इसकी मात्रा जितनी बढ़ती जाएगी उतना ही ज्यादा हमें फायदा मिलेगा. 


हमारे सभी छात्र बंधु या दूसरे अन्य लोग इस बात को जरूर समझ लें कि गीता पढ़ने से उनको कोई हानि नहीं होगी जैसा कि वे लोग सोचते हैं या दूसरे अन्य लोग सोचते हैं ऐसा नहीं है कि गीता पढ़ने से आप वन को चले जाएंगे या सन्यासी हो जाएंगे यह साधु हो जाएंगे. वैसे होता यही है गीता पढ़ने से आप सन्यासी ही होते हैं यह साधु जैसे ही हो जाते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं हुआ कि आप कोई खास रंग के कपड़े पहने या घर छोड़कर चले जाए लेकिन इसका मतलब यही निकलता है की आप संसार में रहते हुए भी आप सन्यासी या साधु जैसे ही रहते हैं यह भले ही चीज लोगों को ना दिखे लेकिन अंदर से यही बदलाव हो जाता है ,क्योंकि अगर आप गीता पड़ेंगे तो आपके मन में वैराग्य आएगा क्योंकि आप को ज्ञान प्राप्त होगा. और जब ज्ञान प्राप्त होता है तो वैराग्य आता ही है, इसके साथ साथ स्वभाव साधु संतों जैसा होने लगता है. आप काफी शांत और ज्ञान को महसूस करने वाले ज्ञानी होते हैं. 

आप साधारण व्यक्ति नहीं रह जाते क्योंकि साधारण व्यक्ति बात बात पर गुस्सा होते हैं, उनमें चिड़चिड़ापन होता है तथा वासना की बहुत ही अधिक मात्रा रहती है इन्हीं सब कारणों की वजह से वह ज्ञानी नहीं हो पाते तो यह सब चीजें आपके अंदर खत्म हो जाते हैं. और यही चाहिए भी, भला अज्ञानी बन कर आप इस दुनिया में क्या पा लेंगे? 

इस संसार में रहते हुए धर्म का ज्ञान प्राप्त करना और उस रास्ते पर चलना थोड़ा सा कठिन है क्योंकि लोग तमाम तरह की बाधा डालते हैं इसलिए अपने अंदर के मन के भाव को लोगों से ना बताएं क्योंकि वह साधारण लोग जब आपकी कोमल मनोभाव को जब जानेंगे  तो जानकर आपका केवल मजाक  ही उड़ाएंगे और इससे आपको कष्ट होगा इसलिए आप साधारण लोगों से उतना ही बात करें जितना वह समझते हैं या समझना चाहते हैं. क्योंकि किसी वन में धर्म का ज्ञान प्राप्त करने के बाद उसी तरह से चलना या किसी आश्रम में धर्म का ज्ञान प्राप्त करके उसी के अनुसार चलना या किसी कुटिया में धर्म के अनुसार चलना आसान है लेकिन इस दुनिया में धर्म का ज्ञान प्राप्त करने के बाद उसी तरह से चलना काफी कठिन है या अत्यंत ही कठिन साधना मना जाता है.

वैसे भी

सबसे बड़ा साधक वही है जो संसार में रहते हुए साधना करता है. ऐसे साधक अपना दैनिक जीवन का काम भी करते हैं और धर्म का ज्ञान भी प्राप्त करते हैं और उसी के अनुसार आचरण भी करते हैं. जैसे यदि आपके शरीर पर कोई पूछना हो तो आप बड़ी आसानी से अपनी गर्दन को इधर-उधर घुमा सकते और लोगों से बातचीत भी कर सकते हैं. लेकिन वही अगर आप के सर पर कुछ बोझा रख दिया जाए तो उस समय गर्दन को इधर-उधर हिलाना काफी कठिन हो जाता है, उसी तरह अकेले में , बन में, आश्रम में, किसी कुटिया में, धर्म के रास्ते चलते हुए भगवान का ध्यान और साधना करना आसान है, लेकिन इस दुनिया में रहते हुए अपने परिवार के साथ रहते हुए और सबका ध्यान रखते हुए भक्ति भाव में लीन होना या धर्म के रास्ते पर चलते हुए भगवान का ध्यान लगाना काफी कठिन हो जाता है. इसीलिए सच्चा साधक उसी को माना गया है, जो कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के रास्ते चलते हुए भगवान की तरह आचरण करता है और उनकी वंदना तथा भक्ति करता है. इसीलिए घर परिवार में रहते हुए धर्म के रास्ते चलना और भक्ति भाव में लीन होना एक बहुत ही बड़ी तपस्या का काम है और इसे सही-सही वही साधककर सकता है जो एक सच्चा साधक  हो .



 जो छात्र-छात्राएं स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं और ज्ञान को प्राप्त करते हैं ऐसे छात्र छात्राओं को मैं तो यही कहूंगा कि आप अपने सिलेबस को पढ़ते रहे लेकिन साथ में गीता का ज्ञान भी प्राप्त करते रहे , इससे फायदा यह होगा कि एक तरफ आप अपना सिलेबस का ज्ञान भी प्राप्त कर सकेंगे जो कि आगे चलकर आपके  रोजमर्रा कि जीवन को चला सकेगा और दूसरी तरफ आप गीता पढ़कर धर्म का ज्ञान भी प्राप्त कर सकेंगे जो आपके लिए हमेशा हमेशा के लिए लंबे समय तक के लिए लाभकारी और गुणकारी सिद्ध होगा. 


आजकल जो हमें ज्ञान है, जैसे फिजिक्स, कंप्यूटर, मैथ, केमिस्ट्री, बायो, हिस्ट्री, भूगोल, राजनीति विज्ञान, इत्यादि इस तरह के ज्ञान से हम अपने लिए केवल खाने पीने के सामान ही जुटा सकेंगे. लेकिन हम इस तरह के ज्ञान से जीवन से मुक्ति नहीं पहुंच सकेंगे, क्योंकि इस तरह की जो ज्ञान होती है वह काफी सीमित होती है सही समय पर हमें क्या करना चाहिए और क्यों करना चाहिए क्योंकि इसमें इस तरह की कोई ज्ञान की बातें नहीं रहती  है . और जब तक हमें सही चीजों का ज्ञान नहीं पता होगा तब तक हम अपना उद्धार कैसे कर सकेंगे. बस केवल पशु पक्षियों या जानवरों की तरह अपना पेट भर सकेंगे, और ऐसा हर बार होता रहेगा जब जब हम लोग जन्म पाएंगे. क्योंकि हमें कुछ पता नहीं रहेगा बस हम केवल जी रहे होंगे हम क्यों जी रहे हैं क्यों मर रहे हैं अगली बार क्यों जिएंगे अगली बार क्यों मरेंगे इस तरह की चीजों की हमें कोई जानकारी नहीं होती है क्योंकि हम कोई जानकारी प्राप्त ही नहीं करना चाहते हैं ? 

क्योंकि इस तरह की जानकारी को प्राप्त करना हमें बेकार सा लगता है और लगता है कि इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है. हममें से ज्यादातर लोग ऐसा ही सोचते हैं. इसीलिए इस संसार में ज्यादातर लोग अज्ञानी ही है भले ही वह इंसान का जन्म पाए लेकिन उनका आचरण अज्ञानियों  और मूर्खों जैसा ही है और ज्यादातर लोगों का जीवन शैली तो जानवरों से भी बदतर है. केवल स्वादिष्ट भोजन से पेट भरना और स्त्रियों की इच्छा करना और उसी में लिप्त तराना ही जीवन है आजकल करके मॉडर्न थिंकिंग बस यही है. इसीलिए कहा जाता है कि आप ज्ञान प्राप्त करें और ज्ञान प्राप्ति धर्म के रास्ते पर चलकर ही मिलेगी और धर्म के रास्ते पर आप सभी चलें पाएंगे जब आप गीता का अध्ययन करेंगे. 


गीता के अध्ययन में बाधा-


शुरू शुरू में हो सकता है कि गीता पढ़ने जब आप बैठे तो आपका मन आनाकानी करे या यह भी हो सकता है कि कुछ लोग आपका मजाक भी उड़ाए लेकिन ऐसे लोगों पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग अधर्मी होते हैं जो गीता पढ़ने के लिए मना करते हैं या उसका मजाक उड़ाते हैं और अधर्म के रास्ते पर चलने वाले  अधर्मी का पतन होता ही है. इसलिए आपको दुनियादारी तथा लोगों के इरादों को भी समझना है . आपको यह भी समझना चाहिए कि यदि आप अच्छे रास्ते पर चल रहे हैं तो 10 लोग आपको ऐसे भी मिल जाएंगे जो आपको उस अच्छे रास्ते पर चलने से रोके और आपकी टांग को खींचे क्योंकि उन्हें जलन होती है कि कहीं यह व्यक्ति उनसे आगे ना निकल जाए. इसलिए लोग आपका मजाक भी उड़ाएंगे और आपको ऐसे धर्म वाले रास्ते पर चलने से रोकेंगे भी .इसी वजह से इस तरह की धार्मिक और गुणकारी चीज में आगे बढ़ने के लिए सबसे अच्छा उपाय यही है कि इसका ज्यादा प्रचार ना करें शुरू शुरू में,  अर्थात अगर आप धर्म के क्षेत्र में आ रहे हैं और ज्ञान को प्राप्त कर रहे हैं और शुरुआती दौर है , तो इसका विवरण या जानकारी अपने मित्रों या अन्य लोगों को ना दें क्योंकि हो सकता है कि ऐसे लोग आपके मार्ग में बाधा डाले इसलिए पहले ज्ञान प्राप्त करें फिर आपको खुद ही पता चल जाएगा कि आपको आगे करना क्या है ?


बिना किसी को कुछ बताएं आराम से अकेले में ज्ञान का लाभ ले और जब ज्ञान कंप्लीट हो जाए तब इसके बारे में लोगों को बताएं ताकि अन्य लोगों का भी फायदा हो, क्योंकि शुरुआत में आपको ज्ञान नहीं रहेगा और उस समय अगर चीजों को बताने लगेंगे की आप गीता पढ़ते हैं और उससे यह फायदा है एंड शो ऑन ....और उसी समय लोग अगर आपकी बातों का मजाक उड़ाने लगे और आपके काम को बेकार और समय की बर्बादी ऐसा कहकर साबित करने लगे , और आप अगर उनकी बातों में  आ जाते हैं तो हो सकता है कि आप वह  काम जिसे की गीता पढ़ना कहते हैं , वह आप करें ही ना, और यही वजह हो सकता है कि आप धर्म का ज्ञान प्राप्त भी ना कर पाए. इसलिए शुरू शुरू में आप गीता पढ़ते हैं तो इसकी चर्चा लोगों से करना उचित नहीं होगा. पहले ज्ञान प्राप्त कर ले फिर लोगों से उस ज्ञान की बातें कर सकते हैं. क्योंकि तब तक आप ज्ञानी हो चुके होंगे और लोगों को कैसे डील करना है इसका तरीका भी आप जान चुके होंगे. 


गीता जो कि भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली हुई है, अत्यंत ही गुणकारी है और जन -समाज का कल्याण करने वाली है. भगवान की बाड़ी बड़े-बड़े ऋषि- मुनियों की बाड़ी से श्रेष्ठ और उत्तम है क्योंकि भगवान ऋषि-मुनियों, संत ,महात्मा . महा पंडित इन सभी से अत्यंत ही ऊपर है. 

कितने भी प्रकार के ऋषि, मुनि, संत, महात्मा, महा पंडित, तथा दूसरे अन्य प्रकार के साधु जन का ज्ञान सीमित है और काफी सीमित है, जबकि भगवान श्री कृष्ण का ज्ञान जोकि भगवान विष्णु के अवतार हैं वह त्रिलोकीनाथ है उनका ज्ञान अनंत है क्योंकि भगवान त्रिलोकीनाथ श्री हरि विष्णु अनंत ही हैं और इस सृष्टि के रचयिता है. वह न केवल सृष्टि के ही रचयिता हैं बल्कि समस्त ब्रह्मांड के रचयिता है. अतः उनके ज्ञान के आगे अन्य किसी लोगों का ज्ञान नहीं ठहरता  है , 

भगवान श्री हरि विष्णु के सामने कोई कितना भी बड़ा ज्ञानी क्यों न हो लेकिन उनके सामने अज्ञानी   ही है . 


तमाम प्रकार के ऋषि, मुनि, संत, महात्मा, महा पंडित, तथा दूसरे अन्य प्रकार के साधु जन की वाणी जो है वह साधारण वाणी है अर्थात उनके ज्ञान की जो वाणी है वह बिल्कुल ही साधारण है और सीमित है. 

जो कि भगवान श्री हरी विष्णु की जो वाणी होती है, वह कोई साधारण वाणी नहीं होती है बल्कि एक दिव्य वाणी होती है. और भगवान श्री हरि कृष्ण विष्णु के मुख से निकली हुई इस दिव्य वाणी वाली गीता का मुकाबला कोई भी ग्रंथ नहीं कर सकता है, क्योंकि गीता एक अलौकिक पवित्र ग्रंथ है, जो भगवान के मुख से निकली हुई है. जिसको पढ़ कर तमाम प्रकार के दुराचारी तथा सदाचारी सभी लोग, सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाते हैं और अमृत को प्राप्त होते हैं. यह जीव कल्याण के लिए अत्यंत ही गुणकारी चीज है, और इसे समझने वाला भी अत्यंत ही गुड़ी माना जाता है. 


इस आर्टिकल में अपना बहुमूल्य समय देकर आपने कुछ बहुमूल्य ज्ञान भी प्राप्त किया होंगे ऐसी हम आशा करते हैं. इसी तरह की जानकारी पाने के लिए इस वेबसाइट को सब्सक्राइब करें और दूसरे अन्य आर्टिकल भी पढ़ें ताकि जानकारी और बढे  और आप और ज्यादा अपने जीवन में अच्छे बदलाव ला सकें.


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