Inspirational quotes- अनंत ज्ञानी बने और अपना जीवन सवारे

 भगवान अनंत है, सब कुछ उनका अनंत है, फिर भी उनके मुख से निकली हुई गीता के भाव का अंत नहीं है, अर्थात अनंत भगवान के मुख से निकली हुई गीता के भाव भी अनंत है. इसको पढ़ने से किसी भी व्यक्ति के जीवन में ज्ञान का अपूर्व भंडार होता है. 


इसके रहन-सहन तथा व्यवहारिक जीवन में अत्यंत ही पॉजिटिव उत्थान होता है अर्थात बढ़ोतरी होती है. 

आज तक जितने लोगों ने गीता के बारे में अपना व्याख्या दिया है उन सभी व्याख्या को भी अगर इकट्ठा कर लिया जाए तो भी गीता के भाव को वह पूर्णता नहीं व्यक्त कर सकते हैं जैसे किसी  कुएं से अगर वर्ष भर पानी पिया जाए असंख्य लोगों द्वारा, तो भी उस कुए का पानी खत्म नहीं होता है. और कुएं का पानी जस का तस रहता है. इसी तरह अनंत व्याख्या गीता के देने पर भी उसके अनंत गुड़ में कोई फर्क नहीं पड़ता है उसके भाव अनंत ही रहते हैं, अर्थात गीता का भाव अनंत है अनंत था और अनंत रहेगा. 




कुएं के जल जल की  तो सीमा होती है लेकिन गीता की कोई सीमा नहीं है . गीता को जितनी भी बार पढ़ा जाता है उतनी ही बार अलग-अलग तरह के भाव उसमें से निकलते हैं. 

गीता ज्ञान का अनंत भंडार है. 

गीता पढ़कर ही आप ज्ञानी हो सकते हैं और अपना जीवन  बदल  सकते हैं. केवल  गीता  पढ़े ही   नहीं बल्कि पढ़कर उसे अपने जीवन में भी उतरे  तथा   सही आचरण करे .


व्यवहारिक जीवन में जो डॉक्टर, इंजीनियर इत्यादि बनते हैं उनमें जो पाठ्यक्रम होता है उसको पढ़कर  आप अपना जीवन शैली में बहुत ज्यादा पॉजिटिव चेंज नहीं कर पाएंगे उससे केवल खाने पीने की ही व्यवस्था कर पाएंगे. जबकि गीता को पढ़ने से आपकी बुद्धि में अभूतपूर्व बदलाव आएगा, और पॉजिटिव बदलाव आएगा, वर्तमान, भूत भविष्य, धरती गगन दूसरे अन्य लोक इत्यादि के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. 


आप खुद देखेंगे कि गीता पढ़कर आप बहुत ही ज्यादा अच्छा कर रहे हैं. आपकी बुद्धि निरंतर बढ़ती हुई प्रतीत होगी और आपको ऐसा लगेगा कि आप पहले जो गलतियां कर रहे थे उसे आप सुधार सकते हैं. गीता पढ़ने से  आपको पता चलता है कि क्या खराब है और क्या सही ? निर्णय लेने की क्षमता आपको यह गीता बताती है. किस  समय क्या करना चाहिए  ? किस स्थिति में क्या करना चाहिए ? इन   सब बातों का वर्णन आपको गीता में मिल जाएगा और उसे पढ़कर आप अपने ज्ञान में सुधार ला सकते हैं और जिंदगी के नए आयाम छू सकते हैं.


कितने लोगों के दिमाग में यही रहता है, की गीता को तो केवल पंडित लोग ही पढ़ते हैं अर्थात जो पंडित कुल का रहता है  वही गीता पड़ता है . लेकिन ऐसा नहीं है. पंडित , इंसान अपने गुण और कर्मों से होता है. इसका किसी जात से कोई लेना देना नहीं होता है यह मात्र एक भ्रम है. 

गीता का ज्ञान प्राप्त करने के बाद कोई भी इंसान पंडित ही हो जाता है. अब इसे चाहे कोई भी इंसान किसी भी जात का पढ़ें  वह पंडित ही है. अब इसका मतलब यह भी नहीं है कि केवल पढ़ लेने से ही आप पंडित हो जाते हैं बल्कि उसकी ज्ञान को प्राप्त करने के लिए आप मेहनत भी करना पड़ता है . 

क्योंकि हो सकता है कि शुरू शुरू में इसके भाव आपको समझ में ना आए क्योंकि इसके भाव काफी महीन होते है ,  इसलिए आपको  अपने दिमाग को भी महीन बनाना पड़ेगा और यह सब पढ़ते पढ़ते ही आएगा . 

इसीलिए पंडित का मतलब गुण और कर्म से होता है ना की किसी विशेष घर पैदा होने से. 

कुल मिला जुला कर पंडित का मतलब ज्ञानी से होता है लेकिन समाज में गलत धारणा फैली हुई है पंडित का मतलब किसी खास घर में किसी खास जाति में पैदा होने वाले को ही पंडित कहते हैं . 

तो यहां कहने का मतलब यही हुआ कि गीता का अध्ययन कीजिए और अपने अंदर ज्ञान का अभूतपूर्व विकास कीजिए और उस विकास से होने वाले फायदे को अपने जीवन में तथा अपने परिवार के जीवन में तथा अपने अगल-बगल , रिश्तेदारों में लगाएं . ताकि सब का उद्धार हो सके.

thanks 

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