IIT Kya Hai ?IIT Kaise Karein iit की पुरी जानकारी

 नमस्कार छात्र बंधु इस आर्टिकल में आपका स्वागत है इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि आई डी की तैयारी कैसे करनी चाहिए. आईआईटी की तैयारी हम तभी कर पाएंगे जब हम मेहनत से पढ़ेंगे









हर साल 15 से 2000000 छात्र IIT की प्रवेश परीक्षा में भाग लेते हैं लेकिन उनमें से कुछ छात्र बंधु लोग ही चयनित होते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि कंपटीशन बहुत ही तगड़ा है क्योंकि आईआईटी संस्थान कम है जबकि सीटों पर लड़ने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है अर्थात छात्रों की संख्या बहुत ही ज्यादा इसी वजह से कहा जा सकता है कि कंपटीशन बहुत ही तगड़ा है .




आईटी प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए योग्यता -




आईआईटी प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए छात्र को कम से कम 12 वीं पास होना चाहिए, और फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ के साथ पास होना चाहिए अगर छात्र  ने Class 12th में फिजिक्स ,केमिस्ट्री, मैथ लिया है तो वह IIT में प्रवेश परीक्षा दे सकता है 




इसके साथ ही साथ आईआईटी की प्रवेश परीक्षा के लिए छात्र को कम से कम 60 परसेंट होना चाहिए 12वीं में पीसीएम ग्रुप के साथ . तभी वह IIT की प्रवेश परीक्षा दे सकता है और


तभी जाकर वह  IIT प्रवेश परीक्षा के लिए योग्य माना जाता है आईटी प्रवेश परीक्षा के लिए 




आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए उम्र सीमा - कोई एज लिमिट नहीं है. 



जनरल कैटेगरी के लिए उम्र सीमा - 

ओबीसी कैटेगरी के लिए उम्र सीमा- 

एससी एसटी कैटेगरी के लिए उम्र सीमा-




उपर्युक्त सभी categories  में केवल जनरल को छोड़कर बाकी अन्य सभी categories में एज रिलैक्सेशन की छूट मिल जाती है.



देश की प्रमुख आईटी संस्थाने -


टाइम मैनेजमेंट पर जरूर ध्यान दें-


समय प्रबंधन बहुत ही जरूरी है अगर आप आईआईटी  की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो समय प्रबंधन पर अत्यधिक ध्यान दें क्योंकि अधिकतर यही देखा गया है कि छात्र को  प्रवेश परीक्षा में क्वेश्चन ज्यादा आ रहे होते हैं लेकिन समय की कमी के कारण व उसका उत्तर नहीं दे पाता है यही बात अधिकतर सुनने को मिली है हर छात्रों के मुंह से . इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी यह है कि आप अपना समय प्रबंधन ठीक कर ले.टाइम मैनेजमेंट अपना तगड़ा करने के लिए  बस केवल एक ही उपाय है कि आप मॉडल पेपर ले ले और उसको एक नियमित समय में हल करने की कोशिश करें , 10 साल का पेपर हल करने से फायदा यह होगा आपको यह विश्वास आएगा कि आप परीक्षा में क्वेश्चन पेपर हल कर लेंगे या नहीं , किस तरह की बाधाएं आएंगी, और उन बाधाओं को आप कैसे निकलेंगे, और साथ ही साथ आपको पता चलेगा कि alloted Time Interval  समय अवधि में आप उस क्वेश्चन को हल कर पा रहे हैं कि नहीं इस तरह की तमाम बातों का उत्तर पिछले 10 साल के पेपर को हल करने से मिल जाएगा . इसलिए आपको चाहिए कि पिछले 10 साल का पेपर जरूर जरूर से हल करें ताकि बाद में समय का रोना ना रोए. 




10 साल का  पेपर क्यों हल करें- 


पिछले 10 साल का या भी कल का पेपर हल करने से यह समझ में आता है कि  आईआईटी प्रवेश परीक्षा की क्या स्ट्रैंथ है  मतलब कि किस स्ट्रेंथ के लेवल पर उसके क्वेश्चन तैयार होते हैं , भले ही अगर हम 20 साल पुराना पेपर हल कर रहे हो लेकिन IIT  का जो स्ट्रैंथ है वह कमजोर नहीं होता है केवल फॉर्मेट भले ही चेंज हो जाए अर्थात क्वेश्चन पूछने का ढंग और उसको और प्रजेंट करने का ढंग भले ही अलग हो जाए लेकिन क्वेश्चन की जो स्ट्रैंथ और पावर होती है वह आईआईटी में कम नहीं होती है  . इसीलिए अगर हम पुराना पेपर हल कर रहे हैं तो क्वेश्चन की स्ट्रेंथ और किस प्रकार का क्वेश्चन पूछा गया है और किस तरह से प्रश्न पूछा गया है उसका विवरण ले लो और उसे अच्छी तरह से समझ ले की पिछले 20 साल में जो आईआईटी के प्रश्न पूछे गए हैं उनकी क्वालिटी ,स्ट्रैंथ और पावर क्या थी ? इसलिए 20 साल का पेपर जरूर जरूर से हल कर ले इससे आपका माइंडफ्रेम अच्छा हो जाएगा और यह हर तरह से फायदेमंद है भी . पिछले 20 साल का पेपर हल करने से आपको किसी भी प्रकार का घटा नहीं होने वाला है , बल्कि इससे फायदा ही फायदा है . 


इसके साथ साथ एक और काम करना कि पिछले 3 या 4 साल के पेपर पर एक्टिव रहिएगा . इससे फायदा यह होगा कि आप करंट फॉर्मेट में किस तरह के प्रश्न पूछे जा रहे हैं आईआईटी  में उसका अनुमान आप लगा सकेंगे.




तो इस तरह से अपने आप को दिमागी समझदारी में कन्वर्ट करना है ताकि कोई गलती ना हो सके , याद रखेगा तो जितनी कम से कम गलतियां करेंगे उतनी ही ज्यादा  आपकी संभावना बढ़ जाएगी एग्जाम को CRACK करने की . इसलिए कोशिश करें कि कम से कम गलतियां ताकि आपका प्रवेश परीक्षा आसानी से निकल जाए और आप जिंदगी का आनंद लें.




आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए मॉडल पेपर हल करें -




अगर आप आईडी जैसे परीक्षा में सफल होना चाहते हैं तो मॉडल पेपर को जरूर हल करिए ,क्योंकि मॉडल पेपर हल करने से आपको अपनी एबिलिटी का कुछ एहसास होता है , आपको पता चलता है कि आप में कहां क्वालिटी है और कहां क्वालिटी नहीं है आपकी शक्ति क्या है ? और आपकी कमजोरी क्या है ?और कहां आपको टारगेट करना है इन सभी चीजों की जानकारी आपको बहुत ही आसानी से मिल जाती है . 


यह भी मत मान लीजिएगा कि जो मॉडल पेपर क्लियर कर लेता है उसका आईआईटी में होना लगभग तय है , ऐसा कुछ नहीं  है , यह सब मात्र एक गलत धारणा है , एडी का मॉडल पेपर SOLVE करने से  आपको आपका कॉन्फिडेंस लेवल पता हो जाएगा . 


क्योंकि ज्यादातर छात्र यह देखा गया है कि छात्र तैयारी तो खूब करते हैं लेकिन मॉडल पेपर करने से डरते होता है क्योंकि मॉडल पेपर करने से छात्र थोड़ा इनकंफर्टेबल महसूस करते हैं इसीलिए व मॉडल पेपर सॉल्व करने से कतराते हैं ,लेकिन फायदा यही करता है इसलिए हमें मॉडल पेपर जरूर जरूर से हल करनी चाहिए वैसे मैंने पहले ही कह दिया है कि यह जरूरी नहीं है कि जो मॉडल पेपर खूब SOLVE कर ले उसका एक ही बार में selrction हो जाए या जो मॉडल पेपर नहीं हल कर रहा है उसका IIT में सिलेक्शन ना हो ऐसा कुछ नहीं है . 

कुछ भी हो सकता है आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में क्योंकि होनी को जो होना रहता है वही होता है वह इंसान के बस में नहीं है. 




इसी बात पर हमें भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन की जो बात है वह याद आ गई जो गीता में कही गई थी 


भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि हे अर्जुन तुम्हारा सिर्फ कर्म पर ही अधिकार है कर्म के फल पर नहीं. इसलिए  तुम्हें कर्म करनी चाहिए और फल की कदापि चिंता नहीं करनी चाहिए . फल का मिलना या ना मिलना या तुम्हारे बस में नहीं है. यह देवताओं के बस में होता है. यह सब जानकर तुम्हें केवल कर्म करना चाहिए




और यह बात एकदम सत्य भी है और सत्य होना भी चाहिए जिसे  भगवान श्री हरि कृष्ण नेकहा है वह भला झूठ कैसे हो सकता है ? भले ही इंसान इसे देर - सवेर से समझे लेकिन यह तो सत्य ही है इसलिए आप आईआईटी की केवल तैयारी करें . 


आप उसमें पास होंगे या फेल होंगे या रिजल्ट क्या होगा ? इससे आपको कोई लेना देना नहीं है. भले ही चाहे रिजल्ट को लेकर आप अच्छा महसूस करें या खराब , लेकिन फिर भी आपको उसके लिए कोई माथापच्ची नहीं करनी चाहिए क्योंकि उस पर आपका कोई कंट्रोल है और  जिस पर कंट्रोल नहीं रहता  उसको लेकर दिमागी तनाव लेना और अपने आपको मुसीबत में डाल देना कहीं भी समझदारी की बात नहीं है यह सब समझते हुए हमें बहुत ही बुद्धिमानी के साथ स्टेप बाय स्टेप चीजों को समझना चाहिए. और बिना कर्म फल की चिंता किए गए आराम से कर्म करते हुए जो मिलना रहेगा वह मिल ही जाएगा. 


वैसे भी जिस चीज पर अपना कोई भी बस नहीं है उस चीज के लिए बहुत ही ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए क्योंकि जब कोई कंट्रोलिंग ही नहीं है तो फिर क्या परेशान होना. 

ऐसा सोचते हुए अपने आप को हम मना लेंगे. क्योंकि कभी-कभी मन को मनाना भी बहुत ही जरूरी हो जाता है.



क्योंकि अगर आप मानसिक तौर पर फिट रहेंगे तभी आईआईटी के लिए आप फिट हो पाएंगे. 




अच्छे से अच्छे लड़कों का आईटी में सिलेक्शन नहीं होता है और नॉर्मल से नॉर्मल लड़कों का सिलेक्शन आईआईटी में हो जाता है इसलिए होने को कुछ भी हो सकता है इसीलिए कहा गया है कि आप केवल मेहनत करते रहिए जो मिलना है वह मिल ही जाएगा. अर्थात कर्म फल की चिंता नहीं करें. 



आईआईटी का वैकल्पिक उपाय जरूर रखें- 




जैसा कि हमने अभी ऊपर बताया कि आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में हर साल 15 लाख से 2000000 छात्र एग्जाम देते हैं और जबकि आईआईटी जैसे संस्थानों में  बहुत ही मामूली ही सीटें होती हैं तो बताइए कि कहां से यह संभव है कि प्रत्येक छात्र को सीट मिल जाए तथा प्रत्येक छात्र की जो मन की मुराद है  वह पूरा हो जाए . 


 तो जाहिर सी बात है कि हर छात्र का सपना यहां पूरा नहीं होने जा रहा है इसलिए जिन छात्रों का  सपना नहीं पूरा होता है वह दूसरे ढंग से अपना सपना पूरा करें . क्योंकि आईआईटी  में हर किसी का सिलेक्शन नहीं होता है, इसका मतलब यह भी नहीं है कि जिनका IIT में सिलेक्शन नहीं होता है वह कमजोर छात्र होते हैं या मूर्ख होते हैं , ऐसा कुछ नहीं किसी लड़के का आईटी में सिलेक्शन ना होने के बहुत से कारण हो सकते हैं, मैंने पहले ही बता दिया था कि , सीटों की संख्या कम है और सीटों पर लड़ने वाले छात्रों की संख्या ज्यादा है, इसलिए हर किसी को तो सीट मिल नहीं सकती, किसी ने किसी को तो जाना ही होगा, इसलिए आप अल्टरनेटिव भी अपने पास रखें ताकि अगर आपका सिलेक्शन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी अर्थात आईआईटी प्रवेश परीक्षा  मे नहीं होता है तो आप क्या करेंगे ? ज्यादातर तो यही देखा गया है कि छात्र उदास हो जाते हैं . सिलेक्शन नहीं हुआ तो जैसे जिंदगी जैसे खत्म  हो गई अब जिंदगी में कुछ भी प्राप्त करने लायक नहीं रहा , और भी जिंदगी में अपने आप को एक अयोग्य छात्र मानने लगते हैं , इस तरह से उनका मनोबल गिर जाता है, तथा किसी भी प्रकार के काम में उनका मन नहीं लगता है, दिन पर दिन पढ़ाई का ग्राफ नीचे चला आता है और निरंतर नीचे ही चला जाता है, वह तो परेशान रहते ही हैं साथ में उनसे झूठे लोग अर्थात उनके परिवार के लोग भी परेशान हो जाते हैं . 


कुल मिला जुला कर अगर आप समझे तो खेल यह है कि अगर  IIT में सिलेक्शन हो जाने से नहीं आप बहुत तेज नहीं हो जाते हैं और जिनका नहीं होता है वह गधे हैं ऐसा भी नहीं माना जा सकता है. क्योंकि मैंने पहले ही बता दिया था कि आईआईटी जैसे संस्थानों में अच्छे से अच्छे छात्र का सिलेक्शन नहीं होता है तो वही झंडू से जुड़े छात्रों का सिलेक्शन भी हो जाता है तो होने को कुछ भी हो सकता है . 

इसीलिए मैंने ऊपर यह भी कहा था कि आप केवल कर्म करो फल की चिंता मत करिए जो मिलना है वह मिल ही जाएगा. 


क्योंकि कर्म करना ही हमारे बस में फल हमारे बस में नहीं है अर्थात हम  जैसा कर्म करें उसी के अनुसार हमें फल भी मिल जाए ऐसा बहुत ही कम होता है या यूं कहें कि मात्र संयोगवश  ही ऐसा हो जाता है. 


इसीलिए मैं यहां पर कह रहा हूं कि आपको आईआईटी का अल्टरनेटिव भी रखना चाहिए . ताकि अगर आपका IIT प्रवेश परीक्षा में सिलेक्शन नहीं होता है तो आप उस अल्टरनेटिव लाइन से अपने कैरियर की गाड़ी आगे खींच सकें. और अपनी जिंदगी को सफल तथा खुशहाल बना सकें. 

इसलिए हर छात्र को अल्टरनेट उपाय रखना ही चाहिए यह बहुत ही जरूरी है या यूं कहें कि अत्यंत ही जरूरी है.



अगर आप किसी दूसरे संस्थान से या बोर्ड से इंजरिंग करते हैं तो इसमें कोई गलत बात नहीं है या कोई इज्जत जाने की बात नहीं ज्यादातर छात्रों मैं यही देखा गया है कि अगर वह IIT जैसे  संस्थानों संजरंग नहीं करते हैं तो वह मान लेते हैं उनका इज्जत चला गया या यू समझते हैं कि IIT की नजरों में तो इन जैसे संस्थानों की कोई वैल्यू ही नहीं है तो , इन संस्थानों से क्या बी टेक करूं अर्थात क्या इंजरिंग का कोर्स  करूं ? इस तरह की तमाम बातें वह सोचते रहते हैं. 


ज्यादातर बातों में उनकी लोक - लज्जा ही शामिल होती है इस तरह से तमाम प्रकार के कंपटीशन करके अपने आपको तनाव में डाल देते हैं . 

और कभी-कभी तो यह भी देखा गया है कि छात्र हाइपरटेंशन का शिकार भी हो जाते हैं.


इसीलिए मैं कह रहा हूं की, छात्र को अल्टरनेटिव ऑप्शन की सुविधा जरूरी रखनी चाहिए. क्योंकि जिंदगी अपने बस में नहीं है. यह धरती है, यहां पर कुछ भी मनचाहा नहीं मिल जाता, या यू समझने की बहुत ही नहीं के बराबर चीजें हमें प्राप्त होती हैं, जहां तक मनचाहा चीजों का सवाल है.




यह सब केवल माइंड की सोच है या यूं कहें या केवल माइंड जो कमियां हैं वह सब है आपको इन सब लफड़े में नहीं पड़ना चाहिए और IIT का alternative रखना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि आगे बहुत कुछ है जिंदगी में करने के लिए. 


देखिए अगर मान ले कि आपका IIT जैसे संस्थान में एडमिशन नहीं होता है और आप चाहते हैं भविष्य में आपकी करियर का ग्राफ ठीक-ठाक चलें  तो आप गेट की प्रवेश परीक्षा पास करके एमटेक कर सकते हैं. गेट की प्रवेश परीक्षा आईआईटी की तरह आईआईटी द्वारा ही संचालित की जाती है. बीटेक लेवल की परीक्षा जो कि हम लोग 12वीं के बाद देते हैं उसे आईआईटी कराती है और ग्रेजुएशन लेवल की जो परीक्षा होती है उसे आईआईटी, गेट के नाम से कराती है



GATE की प्रवेश परीक्षा के लिए सबसे बड़ी योग्यता यह होनी चाहिए कि किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से बीटेक की डिग्री प्राप्त होनी चाहिए चाहे वह IIT से प्राप्त हो या किसी दूसरे अन्य बोर्ड से प्राप्त हो आपके पास B.TECH की डिग्री है तभी आप गेट की परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं . एग्जामिनेशन देने के बाद जो आपको परसेंटाइल मिलता है उस परसेंटाइल के आधार पर आपको आईआईटी जैसे संस्थानों में एमटेक करने के लिए ऑफर दिया जाता है. हर साल लाखों छात्र इस गेट की परीक्षा में सम्मिलित होते हैं इस आशा से कि उनका सपना पूरा हो जाए आईआईटी में पढ़ने का, इस अपना को पूरा करने के लिए वे दिन रात मेहनत करते जिनमें से कुछ लोगों के सपने पूरे भी होते हैं. 


तो अगर आप किसी कारणवश आईआईटी से बीटेक नहीं कर पाए हैं और जिंदगी में इसका आपको मलाल है कि अपने  IIT से बीटेक नहीं किया है तो ,आपके लिए आगे भी अवसर है आईआईटी में पढ़ने का . 

बस आपको केवल जानकारी होनी चाहिए , की IIT में पढ़ने के और भी तरीके हैं.इसीलिए मैं कहता हूं कि आपको व्यर्थ चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि रास्ते एक नहीं हजार हैं बस देखने की नजर चाहिए . 


इसीलिए मैं कहता हूं कि आपको उदास नहीं होना चाहिए अगर आप आईटी में या किसी भी प्रवेश परीक्षा में फेल होते हैं तो. जब तक जीवन है तब तक तमाम तरह की चीजें हैं सफल होने के चांसेस बहुत ज्यादा है .कोई यहां पर (आईआईटी में ) सक्सेस हो जाता है तो वही सफल होने वाला व्यक्ति आगे चलकर कहीं फेल भी हो जाता है . और जो व्यक्ति अभी फेल हुआ रहता है वही आगे चलकर सक्सेस हो जाता है .तो फेल और पास का चक्कर है वह जीवन भर चलता रहता है. कभी इंसान खेल होता है तो कभी पास हो जाता है. 


को इस प्रकार के उदाहरण से भी समझा जा सकता है- 

जैसे कि मान लीजिए मोहन ने IIT  की प्रवेश परीक्षा पास की वह भी अच्छे RANK से, काउंसलिंग मैं जाते समय वह थोड़ा सा नर्वस हो गया और हड़बड़ा गया इस वजह से जो ब्रांच उसे चुनना चाहिए था और जो कॉलेज उसे चुनना चाहिए था वह जून नहीं पाया, और इस तरह से वह गलत कालेज और गलत ब्रांच छोड़ दिया अर्थात वह चीज चुन लिया जो उसे उतना पसंद नहीं था. खैर मोहन ने जैसे नहीं  तैसे कॉलेज में एडमिशन  तो ले लिया क्योंकि उसने आईटी प्रवेश परीक्षा पास की थी इसलिए एडमिशन तो लेना बनता ही था , लेकिन वह उतना खुश नहीं था जितना उसे होना चाहिए. खैर उसने पढ़ाई बहुत ही अच्छे से करना शुरू किया. 


पहले सेमेस्टर में उसने काफी अच्छे नंबर पाए, लेकिन दूसरा सेमेस्टर वह फेल भी हो गया. जैसे नहीं पैसे कर करवाओ फर्स्ट ईयर को क्लियर किया इस दौरान उसके फर्स्ट ईयर में 2 बैक थे. अच्छा हुआ कि दो-तीन  पेपरों में और खेल नहीं हुआ नहीं तो उसका पेपर बैक की जगह ईयर बैक हो जाता . और इस तरह तो पढ़ाई का पूरा लय बिगड़ जाता . खैर भगवान की मेहरबानी थी इस वजह से उसका ईयर बैक नहीं हुआ . 

लेकिन सेकंड ईयर में हुआ फर्स्ट सेमेस्टर फिर फेल हो गया. और इस बार वह इस तरह से फेल था कि वह 4TH सेमेस्टर में खबर भी नहीं कर सका. अंततः इस बार वह ईयर बैक का शिकार हो गया था अर्थात सेकंड ईयर में उसका ईयर बैक आ गया. 


इस तरह से देखा जाए तो उसने 4 साल का कोर्स 5 साल में पूरा किया. इस वजह से जो बहुत ही अच्छी खासी कंपनियां आती थी उसे सेलेक्ट नहीं करती थी. और कैंपस सिलेक्शन में उसे बहुत ही मामूली कंपनी की नौकरी मिली, जिसमें उसका पैकेज बहुत ही मामूली था. वहीं अन्य छात्र जिनकी रही थी उससे खराब थी तथा जिन्होंने B.TECH को केवल 4 सालों में ही पूरा किया. उनका कैंपस सिलेक्शन बहुत ही अच्छा रहा. तथा उनको एक नहीं दो -दो ,तीन - तीन कंपनियों ने ऑफर किया . 


तो जहां पर मैं यही बताना चाह रहा हूं कि एक इंसान कहीं पर भी फेल हो सकता है , और कहीं पर भी पास भी हो सकता है, मोहनी शुरुआती दौर में बहुत ही अच्छे RANK के साथ B.TECH की प्रवेश परीक्षा पास की लेकिन जब B.TECH का कोर्स करने गया तो वहां उसे ईयर बैक और पेपर  बैक का शिकार होना पड़ा ,नतीजा उसने 4 साल का कोर्स 5 साल में पूरा किया . 

तो इसी से आप समझ सकते हैं कि इंसान के पास होने और फेल होने का कोई एक नियमित या फिक्स दारा नहीं है . 

कोई भी, कहीं भी फेल हो सकता है और कभी भी फेल हो सकता है. वही इसका उल्टा भी सत्य है अर्थात कोई भी, कभी भी सफल हो सकता है और कहीं भी सफल हो सकता है तथा किसी समय भी सफल हो सकता है. 


इससे हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि हमें फेल या पास होने पर बहुत ही ज्यादा चिंतन मंथन नहीं करना चाहिए क्योंकि कोई भी चीजें फिक्स नहीं है. यह सब चीजें समय के अनुसार बदलती रहती है. 


लोग आईआईटी जैसे संस्थानों से बीटेक करते हैं अच्छी जगह पर नौकरी करते हैं अगर देखा जाए तो वह इस सब समय के दौर से जो वह गुजरते हैं  वे  इस दौरान वह पास होते हैं. लेकिन जिंदगी की परीक्षा में फेल हो जाते हैं. अर्थात जब भी परिवारिक जीवन में आते हैं तो वह फेल हो जाते हैं उन्हें समझ में नहीं आता है कि परिवारिक जीवन किस तरह से जिया जाए. उनके परिवार में तमाम तरह की लड़ाई झगड़े, दोषारोपण, एक दूसरे से नफरत की भावना, एक दूसरे से जलन की भावना रखना... इत्यादि जैसी चीजें उत्पन्न हो जाती है. जिसको वह व्यक्ति संभाल नहीं पाता है मतलब यह है कि वह व्यक्ति जो कि काफी पढ़ा लिखा है और अच्छी जगहों पर नौकरी कर रहा है वह अपने परिवार की खराब स्थिति को समाप्त नहीं कर पाता है जबकि उसके पास रुपए-पैसे से लेकर शिक्षा तक सभी चीजें हैं .और इस तरह से देखा जाए तो वह व्यक्ति यहां पर फेल हो जाता है. 


वही एक कम पढ़ा लिखा व्यक्ति जिसके पास बहुत ज्यादा पैसा भी नहीं है और ना ही वह बहुत ही ज्यादा शिक्षित है फिर भी वह अपने परिवार को अच्छी तरह से पाल लेता है वह भी शांति और खुशीहाली के साथ . तो यहां पर यह कम - पढ़ा लिखा व्यक्ति और कम धनवान व्यक्ति जीत जाता है अर्थात सफल हो जाता है. अर्थात पास हो जाता है. 


तो यहां पर कहने का मतलब यही हुआ कि इंसान के पास होने और फेल होने का कोई एक फिक्स  दायरा नहीं है. इसीलिए जिंदगी में जब कभी कहीं भी फेल हो तो यह ना समझे कि यह मेरा अंतिम पड़ाव था . बल्कि यह समझे कि तो मात्र एक शुरुआत है क्योंकि जब तक जिंदगी है तब तक आप कहीं फेल होंगे कहीं पास होंगे, और इसी तरह की चीजें बदल बदल कर आती ही रहेंगी जब तक आप मृत्यु को प्राप्त नहीं हो जाते हैं. 


इसीलिए गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि इंसान को अपने सफल होने पर बहुत ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए और ना ही असफल होने पर उसे बहुत ही ज्यादा दुखी होनी चाहिए क्योंकि सफलता और असफलता दोनों ही चीजें बदलती रहती है और उस चीज के लिए कभी बहुत ही ज्यादा हर्ष या दुख नहीं होना चाहिए जो कि निरंतर बदलती रहती है और बहुत ही जल्दी जल्दी बदलती रहती है.








आईआईटी प्रवेश परीक्षा निकलने के बाद क्या करें- 


 चलिए मान लेते हैं कि आपका आईआईटी  प्रवेश परीक्षा में सिलेक्शन हो गया है उसके बाद आप क्या करेंगे ? 


तो प्यारे मित्रों IIT प्रवेश परीक्षा निकलने के बाद आपको देनी होती है काउंसलिंग और उस काउंसलिंग में आप को चुनना होता है अपना मनपसंद ब्रांच. 

 उस मनपसंद ब्रांच में आपके रैंकिंग के हिसाब से आपको ब्रांच को दे दिया जाता है जैसे आपने 10 कालेजों को चुना जो की IIT के हैं और उन 10 कॉलेजों में आपने कंप्यूटर इंजीनियरिंग को रिफरेंस दिया है तो आपकी RANKING की बेसिस पर आपको उन कालेजों में वरीयता दी जाएगी जिसमें आपका रैंक एक्जिस्ट करता है . 


जैसे मान लीजिए कि आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर सीट के लिए 70 सीट है और टॉप हंड्रेड लड़कों ने उन 70 सीटों के लिए अप्लाई किया है तो उन हंड्रेड लड़कों में जिसकी अच्छी रहेगी उसे ही कंप्यूटर साइंस दिया जाएगा और जिसकी RANKING अच्छी नहीं रहेगी उसे IIT कानपुर में कंप्यूटर साइंस ना देकर दूसरे कॉलेज में कंप्यूटर साइंस का ब्रांच दे दिया जाएगा जहां से वह छात्र बीटेक कर सकता है इस तरह से चीजों की व्यवस्था की जाती है .






काउंसलिंग के लिए जाते समय आपको बहुत ही ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि लोग उस समय कंप्यूटर के बारे में ज्यादा नहीं जा रहे होते यहां लोगों से मतलब छात्रों से क्योंकि छात्र आईआईटी प्रवेश परीक्षा में इतना उलझे रहते हैं कि कंप्यूटर की बेसिक नॉलेज भी नहीं प्राप्त कर पाते हैं ऐसी हालत में क्या होता है कि वह सही ढंग से अपना काउंसलिंग कंप्लीट नहीं कर पाते हैं और चाहते हैं किसी और कॉलेज में किसी और ब्रांच से पढ़ना और वह चुन लेते हैं कोई दूसरा कालेज और कोई दूसरा ब्रांच इस तरह की बहुत ही चीजें देखी गई है और बहुत बार देखी गई है . इसलिए आपको बहुत ही ध्यान से अपनी काउंसलिंग में भाग लेना है और कोई गलतियां नहीं करनी है ताकि भविष्य में आपको किसी तरह का पछतावा उठाना पड़े.


आपको किसी तरह की कोई गलतियां नहीं करनी है क्योंकि एक बार गलती हो गई तो आपको बहुत ही लंबे समय तक इसका हर्जाना पड़ेगा और जिंदगी भर पछतावा करना पड़ेगा क्योंकि एक बार सीट एलॉट हो जाने पर उसको चेंज करना लोहे के चने के जमाने के बराबर हो जाता है .




प्रैक्टिस करो काउंसलिंग में जाने से पहले कुछ रिहर्सल जरूर करो और साथ ही साथ कुछ गाइडलाइन भी जरूर ले लें  सबसे अच्छा तरीका यही होगा कि अपने साथ किसी अनुभवी व्यक्ति को ले जाएं और जितना संभव था हो सके उतना उसका मदद प्राप्त करें ताकि कोई गड़बड़ी की गुंजाइश  ही ना रहे .




काउंसलिंग के समय सारे डॉक्यूमेंट अपने पास रखें- 




अगर आप काउंसलिंग करने जा रहे हैं तो उस समय आपके पास सारे डॉक्यूमेंट होने चाहिए यहां पर मैं काउंसलिंग केवल आईडी जैसे संस्थानों की बात नहीं कर रहा हूं आप किसी भी संस्थान में जाएं चाहे वह यूपी STATE वाला संस्थानों या किसी स्टेट बोर्ड का इंजरिंग वाला संस्थान ही क्यों ना हो, अर्थात कहने का मतलब किसी के लिए भी अगर आप काउंसलिंग के लिए जा रहे हैं तो आपके पास सारे डॉक्यूमेंट होने चाहिए क्योंकि काउंसलिंग में सबसे ज्यादा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ही होता है . इसलिए डॉक्यूमेंट जरूर ले जाएं. सारे डॉक्यूमेंट को अच्छी तरह से रख ले और ले जाते वक्त यह भी ध्यान रखें कि कहीं यह डॉक्यूमेंट रास्ते में कहीं गिर ना जाए इस वजह से सेफ्टी का भी ध्यान जरूर रखें. 


यह सब मैं बातें इसलिए बता दे रहा हूं क्योंकि मैं भी जिंदगी में कभी इस दौर से गुजरा हूं. और अपने अनुभव को एक नॉलेज का बंडल बनाकर आप लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहा ताकि आप लोगों का भविष्य में कोई नुकसान ना हो सके. 

और ऐसा बिल्कुल ना समझे कि मैं यह सब जानकारी मैं किसी इंटरनेट के माध्यम से निकाल रहा हूं या कोई मुझे किताब मिली है उस किताब से मैं यह सब कह रहा हूं. जैसा कि अन्य वेबसाइट वाले करते हैं. 

मैं यहां पर केवल आप लोगों को शुद्ध और सही चीजे बताने की कोशिश करता हूं और वह भी पूरा डिटेल में जो आपकी जिंदगी में थोड़ा सा बदलाव सही ढंग से लाए. क्योंकि बदलाव लाना ही केवल काफी नहीं होता है बल्कि बदलाव अच्छे ढंग से लाना जरूरी माना जाता है. 




तो आगे हम चर्चा करते हैं-


काउंसलिंग में ज्यादातर आपको दसवीं के मार्कशीट और उनके सर्टिफिकेट तथा दूसरे अन्य चीजों की जरूरत पड़ती है, 


यहां पर नीचे पूरा उसका विवरण दिया जा रहा है कृपया ध्यान से पढ़ें.


दसवीं का मार्कशीट 


दसवीं का सर्टिफिकेट 


12वीं का मार्कशीट


12वीं का सर्टिफिकेट 


जाति प्रमाण पत्र 


निवास प्रमाण पत्र 


आधार कार्ड 


पैन कार्ड 


करैक्टर सर्टिफिकेट 




उपरोक्त सभी सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है और इन सर्टिफिकेट के ओरिजिनल कॉपी के साथ डुप्लीकेट कॉपी ले जाए . क्योंकि वहां पर ओरिजिनल कॉपी के साथ सब डुप्लीकेट की भी आवश्यकता पड़ती है.


साथ ही साथ आप अपने तीन चार फोटो भी ले जाएं  यह तीन चार फोटो कलर में हो और यही 3 या चार फोटो ब्लैक एंड वाइट फॉर्मेट में होना चाहिए


इसके साथ-साथ आप एक ब्लू कलर का और एक ब्लैक कलर का पेन भी अपने साथ ले जाएं क्योंकि इनकी जरूरत वहां आपको पड़ेगी .


काउंसलिंग के समय लड़कियों पर ध्यान ना दें- जब आप काउंसलिंग के लिए जाते हैं तो आप बहुत ही रिलैक्स होते हैं और क्योंकि उस समय आप प्रवेश परीक्षा दे दिए होते हैं और आप का रिजल्ट भी आ गया होता है केवल कॉलेज को ALLOT करवाना रहता है और ऐसी हालत में आपको गलतियां करने के चांसेस बढ़ जाते हैं क्योंकि काउंसलिंग के समय तमाम तरह की लड़कियां आई  रहती हैं और वह भी बड़ा विचित्र-  विचित्र पोशाक पहने . ऐसी हालत में आपका मन डोल जाता है और आकर्षण  बढ़ने लगता है और इसी छोटी भूल में आप बड़ी मिस्टेक कर सकते हैं अर्थात काउंसलिंग में आप बड़ी मिस्टेक कर सकते हैं इसलिए माइंड क्लियर और शुद्ध रखें क्योंकि यह बात अच्छी तरह से समझ ले कि  अंतिम समय में छोटी सी छोटी असावधानी आपको बड़ी पराजय में धकेल देती है . इतना कुछ समझते हुए मैं यही कहूंगा की काउंसलिंग हो जाने दे फिर जो मन करे वह करें. लेकिन यहां पर भी मैं यही कहूंगा कि जिंदगी साफ-सुथरी ही जीने की कोशिश करिए. ताकि एक बार जब आप जिंदगी को पीछे मुड़कर देखे तो कोई भी पछतावा या अफसोस का जो भाव है वह मन में ना आ सके.






आईआईटी की फीस- आईआईटी की फीस की बात करें तो यह 1 साल का लगभग दो लाख के ऊपर चला जाता है अर्थात पर समेस्टर आपको सवा लाख फीस देनी पड़ती है इस तरह कुल 8 सेमेस्टर के लिए आप लोगों को 8 लाख से 10 लाख तक फीस देनी पड़ती है नीचे में प्रत्येक कॉलेज का ब्यौरा दे रहा हूं कि किस कॉलेज के लिए कितना फीस लगता है कृपया उसे ध्यानपूर्वक पढ़ें. 




बी टेक कोर्स की अवधि- 4 साल का होता है अर्थात अगर आपको बीटेक की डिग्री प्राप्त करनी है तो आपको 4 साल तक की पढ़ाई पढ़नी पड़ती है यह साल सेमेस्टर में बटा होता है अर्थात 1 साल में 2 सेमेस्टर होता है इस तरह से देखा जाए तो कुल 8 सेमेस्टर होता है और प्रत्येक सेमेस्टर में आपको आंसर जो कि काफी मोटी भी होती है और लगभग 6 से 7 पेपर यानी एक साल में करीब आपको 6:00 से पढ़नी पड़ती है. 




कुकुर बिलार झूला कर यह समझा जा सकता है कि आई डी 4 साल का होता है और प्रत्येक साल में 2 सेमेस्टर होते हैं और कुल आपको 8:00 से की परीक्षा देनी पड़ती है




टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां