अगर माता-पिता दुराचारी हो तो क्या करें -What to do if the parents are vicious?

💞 माता-पिता दुराचारी 🌹




🌼🧡माता-पिता अगर दुराचारी हो फिर भी उनका निरादर नहीं करना चाहिए, आजकल यही देखा गया है कि जरा सा कमी हुई नहीं और संतान माता-पिता का निरादर करना शुरू कर देते हैं. चाहे माता-पिता अच्छे ही क्यों ना हो. यहां तो दुराचारी होने की बात दूर की है अगर माता-पिता सदाचारी हैं फिर भी उन्हें अपनी संतान से ही तमाम प्रकार के कष्ट मिलते हैं. 


द्वापर युग में ही भगवान श्री कृष्ण ने बता दिया था कि कलयुग में संतान ही माता पिता को उपदेश देंगे, तथा शिष्य ही गुरु को सिखाएंगे. और यही आजकल हो भी रहा है, पहले संतान अपने माता पिता से सीखता और जैसे ही उसका सीखने की प्रक्रिया खत्म हो जाती है वह अपने माता पिता को सीखाने लगता है, जो कि शास्त्रों के अनुसार एक गलत आचरण माना जाता है.  अब यहां पर ऐसा भी नहीं है कि सारे संतान अपने माता पिता को सिखाते हैं अर्थात गलत आचरण करते हैं. कुछ संतान अच्छे भी होते हैं लेकिन इसका परसेंटेज बहुत ही कम है.


💚यही हाल शिष्य का भी है , शिष्य गुरु के पास तब आता है जब उसके पास ज्ञान नहीं होता है या लगभग नहीं के बराबर होता है, वह शिष्य गुरु की छत्रछाया में ज्ञान प्राप्त करता है और एक बार जब ज्ञान की प्राप्ति उसे हो जाती है तो वह गुरु को ही ज्ञान देने लगता है. 


 यह बातें भगवान श्रीकृष्ण ने पहले ही बता दी थी कि कलयुग में इसी तरह लोग आचरण करेंगे. और इस तरह का आचरण कर - कर भी अपने आपको वे लोग अपने आपको काफी बुद्धि वाला जीव मानेंगे. जबकि अगर ध्यान से देखा जाए और समझा जाए तो इस तरह की बुद्धि का कोई मतलब नहीं है. क्योंकि यह अच्छा आचरण नहीं है यह एक दुराचारी का आचरण है कि वह अपने माता-पिता को शिक्षा दें तथा अपने गुरु को भी शिक्षा दें. खास करके तब जब इसकी कोई जरूरत भी नहीं है.


तो कलयुग में इसी तरह का व्यवहार है कोई किसी का आदर नहीं करता है छोटा ही बड़ा हो जाता है, आजकल प्रत्येक घर में आप देखेंगे कि छोटे बच्चे ही बड़े लोगों को सिखा रहे हैं और बड़े लोग इसका तनिक भी बुरा भी नहीं मानते. वैसे ज्ञान कहीं से भी और किसी भी प्रकार से मिल जाए उसे लेना चाहिए यह तो आपने सुना ही होगा और यह ठीक भी है , लेकिन ज्ञान प्राप्त करने का और ज्ञान देने का भी एक तरीका होता है. 


आपका पुत्र आपसे विनम्र भाव होकर चीजों की चर्चा करें और उसमें आपको ज्ञान मिले तो वह ठीक है लेकिन अगर आपका पुत्र आपको ज्ञान एक आदेश के रूप में दे रहा है या रूखे स्वभाव से दे रहा है तो वह एक बुरा आचरण है. ऐसा बुरा आचरण करने वाला पुत्र को खुद ही और ज्यादा ज्ञान प्राप्ति की जरूरत है, क्योंकि अज्ञानवश  ही वह ऐसा खराब आचरण कर रहा है.


यह सब चीजें बहुत ही बारीकी हैं अगर आप ध्यान नहीं देंगे तो लगेगा कि यह कोई बात है ही नहीं, यह तो आजकल का मॉडल फैशन है, लेकिन इसी मॉडर्न फैशन में कितनी असभ्यता छुपी हुई है इसका आप तब पता कर पाएंगे जब इसको बहुत ही ध्यान और बारीक की नजर से देखेंगे. 


कुछ लोग के पिता बहुत ही दुराचारी होते हैं, अपने युवावस्था के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार के पाप किए होते हैं, जैसे स्त्रियों और लड़कियों का शोषण करना, चोरी करना, अपने स्वयं के माता -पिता  का दुर्व्यवहार करना, परिवार के लोगों का सम्मान ना करना, परिवार में गाली गलौज करना....... इत्यादि तरह के व्यवहार उनके जीवन शैली में शामिल होते हैं पुत्र जब बड़ा होता है तो उनके इसी व्यवहार को याद करता है और कहीं ना कहीं पिता को मन में ही मन में दोषी और दुराचारी मानता है. 


यकीन मानिए अगर पिता का ऐसा व्यवहार है तो वह दुराचारी है लेकिन दुराचारी होते हुए भी वह इतना बुरा नहीं है कि पुत्र उसका निरादर करें. क्योंकि पिता ही पुत्र का जन्मदाता है और अपने जन्मदाता का हमें निरादर नहीं करना चाहिए सर्वदा आदर ही करना चाहिए . शास्त्र में कहीं भी यह नहीं लिखा गया है कि अगर पिता दुराचारी है तो पुत्र को भी उसके साथ दुराचार का व्यवहार करना चाहिए तथा उसके दुराचार की सजा पुत्र दे. इस तरह की बातें कहीं नहीं लिखी गई हैं और ना ही आम जन इसे सही भी नहीं मानते हैं.


रामायण में भी भगवान श्री राम ने कहा है कि माता-पिता कितने कितने भी बुरे हो लेकिन हमें उनका सर्वदा सम्मान ही करना चाहिए. और यह सम्मान मात्र दिखावा ना हो बल्कि अंतः किरण में होना चाहिए . अगर माता-पिता दुराचारी है तो उसकी सजा देने के लिए भगवान हैं. पुत्र का तो बस यही धर्म है कि अपने माता-पिता की सेवा करें तथा उनका आदर सम्मान करें. 



इतना आर्टिकल आपने ऊपर पढ़ लिया होगा लेकिन फिर भी मैं दावे के साथ कहता हूं कि अगर कोई भी पुत्र अपने माता-पिता को थोड़ा सा भी खराब पाता है तो वह सजा देने के लिए एकदम लालायित रहता है . 


कलयुग में बस यही आचरण चल रहा है, इसी वजह से परिवार में बिखराव भी हो रहा है . 

वैसे भी किसी इंसान को अपने परिवार के अंदर, अपने मित्र बंधुओं का गुण देखना चाहिए. अगर उसमें कोई दोष हो तो उससे प्रेम से बात कर कर उसका समाधान करने की कोशिश करनी चाहिए, याद रखिएगा आप केवल कोशिश कर सकते हैं उस कोशिश में आपको सफलता मिल भी सकती है या नहीं भी. 


अगर आप कोशिश में असफल होते हैं तो इसका मतलब यह ना हो कि आप हिंसक हो जाए. याद रखिएगा ज्ञानी पुरुष वही होता है जो अपने ज्ञान से परिवार को जोड़ता है और जो परिवार तोड़ने का काम करता है वह ज्ञानी नहीं केवल अज्ञानी ही होता है, चाहे भौतिक रूप से किसी भी प्रकार की डिग्री उसने क्यों ना   हो जैसे- इंजीनियरिंग की डिग्री, डॉक्टर की डिग्री,LLB,BCOM,MCOM,BED.PHD.BTECH.MBBS,MPHIL  ....... इत्यादि कुछ भी क्यों ना हो वह मात्र अज्ञानी के शिवाय और कुछ नहीं है. 


 कितने लोग को अपने ज्ञान और डिग्री की अहम चढ़ी रहती है वह अपने ज्ञान और डिग्री के अलावा कुछ समझना ही नहीं चाहते ऐसे लोगों के लिए यह आर्टिकल बहुत ही जरूरी है और मैं तो यही आशा करूंगा कि यह आर्टिकल आप दूर-दूर तक फैलाएं ताकि लोगों को समझ में आ सके कि वाकही में शुद्ध और सही ज्ञान है क्या ? इस आर्टिकल से यह भी मतलब नहीं है कि यहां पर आपके ज्ञान और विज्ञान के नॉलेज को खराब बताया जा रहा है, लेकिन ज्ञान और विज्ञान के साथ-साथ आचरण ज्ञान होना जरूरी है ,और यह अत्यंत जरूरी है. 


अगर किसी के पास ज्ञान और विज्ञान का ज्ञान नहीं है लेकिन आचरण का ज्ञान है अर्थात धर्मशास्त्र का ज्ञान है तो भी वह बहुत ही ज्ञानी पुरुष माना जाएगा जबकि उल्टा एकदम सही नहीं है. 


इस आर्टिकल में अपना बहुमूल्य और कीमती समय देने के लिए आप लोग का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद ! इस वेबसाइट पर विजिट करके आप अन्य इसी प्रकार के आर्टिकल पढ़ सकते हैं और ज्ञान का लाभ ले सकते हैं.💦🧡

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