अपने विवेक का निरादर - aaj tak ka gyan

🌼 ऐसी गलती न करें  🌼


💕💚भगवान ने सभी इंसानों को बुद्धि और विवेक दिया है, अच्छा कर्म करने का या मंदा कर्म करने का, अर्थ अर्थ व भगवान द्वारा किए गए इस विवेक का चाहे अच्छा कर्म करें चाहे बुरे कर्मों में लिप्त रहे वह दोनों ही काम करने के लिए स्वतंत्र है. उसे किसी भी प्रकार का बंधन नहीं है भगवान की तरफ से, लेकिन अंत में उसे कर्म के अनुसार ही चीजें मिलती है, क्योंकि अंत में शरीर साथ छोड़ देता है, पंच तत्वों से बना यह शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, और सभी रिश्ते नाते शमशान जाते-जाते खत्म हो जाते हैं, बच जाता है तो सिर्फ कर्म, वैसे तो यह कर्म दिखता नहीं है लेकिन इंसान की छाया के रूप में यही अंत में उसके साथ जाता है. और इसी के अनुसार मनुष्य का दोबारा जन्म होता है. अच्छा कर्म करने पर अच्छे लोको में अच्छी जगहों पर जन्म होता है और बुरा कर्म करने पर बुरे लोको में बुरे जगहों पर जन्म होता है. 


अतः भगवान ने जो विवेक दिया है और जो स्वतंत्रता दी है कर्म को करने की उस स्वतंत्र कर्म में अच्छा ही कर्म करना चाहिए, ताकि हमें कोई समस्या का सामना मरणोपरांत नहीं उठाना पड़े. कहते हैं कि माता पिता को दुख देने वाला अगले जन्म में कछुआ का जन्म पाता है, वही स्त्रियों में अत्यधिक कामवासना रखने वाला या रुचि नीले वाला व्यक्ति अगले जन्म में हिजड़ा बनता है..... इसी तरह की बहुत सारी चीजें, कहने का अभिप्राय यहां पर यहीं  है कि इंसान को यह नहीं समझना चाहिए कि वह बुरे कर्म करेगा और इसका उसे कुछ भी हर्जाना नहीं भुगतना पड़ेगा, भगवान सबका कर्म देख रहे हैं , यह जानकर शुभ कर्म करना चाहिए ना कि कुकर्म, क्योंकि सुकर्म करने के बाद आपको अच्छे लोको की प्राप्ति होती है, वही को कुकर्म करने पर आपको नरक लोक या पाताल लोक की भी प्राप्ति होती है जहां पर दुख की असहनीय सीमा है. 


हो सकता है कि आपको यह शब्द केवल शब्द ही लगे लेकिन जब यही शब्द आपके जीवन में उतरेगा तब आपकी रूह कांप जाएगी.


भगवान ने सभी इंसानों को बुद्धि और विवेक दिया है, अच्छा कर्म करने का या मंदा कर्म करने का

 लेकिन अज्ञान व मनुष्य उसका निरादर कर देता है, और तमाम तरह के राग द्वेष में लिप्त होकर, सुख सुविधाओं का चीज जुटाने के चक्कर में, दूसरों पर अपने कर्म और वाणी से अत्याचार करके बुरे कर्मों में संलग्न हो जाता है. तथा निरंतर बुरे कर्म ही करता है और जन्म जन्मांतर तक केवल दुख ही दुख भोगत्ता रहता है. 



इस पोस्ट में अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद अगर आपने इस आर्टिकल से कुछ सीखा है तो इसे जरूर दूसरों को शेयर करें ताकि वह भी इसके ज्ञान का फायदा उठा सकें, जिससे वे अपने जीवन की विचारधारा को बदलकर एक अच्छा आचरण लाएं. 

धन्यवाद !💦💚

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