zindagi na milegi dobara जिंदगी दो बार नहीं 4 बार नहीं हजारों - करोड़ों बार मिलेगी

  जिंदगी ना मिलेगी दोबारा- 


बहुत से लोगों ने यह फिल्म देखा होगा, फिल्म देखकर जाहिर सी बात है लोगों ने इसका आचरण भी किया होगा, कहने का मतलब यह होगा कि फिल्म का स्टाइल भी कुछ लोगों ने फॉलो किया होगा. लेकिन क्या फिल्म का यह स्टाइल फॉलो करने योग्य था. 





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सबसे पहली बात की फिल्म का टाइटल ही गलत है, और टाइटल की बात तो छोड़िए इस पर जो चल रहा है वह और भी खराब है. आपको कैसे पता कि जिंदगी दोबारा नहीं मिलेगी या तीन बार नहीं मिलेगी या चार बार नहीं मिलेगी आपको तो पता है नहीं फिर आप कैसे कह सकते हैं कि जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, पहले ठीक से पता करिए फिर कुछ बातें कहिए या पहले ठीक से समझो और फिर उसके ऊपर अपना आचरण प्रस्तुत कीजिए अर्थात उससे अपने दैनिक जीवन में उतारिए. 


केवल इतना समझ लीजिए कि जिंदगी दो बार नहीं 4 बार नहीं हजारों - करोड़ों बार मिलेगी और यह तब तक मिलती रहेगी जब तक आप मोक्ष प्राप्त नहीं कर लेते हैं अगर मोक्ष के बारे में आप नहीं जानते हैं कि यह क्या होता है तो आप मेरे दूसरे आर्टिकल्स पढ़ सकते हैं उसमें आपको पता चलेगा कि मोक्ष क्या होता है ऐसा नहीं कि मोक्ष शब्द हमने बनाया है .  यह मोक्ष शब्द भगवान ने बनाया है और इसका क्या कार्यक्रम है   यह आपको आर्टिकल पढ़कर  ही पता चल जाएगा . 



फिल्मों के चक्कर में ना पड़े- 


फिल्म में तमाम तरह की उल्टी सीधी बातें लोग बताते रहते हैं उसमें ज्यादातर कुछ सीखने लायक नहीं रहता है या बहुत ही कम सीखने लायक रहता है. ज्यादातर यही देखा गया है कि युवा फिल्म देखते हैं और फिर उसमें का कुछ आचरण अपने जीवन में उतारने लगते हैं, जिससे उनका नुकसान ही होता है, अगर कुछ सीखना ही है तो रामकृष्ण परमहंस, गौतम बुद्ध का लिखा चीज पढ़ें, इन लोगों ने बहुत ही अच्छा लिखा है जीवन को सुधारने के लिए और जीवन में अच्छे निर्णय लेने के लिए, इनकी लिखी हुई बातें फिल्म की तरह ही पढ़िए- देखिए और समझिए ,यकीन माननीय आपको बहुत ही ज्यादा फायदा मिलेगा. 



आप एक बार इन लोगों की किताबें पढ़िए फिर आपको खुद ही समझ में आएगा . केवल यहां पढ़ लेने से कुछ नहीं होगा, एक बार पढ़िए फिर आपको खुद ही पता चलेगा कि इनकी सोचने की क्षमता और जीवन को देखने की क्षमता कितनी सुंदर और अच्छी थी.💦

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