TOP MOTIVATIONAL QUOTES STORY 2021 In Hindi



INSPIRATIONAL QUOTES


 धन का घमंड कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि दुनिया में एक से बढ़कर एक धनी है यदि आप यह सोचते हैं कि आपही केवल धनी हैं , तो यह आपका मात्र भ्रम ही रहता है क्योंकि धनी से बढ़कर भी धनी होते हैं और उन से बढ़कर भी धनी - संपन्न होते हैं, 




सायं काल में जब जुगनू उड़ते हैं तब वे सोचते हैं कि वे ही इस संसार को प्रकाश दे रहे हैं, पर नक्षत्रों के उदय होते ही उन जुगनूओ का घमंड शांत हो जाता है .  जुगनूओ का घमंड शांत होने के बाद नक्षत्रों को घमंड हो जाता है कि वे ही संसार को प्रकाश दे रहे हैं , लेकिन चंद्रमा के उदय होने पर ही नक्षत्रों को भी लज्जित होना पड़ता है अर्थात उन्हें भी समझ में आ जाता है कि उनकी औकात क्या है और इस तरह उनका भी घमंड चूर चूर हो जाता. फिर चंद्रमा यह सोचता है कि वही इस संसार को प्रकाश दे रहा है और इस भाव से उसेमैं भी घमंड आ जाता है , और उसे यह लगता है कि उसका प्रकाश पाकर यह संसार हंस रहा है, तथा खुशी का अनुभव कर रहा है , फिर जब देखते ही देखते सूर्य उदय होता है तब चंद्रमा भी मलिन हो जाता है , अर्थात उसे भी शर्मसार होना पड़ता है और उसका घमंड टूट जाता है. 



तो कहने का मतलब यही था कि इस संसार में एक से बढ़कर एक है. अतः किसी को किसी प्रकार का घमंड नहीं करना चाहिए, चाहे वह का घमंड हो या ज्ञान का घमंड हो या अर्थ का घमंड हो. स्त्रियों को अपनी सुंदरता का भी घमंड हो जाता है तथा पुरुष लोग को अपने हैंडसम होने का घमंड हो जाता है और इंसान प्रजाति में लोगों को कभी-कभी बलवान और शक्तिमान होने का भी घमंड हो जाता है ,. इसी तरह की अनगिनत चीजें हैं जिन पर लोगों को घमंड हो जाता है, और इसी घमंड के भाव में आकर व तमाम तरह की गलतियां भी करते हैं. 



जब धनवान व्यक्ति को घमंड होता है तो वह हर जगह पैसे की ही बात करता है, उसे यही लगता है कि बस जो है वही है, और वह पैसे से सब कुछ खरीद सकता है, लेकिन शायद वह यह नहीं जानता कि दुनिया में एक से बढ़कर एक धनी है हो सकता है कि वह इसे जानता हो लेकिन वह इन सब चीजों को महसूस नहीं करना चाहता है वह केवल अपने धन को और अपने आपको ही महसूस करना चाहता है इसी वजह से वह अन्य सत्य चीजों को नहीं देख पा रहा है . कितने लोग तो धन होने पर लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर देते हैं. 




जब एक धनवान व्यक्ति ज्यादा पैसा कमाता है तो कम पैसा कमाने वाले व्यक्तियों पर अपना रौब जमाता है, और सामने वाले को यह महसूस करवाता है कि वह बहुत ही छोटा और बेकार का इंसान है क्योंकि उसके पास पैसा नहीं है उसकी तरह . इस तरह से देखा जाए तो वह एक साइलेंट रूप से अत्याचार ही करता है अर्थात हिंसा ही करता है बस इस अत्याचार में वह किसी शस्त्र का इस्तेमाल ना करके अपने हाव-भाव का इस्तेमाल करता है. लेकिन यह सब एक ज्ञानी व्यक्ति ही समझ सकता है , अज्ञानी लोग इन महीन बातों पर ध्यान नहीं देते हैं, वे केवल विचारों के प्रभाव में बहते हैं और अपनी सनक के प्रभाव में तो वो और ज्यादा बातें हैं. 




एक धनवान व्यक्ति कुछ नहीं समझना चाहता है, वह ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने और उसका इफेक्ट लोगों पर देखने की कोशिश करता है, उसके धनवान होने का असर लोगों पर ठीक-ठाक पड़ रहा है कि नहीं अगर ठीक-ठाक पड़ रहा है कि नहीं, अगर ठीक-ठाक पढ़ भी रहा है तो, परिणाम के तौर पर उसे उन लोगों से प्रशंसा मिल रही है कि नहीं यह बात भी वह सोचता रहता है, मतलब मान सम्मान की इच्छा उसे सताती रहती है, 

और वह शायद यह नहीं जानता कि दूसरों से मान सम्मान और हमदर्दी केवल अहंकार को ही बढ़ाती है, और अहंकार से इंसान का स्वयं का ही विनाश होता है , और इस विनाश में इंसान को दुख ही केवल पहुंचता है . 




आजकल तो  मॉडर्न फैशन चला है , लोग कोट पेंट टाई पहनना ही अपना मॉडर्न फैशन समझते हैं , और एक एंड्रॉएड का मस्त सेट भी होना चाहिए उनके पास और दुनिया भर की दूसरी अन्य टीम टॉम की अन्य चीजें भी होनी चाहिए कभी भी अपने आप को कंप्लीट समझते हैं, लोगों पर रोब दिखाना ही आजकल सभ्यता माना जाता है , यह सब हरकत मूर्खता और अज्ञान ही नहीं है तो और क्या है ? अब यह जरूरी नहीं है कि हर कोर्ट, पेंट, टाई पहनने वाला व्यक्ति दुष्ट प्रकृति का ही होता है लेकिन 100 में से 90% लोग आजकल आपको ऐसे ही मिलेंगे जिनके भाव में दुष्टता का भाव रहता है , अहंकार का भाव रहता है . दरअसल कोट पेंट टाई पहनने से मन में जो भाव आता है वह अहंकार का ही भाव आता है . 




आपको यह जानकर थोड़ा सा अजीब लगा होगा कि कोट, पेंट ,टाई पहनने से भला अहंकार का भाव कैसे आता है ? अगर आप यह नहीं समझ पा रहे हैं तो आप इस चीज को बहुत ही आराम से समझ सकते हैं, इसके लिए जरूरी यह है कि बस केवल आप एक दिन फटे पुराने वस्त्र पहने, और उसके प्रभाव को देखने की कोशिश करिए अर्थात observe करने की कोशिश करिए तो आपको जैसे महसूस होगा कि आप बहुत ही गरीब है, उसी तरह अगर आप गेरुआ वस्त्र पहनेंगे तो आपको मन में बड़े ही शांत और अच्छे विचार आएंगे, मलमल का कुर्ता पहनने से मन में अत्यंत ही कोमल विचार आते हैं और गीत गाने का मन करता है. 



उसी प्रकार सूट-बूट पहनने से मन में अहंकार का भाव आता है .  सब चीजें केवल सुनकर ही नहीं समझा जा सकता है बल्कि आपको वही करना होगा जो बताया गया है अर्थात आपको  इन तमाम प्रकार के वस्त्र को पहनना होगा तथा उसे महसूस करके ही उन वस्त्रों के गुणों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है. 




अत्याचार चाहे जैसे भी की जाए वह हिंसा ही होती है अत्याचार को आप शस्त्रों के द्वारा भी कर सकते हैं और किसी को भला बुरा कह कर भी कर सकते हैं, तथा अपने हाव-भाव से लोगों को छोटा और घटिया साबित करके भी आप हिंसा ही करते हैं. और जो हिंसा करता है वह अपने धर्म से कहीं ना कहीं हट जाता है, और बाद में उसे इसका दुख भोगना ही पड़ता है, मरने के बाद सारा धन उसका छूट जाता है, पत्नी का साथ भी छूट जाता है, बंधु बांधव भी शमशान की घाट तक ही छूट जाते हैं, तथा यह शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है. और अंत में जाता है तो आपका धर्म ही. आपने जैसे कर्म किए रहेंगे उसी कर्म के अनुसार आपको फिर दोबारा जन्म मिलता है. अगर आपने केवल दूसरों को बहुत ही ज्यादा सताया है कष्ट दिया है तथा अत्याचार किया है तो आपको कीड़े की योनि मिलती है , अर्थात कीट के रूप में आपका जन्म होता है , इसी तरह आपने अगर अपने माता पिता को को कष्ट दिया तो अगली बार जब आपका जन्म होगा तो आपको कछुए की योनि प्राप्त होगी , इसी तरह आपको अपने कर्म के अनुसार ही जन्म मिलेगा , कुल 184000 योनिया है , इन योनियो में से एक योनि इंसान की भी होती है . जो कि अच्छे कर्म करने से ही मिलती है. लेकिन यह भी है कि अगर आपको कभी मनुष्य का शरीर मिला है और अज्ञान वश आपने बुरे कर्म ज्यादा किए हैं जैसे लोगों को ज्यादा कष्ट दिया है सताया है तो फिर अगली बार आपको मनुष्य योनि में जन्म लेना लगभग नामुमकिन सा हो जाता है. और आपको कीट ,पतंगा ,छिपकली ,कछुआ इन्हीं सब में  जन्मे मिलने की संभावना ज्यादा रहती है . 




अतः हमें हितकारी बनना चाहिए , लोगों को सताना कष्ट देना उन्हें छोटा साबित करने के बजाय उनके जीवन में खुशियां भरने का प्रयास करिए, लेकिन यह भी नहीं होना चाहिए कि लोगों को खुश करने , उनकी जिंदगी बनाने और सुधारने के चक्कर में अपने परिवार की जिंदगी को भी मुश्किल में डाल दिया जाए . क्योंकि आपके परिवार की जिम्मेवारी भी आपके ऊपर ही है. आपको उनको भी देखना है और संभालना है. लेकिन आप उनको तभी देख पाएंगे या संभाल पाएंगे जब आप खुद ठीक रहेंगे. 




तो कहने का मतलब यही हुआ कि आप को दान- दया, और लोगों की सहायता अपनी स्थिति को देखते हुए ही करना चाहिए. अपने आप को मुश्किलों परेशानी में डाल कर किया गया दान ,दया और सहायता पूर्णकारी सिद्ध नहीं होता है , क्योंकि जब आप का पतन हो जाएगा तो फिर आपके परिवार का क्या होगा, उनकी  सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा उनकी देखभाल कौन करेगा, परिवार की बात छोड़िए जब आप खुद ही सही स्थिति में नहीं रहेंगे तो ऐसे व्यक्ति को सही स्थिति में कैसे ला सकते हैं जो मुश्किल में हो. अतः अपने आप को मजबूत रखती हुए ही लोगों की सहायता करनी चाहिए. ताकि आप लंबे समय तक हितकारी बने रहे और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जीत कर सकें. 



लोगों का हित करने के बाद आपको उनसे कुछ भी अपेक्षा नहीं करनी चाहिए, जैसे मुश्किल के दिनों में आपने किसी की सहायता की हो और बदले में आप सोच रहे हो कि वह आपका खूब गुणगान करें और खूब सम्मान करें तो यह सब आपको नहीं सोचना चाहिए , क्योंकि इससे ज्यादातर आपको निराशा ही मिलता है. सामने वाला अगर थोड़ा विचारशील और अच्छा इंसान हुआ तो आपको इज्जत और मान सम्मान देगा, लेकिन थोड़ा सा भी अगर ज्ञानी हुआ तो वह ऐसा कुछ नहीं करेगा, और वही अगर आप उससे मान सम्मान और इज्जत की आशा लगाए हुए हैं तो आपको उससे दुख ही मिल जाएगा. इसीलिए कहा जाता है कि लोगों का हित करने के बाद उनसे किसी भी तरह का कोई भी अपेक्षा नहीं करना चाहिए. मिल जाता है उनसे कुछ तो ठीक है और नहीं मिलता है तो भी ठीक है ऐसा सोचते हुए आपको अपने मार्ग पर आगे बढ़ जाना चाहिए और आगे की ही सुधि लेना चाहिए. 





जब व्यक्ति धनवान होता है और उसमें जब अहम आता है तो उसका व्यवहार बिगड़ने लगता है, उसके अंतर भाव में सभी चीजें नहीं चलती है और लोगों से वह खराब व्यवहार करने लगता है. अब जिसके अंदर जो रहता है वही फेकता है जैसे आपके अंदर केवल क्रोध का भाव भरा है तो आप केवल क्रोध ही फैकैगे . उसी तरह अगर आपके अंदर कोमल भाव भरा है तो आप के मुख से केवल सुंदर विचार ही निकलेंगे और शांति के साथ निकलेंगे. उसी प्रकार एक सज्जन व्यक्ति के मुख से अच्छे विचार ही बाहर आते हैं क्योंकि उसके अंदर अच्छा ही भरा हुआ है. तो जिसके अंदर जैसा भरा रहता है उसके अंदर से वही चीज बाहर निकलता है. 




जब व्यक्ति धनवान होता है तो उसे शक्ति का भाव महसूस होता है, वह अपने अगल-बगल जब 100 -200 गरीब लोगों को देखता है, तो उसका अहंकार और भी बढ़ता है. और वह उन पर अत्याचार भी करता है कभी-कभी सीधे-सीधे तो  कभी घुमा फिरा कर , धनवान होने का मतलब यह कभी नहीं होता है कि आप अत्याचारी और अन्यायी  बन जाए . उसी तरह बलवान और शक्तिमान होने का भी यह मतलब नहीं होता है, कि आप लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर दें, जिम का जमाना आजकल चला हुआ है लोग जिम जाते हैं और अपना शरीर बनाते हैं और रिजल्ट के रूप में लोगों पर इसका असर दिखाने की कोशिश करते रहते हैं. वे यह बताना चाहते हैं कि वे उससे ज्यादा शक्तिशाली है . 




अब यह जरूरी नहीं है कि जिसके पास धन है वह अंकारी ही हो, धनवान व्यक्ति भी धर्मात्मा होते हैं लेकिन इसका बस परसेंटेज लो रहता है, कमियां हर इंसान में होती है हर इंसान में कुछ ना कुछ कमियां खराबया है . लेकिन कमियां खराब है इतनी भी ज्यादा नहीं होनी चाहिए कि आपकी खूबया ही उसमें झुक जाए और जोक कर चुप जाए . इसीलिए कोशिश यही करनी चाहिए कि हमें अच्छे से अच्छे इंसान  बने , अच्छा इंसान तभी बन सकते हैं, जब आपको अच्छा या खराब क्या है इसका ज्ञान हो , और अच्छा या खराब होने का ज्ञान आत्मनिरीक्षण से ही आता है , अतः  धर्म ग्रंथ ( जैसे- गीता) पढ़ते रहे , और आज निरीक्षण करते रहे, इससे आपका ज्ञान बढ़ेगा, और जब ज्ञान बढ़ेगा तो आप धर्म के रास्ते पर चलेंगे ही , और जब धर्म के रास्ते पर चलेंगे तो आप अच्छे कर्म करेंगे ही , और जब आप अच्छे कर्म करेंगे तो इससे आपका भी कल्याण होगा और आप के अगल-बगल भी कल्याण होगा, 




सब को दान नहीं देना चाहिए- कुछ लोग अपने आप को बड़ा दानी समझते हैं, और सब को दान दे देते हैं, कुछ लोग तो केवल प्रसिद्धि पाने के लिए दान करते हैं जबकि उनके अंदर का भाव यह नहीं रहता है दान देने का , अर्थात भलाई के भाव से वह दान नहीं देते हैं , बल्कि प्रसिद्धि और यश पाने के चक्कर में दान देते हैं , ऐसा दान देने वाला व्यक्ति को बहुत ही ज्यादा फायदा नहीं होता है , कुछ लोग अज्ञानवस  दान देते हैं , अर्थात जो मांग रहा है उसे ही दे देते, यह नहीं जानते हैं कि दान मांगने वाला दुराचारी व्यक्ति है या सज्जन व्यक्ति है उसका यह परीक्षण नहीं कर पाते और दान दे देते हैं, उन्होंने शायद यह सीख लिया होता है कि बस उन्हें दान दे देना चाहिए और वे दे भी देते हैं . 




एक व्यक्ति एक गाय को खींचते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान ले जा रहा था, और रास्ते में उस गाय को को मारपीट भी रहा था, क्योंकि गाय आगे ठीक से नहीं बढ़ रही थी जिससे उस व्यक्ति को चिड़चिड़ापन महसूस हो जा रहा था, इसलिए वह रास्ते में  उस गाय की पिटाई करता जा रहा था , क्योंकि गर्मी का मौसम था इसलिए कुछ दूर जाने पर वह व्यक्ति थक गया, और एक पेड़ के नीचे बैठ गया तथा गाय को बगल में किसी जगह बांध दिया, थोड़ी देर आराम करने के बाद उसने देखा कि बगल में एक साधुओं की आश्रम है वह उस आश्रम में गया और खाने के लिए थोड़ा सा भोजन मांगा तथा पीने का जल भी मांगा, चुकी आश्रम में ज्यादातर  साधु ही रहते हैं, और साधु सज्जन होते हैं तथा धान भाव को अच्छी तरह समझते हैं , इसलिए उस आश्रम में से एक साधु निकले और उन्होंने उस इंसान को खाने के लिए भोजन तथा पीने के लिए पानी दे दी, अब वह व्यक्ति खाना और पानी लेकर उस पेड़ के नीचे चला गया जहां उसने गाय बांधी थी और वही बैठकर खाने लगा, और खा पीकर थोड़ी देर बाद वह वही सो गया , थोड़ी देर बाद जब वह सो कर उठा तो उसे स्फूर्ति का आनंद हुआ और उसकी थकावट दूर हो गई थी, शरीर में एक शक्ति का भाव संचार हो रहा था, फिर उसे याद आया कि अरे गाय को आगे ले जाना है, और फिर वह गाय को आगे मारता पीटता ले गया .दरअसल जिस स्थान पर गाय को ले जाना था वह कसाई खाना ही था , और ले जाने वाला वह इंसान कसाई ही था. वह इंसान आखिर में गाय को अपने कसाई खाना ले जाता है और उसे काट डालता है. 




आप लोग सोच रहे होंगे तो इस कहानी से दान का क्या मतलब है ? 



दरअसल जब वह कसाई इंसान थक गया था तब उसे उर्जा की जरूरत थी , अपनी ऊर्जा को प्राप्त करने और थकावट दूर करने के लिए उसने आश्रम से एक साधु से भोजन लिया  , तो साधु ने जो भोजन दिया वह एक दान की तरह था और इस दान रूपी भोजन को प्राप्त करने के बाद जिस इंसान को शक्ति मिली उसने उस शक्ति का गलत फायदा उठाया और गाय को मारते पीटते हुए कसाई खाने ले गया तथा उसे मृत्यु के घाट उतार दिया , इस तरह से देखा जाए तो उस साधु ने अप्रत्यक्ष रूप से उस कसाई के गलत कार्यों में अपना योगदान दिया, अतः यह दान ,दान ना होकर एक बुरे काम का भागीदारी हो गया, अर्थात वह साधु एक पाप का भागीदारी हो गया . क्योंकि उस साधु द्वारा दिया गया दान सही कार्यों में नहीं लगा . और उसका परिणाम बुरा ही हुआ. और बुरे कार्यों में साथ देने वाला व्यक्ति भी पाप का भागीदारी होता है. 

अतः इसीलिए कहा गया है कि सब को दान नहीं देना चाहिए जो दान देने की योग्य हो उसी को दान देना चाहिए, अतः जब भी किसी को दान दें तो पूरी तरह से परीक्षण कर ले कि जिस व्यक्ति को वह दान दे रहे हैं वह वाकई मैं उस दान की लायक है या नहीं . अब ऐसा नहीं है कि आत्मनिरीक्षण करने में आपको बहुत ज्यादा समय लगेगा आपको देखते ही समझ में आ जाएगा कि वह अच्छा है या नहीं. 



आप अपनी बुद्धि विवेक से सही रास्ते पर चलने की कोशिश करें अगर भगवान ने बुद्धि दिया है तो उसका सही और उचित प्रयोग करें, इससे आपका खुद का भी भला होगा और दूसरे अन्य लोगों का भी भला होगा. 




तुम मित्रों इस आर्टिकल में हमने बताया कि आपको किसी प्रकार का घमंड नहीं करना चाहिए , और खास करके बुद्धि ,ज्ञान, धन इत्यादि का घमंड तो बिल्कुल ही नहीं करना चाहिए , क्योंकि इन सब चीजों का अंत नहीं है यह अनंत हो सकता है, और यह हो सकता है कि आपके पास इस अनंत चीज का बहुत ही कम हिस्सा हो . इसलिए बेवजह का घमंड न करें और किसी तरह से ना खुद का क्षय करें और ना दूसरों का ही क्षय  करें , खुद भी शांति और सरलता का जीवन जीएं और दूसरों को भी शांति का जीवन जीने दे. 

इस आर्टिकल में अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद , इसी तरह की और रोचक ज्ञानभरी कहानियों को पढ़ने के लिए इस साइट पर विजिट करते रहे, तथा अपना ज्ञान बढ़ाते रहें नमस्कार . आपका दिन शुभ हो.


🙏जय श्री राम , 🙏जय श्री सीताराम , 🙏जय श्री राधे कृष्ण , 🙏जय श्री लक्ष्मी नारायण, 🙏जय श्री शिव पार्वती, जय श्री भवानी माई, 🙏जय श्री दुर्गा माई, 🙏जय श्री काली माई, 🙏जय श्री सीता माई, 🙏जय श्री लक्ष्मी माई, 🙏हर हर महादेव 🌹

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