shivratri kb h 2021/mahashivratri 2021 kab hai -11march thrusday

 शिव की महान रात्रि शिवरात्रि का त्योहार भारत के अध्यात्मिक त्योहारों की सूची में सबसे ऊपर और महत्वपूर्ण माना जाता है होली और महाशिवरात्रि का ऐसा त्यौहार है जो मार्च महीने में पड़ता है ऐसा लगभग हर साल ही देखा गया है और इस साल भी होली का जो त्यौहार है वह 29 मार्च को है वही महाशिवरात्रि का जो आध्यात्मिक त्यौहार है वह 11 मार्च को है. 




mahashivratri  2021 kab hai -11march thrusday






महाशिवरात्रि का त्यौहार क्यों मनाया जाता है -



चंद्र मास का 14 वां दिन अथवा अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है. एक कैलेंडर वर्ष में आने वाली सभी शिवरात्रि में से महाशिवरात्रि को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है और यह लगभग हर साल फरवरी-मार्च महीने में चली आती है, 


इस रात ग्रह का उत्तरी गोलार्ध इस प्रकार स्थित होता है कि मनुष्य भीतरी ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाती है यह एक ऐसा दिन है जब प्रकृति मनुष्य को उसके अध्यात्मिक शिखर तक ले जाने में मदद करती है, इस समय का उपयोग करने के लिए इस परंपरा में हम एक उत्सव मनाते हैं जो पूरी रात चलती रहती है. पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओ के प्राकृतिक प्रवाह को उमड़ने का पूरा अवसर मिले आप अपने रीड की हड्डी को सीधा रखते हुए निरंतर जागते रहे. 


महाशिवरात्रि का महत्व - 


महाशिवरात्रि का अत्यंत ही महत्व है जहां तक हमारे भारतवर्ष का सवाल है हमारे भारतवर्ष में इसे बहुत ही श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है लोग इसमें अत्यंत श्रद्धा भाव रखते हैं, भोर होते ही लोग जल चढ़ाने के लिए निकल पड़ते हैं , जल चढ़ाने के लिए भक्त लोग लोटा इस्तेमाल करते हैं , जिसमें पानी - पुष्प इत्यादि मिला होता है, लोग इस पात्र को लेकर अपने घर से दूर कहीं जो मंदिर रहती है उस पर ही जाकर चढ़ाते हैं और अपने भक्त भाव का आनंद प्राप्त करते हैं . केवल पुरुष ही नहीं बल्कि स्त्री ,महिलाएं, बच्चे -बूढ़े सभी लोग इसमें अपना भक्त भाव प्रदर्शित करते हैं . 




लोग केवल भोर में जाना पसंद करते हैं लेकिन जल तभी व चढ़ाते हैं जब हल्का सुबह हो जाए  अर्थात सूर्योदय से पहले और रात्रि के जाने का जो समय होता है जो ट्विलाइट जैसी रोशनी होती है उसी समय वह जल चढ़ाना शुरू करते हैं जो कि दिन भर चलता रहता है , 



ऐसा माना जाता है कि जल को कभी रात्रि के समय नहीं चढ़ाना चाहिए या यूं कहें कि सुबह हुआ होने से पहले ही जब वह रहता है उसी समय दर्शन करने कोई प्रावधान नहीं है, अर्थात सुबह होने का इंतजार करें तभी दर्शन करें यह ज्यादा उचित माना गया है. 


भारतीय त्योहार महाशिवरात्रि का इतिहास-


किसी समय भारतीय संस्कृति में भारत को त्योहारों का देश माना जाता था यहां 365 अगर दूसरे शब्दों में कहा जाए तो हर साल प्रतिदिन कोई न कोई त्यौहार जरूर होता था, यह 365 तैयार हो जो होते थे वह किसी न किसी कारण से जीवन के विभिन्न उद्देश्यों से जुटे रहते थे. हिंदी विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं , विजय श्री तथा जीवन की कुछ अवस्थाओं जैसे बुवाई, रोपाई और कटाई आदि से जोड़ा गया था हर अवस्था और परिस्थिति के लिए हमारे पास त्यौहार था. आपने तो देहातों में देखा होगा कि अधिकतर युवतियां जब कोई फसल काटती है तो वह एक मधुर गाना गाती है , तथा फसल बोने के समय भी मधुर गाना गाया जाता है तो यह सब हमारी सुंदर संस्कृति का असर है यह सब केवल आपको भारतवर्ष में ही देखने को मिलेगा और दूसरे अन्य जगहों पर इसका बहुत ही अभाव है . 



महाशिवरात्रि 2021 का पवित्र समय- महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए अत्यंत ही ज्यादा महत्व रखती है , साथ  उन लोगों के लिए भी अति महत्वपूर्ण है जो सांसारिक जीवन जीते हुए अर्थात परिवारिक परिस्थितियों में मगन रहते हुए इस उत्सव मनाते हैं . उन्हें महाशिवरात्रि का यह त्यौहार भगवान श्री भोलेनाथ की विवाह जैसा लगता है और उसे वह उसी रूप में मनाते भी है सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मगन लोग महाराज शिवरात्रि को शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं परंतु साधकों के लिए यह वह दिन है जिस दिन भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत के साथ एकात्मक हो गए थे वे एक पर्वत की भांति स्थिर और निश्चल हो गए थे, 


योगिक  परंपरा में शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता है उन्हें आदि गुरु की तरह पूजा जाता है पहले गुरु जिनसे ज्ञान उपजा ध्यान की अनेक संस्कृतियों के पश्चात 1 दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए वही दिन महाशिवरात्रि का था उनकी भीतर की सारी गतिविधियां शांत हो गई और वे पूरी तरह से स्थिर हुए इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं . 




महाशिवरात्रि 2021 का आध्यात्मिक महत्व भक्तों पर- 



अगर हम सारी कथाओं को पीछे छोड़ दें तो योगी परंपराओं में इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी माना जाता है क्योंकि अध्यात्मिक साधक के लिए बहुत सी संभावनाएं मौजूद रहती है आधुनिक विज्ञान के अनेक चरणों से होते हुए आ गया है जहां उन्होंने आपको प्रमाण दे दिया है कि आप जिसे भी जीवन के रूप में जानते हैं , मैट्रियल और अस्तित्व के रूप में जानते हैं , जिसे आप यूनिवर्स और तारामंडल के रूप में जानते हैं वह सब केवल एक ऊर्जा है जो स्वयं को लाखों-करोड़ों रूप से प्रदर्शित करती है यह वैज्ञानिक तथ्य प्रत्येक योगी के लिए एक अनुभव से उपजा सत्य है. 




योगी शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसने अस्तित्व की एकात्मता को जान लिया है, जब मैं कहता हूं योग तो मैं किसी विशेष अभ्यास या तंत्र की बात नहीं कर रहा है इस हसीन विस्तार को तथा अस्तित्व में एकात्म भाव को जानने की सारी चाह योग है और महाशिवरात्रि की रात व्यक्ति को इसी तरह का अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होता है. 

क्योंकि जो ज्यादातर ज्ञानी होते हैं वह ज्ञान के पीछे भागते हैं , उन्हें अनलिमिटेड नॉलेज चाहिए उन्हें अनंत का ज्ञान चाहिए और इस तरह का ज्ञान तभी मिल सकता है जब वह हर चीज को समझने का प्रयास करें, चाय व ग्रह - नक्षत्र का ज्ञान हो तारामंडल का ज्ञान हो ,अंतरिक्ष का ज्ञान हो , अस्तित्व का ज्ञान हो या किसी भी प्रकार का ज्ञान हो उन्हें सब चाहिए. इतने प्रकार के गानों को प्राप्त करने के बाद वह व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति नहीं रह जाता है ,  महाशिवरात्रि का जो त्यौहार है उस दिन साधक इन्हीं तमाम प्रकार के ज्ञान की जो उड़ जाएं हैं उन्हें महसूस करना चाहता है , 

इसीलिए हर साधक महाशिवरात्रि के इस पवित्र पावन दिन को छोड़ना नहीं चाहता है और उसे अपार श्रद्धा के साथ पूर्ण भक्ति भाव के साथ मनाता है. 


2021 शिवरात्रि महीने का सबसे ज्यादा अंधेरा से भरा दिन होगा- 



शिवरात्रि महा का सबसे अंधकार पूर्ण दिवस होता है प्रत्येक महाशिवरात्रि का उत्सव तथा महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना ऐसा लगता है मानो इस संसार का उत्सव मन रहा हो शिव का शाब्दिक अर्थ ही यही है जो नहीं है. जो है वह अस्तित्व और सृजन है. जो नहीं है वह शिव है .जो नहीं है उसका अर्थ था अगर आप अपनी आंखें खोल कर आसपास देखें और आपके सोच में अगर  माइक्रो दृष्टि है तो आप बहुत सारी रचना देख सकेंगे . 

आधुनिक विज्ञान ने भी यह माना है कि सब कुछ 0 से उपजा है और 0 में ही विलीन हो जाता है इस संदर्भ में शिव यानी विशालकाय riktata या shunyata महादेव को ही जाना जाता है. 

हमारी भारतीय संस्कृति में यह माना गया है कि महाशिवरात्रि का त्यौहार जिस दिन पड़ता है वह दिन अत्यंत ही अंधकार वाला दिन होता है, और इस बात की पुष्टि वैज्ञानिक भी कर चुके हैं. 


महाशिवरात्रि 2021 श्री भोलेनाथ की पूजा का महत्व- 


महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ का विभिन्न पवित्र वस्तुओं से पूजन एवं अभिषेक किया जाता है जैसे- धतूरा, बैर, बिल्वपत्र, अबीर, गुलाल, जौ इत्यादि 

लोग दिनभर उपवास कर कर भगवान शिव की पूजा अर्चना करते तथा शाम के समय में वे फलाहार करते हैं 

. वैसे महाशिवरात्रि ही नहीं कोई भी पर्व आप व्रत रहे खास करके व्रत वाले जो त्योहार होते हैं , उनमें शाम के समय आप अन्हार के बजाय फलाहार ही लें क्योंकि वह ज्यादा अच्छा माना जाता है और यह उचित भी है. 



महाशिवरात्रि में भगवान शिव को भांग व गाजा से जुड़ा होने का भ्रम - 



आपने अधिकतर देखा होगा कि आजकल चलन पकड़ा है कि भोलेनाथ भगवान जो हैं वह भांग खाते हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं है यह केवल एक मॉडर्न भ्रम है, जो परमात्मा तत्व का इतना ज्ञानी है वह लोगों को ऐसा संदेश क्यों देगा कि लोग गलत आदतों में लिप्त हो, कहीं-कहीं तो आप भगवान भोलेनाथ को गांजा पीते दिखाया जाता है, अधिकतर जगहों पर आपने तस्वीर भी देखी होगी और कुछ लोग तो इससे वीडियो बनाकर भी दिखाते हैं और यूट्यूब पर तो इसका खूब ही ज्यादा वीडियो है , यह सब मात्र केवल भ्रम है जो अज्ञानी होते हैं वह इस चीज को प्रचार करते हैं. भगवान की नजर में वही सत्य है जो लोगों को उनकी परेशानी से उद्धार करें भगवान कभी ऐसा संदेश नहीं देंगे कि लोग उसे पालन कर कर अपना जीवन मुश्किल में बना ले. 


तो आप किसी भी धर्म ग्रंथ में पढ़िए यह सब आपको नहीं लिखा मिलेगा लेकिन धर्म ग्रंथ जो पड़े वह सही होना चाहिए क्योंकि आजकल एडिटेड भी चला है लोग धर्म ग्रंथ से खिलवाड़ कर कर छेड़खानी कर कर उसमें अपनी मनचाही चीजें शामिल करते जा रहे हैं जिससे धर्म ग्रंथ की शुद्धता कम होती जा रही है . 

हो सकता है कि इन बुराई वाली चीजों को लोग अच्छा बना कर पेश करें और आप उसे उसी ढंग से समझें भी लेकिन अगर सर्व कालीनदृष्टि से इसका मूल्यांकन किया जाए तो आप पाएंगे कि ए चीजें वाकई में गलत है भगवान ना कोई गांजा पीते हैं और ना ही वह भांग खाना उन्हें पसंद है . 


तो दोस्तों इस आर्टिकल में हमने महाशिवरात्रि के बारे में पूरा विवरण दिया अगर इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको लगता है कि कुछ और इसमें जुड़ा होना चाहिए तो आप कमेंट कर कर हमें बताएं ताकि आपके विचार अन्य लोगों के पास भी पहुंच सके, इस आर्टिकल में अपना अमूल्य समय देने के लिए सभी बंधुओं का बहुत ही बहुत धन्यवाद, आपका दिन शुभ हो.


🙏जय श्री राम , 🙏जय श्री सीताराम , 🙏जय श्री राधे कृष्ण , 🙏जय श्री लक्ष्मी नारायण, 🙏जय श्री शिव पार्वती, जय श्री भवानी माई, 🙏जय श्री दुर्गा माई, 🙏जय श्री काली माई, 🙏जय श्री सीता माई, 🙏जय श्री लक्ष्मी माई, 🙏हर हर महादेव 🌹

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