Life Love Romance and Disturbance छात्र-छात्राओं की युवा अवस्था की परेशानी

 जब तक जीवन है तब तक परेशानी है हि इसका मतलब यह भी नहीं कह सकते हैं कि जीवन में केवल परेशानी ही परेशानी होता है, जिंदगी में आनंद भी आता है लेकिन आनंद के साथ परेशानी भी रहता है, आप यह सब उसके जीवन पर डिपेंड करता है कि इंसान की जिंदगी में कितना हिस्सा परेशानी और कितना हिस्सा आनंद, वैसे भी जिंदगी में परेशानियां आनंद का होना उसके ऊपर डिपेंड नहीं करता है. 


कोई भी इंसान अच्छा करने के लिए केवल प्रयत्न कर सकता है ,लेकिन वह अच्छा प्रयत्न किया है और बदले उसे अच्छा रिजल्ट भी मिले इसका निर्णय वो खुद नहीं कर पाता है ,इसका निर्णय केवल भाग्य विधाता ही करते हैं. 





वैसे तो परेशानी जिंदगी के हर मोड़ पर आती ही रहती है, लेकिन इस आर्टिकल में हम जिंदगी के उस मोड़ की बात करेंगे जिसको हम छात्र जीवन कहते हैं . अब ऐसा नहीं है कि यह परेशानियां केवल छात्रों को ही रहती है बल्कि यह परेशानियां छात्राओं को भी रहती है, इसलिए जहां कहीं भी छात्रों की ही परेशानी का उल्लेख वहां यह समझ जाइएगा कि यहां पर छात्राओं को भी परेशानी होती है. इसी सोच के साथ इस आर्टिकल को पढ़ते रहिए गा.


छात्र जीवन में परेशानी- 


छात्र जीवन में परेशानी ही परेशानी रहती है कोई माने चाहे ना माने, लेकिन परेशानी रहती है तनाव भी रहता है. घर से लेकर बाहर तक तनाव रहता है, किस चीज की परेशानी रहती है और किस तरह का तनाव रहता है इसी बात की चर्चा हम अपने इस आर्टिकल में करेंगे. 


घर का तनाव- 


कोई माने चाहे ना माने लेकिन इतना तो समझना ही होगा कि हर घर में किसी न किसी तरह की परेशानी होती है चाहे वह परेशानी पैसे को लेकर हो, खाने पीने की चीजों को लेकर हो, आपसी सोच की वजह से परेशानी हो या फिर भी बात शादी को लेकर परेशानी हो, या फिर किसी रोग को लेकर परेशानी हो, घर में कोई शराबी भी हो सकता है जिसकी वजह से परेशानी हो सकती है....... तो इसी तरह की तमाम प्रकार की परेशानियां होती है जब हम अपने घरों में देखते हैं, और जिस से लगभग हर छात्र फेस करता है. अब हर घर में यह सारी परेशानियां हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती है किसी घर में कम होगा तो किसी घर में ज्यादा, लेकिन परेशानियां तो रहेंगे ही. 




घर के बाहर का तनाव - 



किसी भी छात्र को घर के साथ-साथ बाहर का भी तनाव सहना पड़ता है लेकिन अधिकतर यही देखा गया है कि किसी छात्र के जीवन में घर का तनाव ज्यादा होता है जबकि बाहर का तनाव कम होता है, बाहर कितना बस यही पाया गया है कि छात्र अपने स्कूल कालेज को लेकर ज्यादा परेशान रहते हैं, क्योंकि स्कूल कालेज की रिक्वायरमेंट को पूरा करना रहता है, इसी वजह से उन्हें थोड़ा तनाव हो जाता है. 



अबे आइए उन तनाव की बात करते हैं पूरी डिटेल के साथ जिसमें घर का तनाव शामिल है- 



घर में धन का तनाव- 


घर में अधिकतर पाया गया है कि धन का तनाव हो जाता है , ऐसा यह भी नहीं है कि तरह का तनाव आपको प्रत्येक घरों में देखने को मिलता है लेकिन जहां तक भारत की सवाल है तो भारत के अधिकतर घरों में धन का तनाव पाया गया है. इसका कारण यह है कि भारत एक बहुत ही ज्यादा धनी देश नहीं है, आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है जितनी कि यूरोपीय देशों की है इसीलिए यहां पर पैसे का अभाव है. वैसे अगर देखा जाए तो 2021 तक भारत की स्थिति पहले से बहुत अच्छी है. फिर भी उस तरफ से अच्छी नहीं है जैसा कि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी ,ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, उत्तरी कोरिया..... इत्यादि देशों की है. 



यह तो हो गया एक विश्व स्तरीय पर बात, लेकिन इसके अलावा किसी घर में धन ना होने का कुछ घरेलू कारण भी होता है, जैसे घर के सदस्यों का अच्छी तरह से कामना करना, धन कमाने में इंटरेस्ट ना रखना केवल मौज - मस्ती में हि  इंटरेस्ट रखना , समय पर नौकरी नहीं मिलना, केवल सरकारी नौकरी के सहारे ही रहना, ठीक तरह से तकनीकी बिजनेस नहीं कर पाना. ई-कॉमर्स, ब्लॉगिंग, और दूसरे डिजिटल टाइप के बिजनेस को नहीं कर पाना, घर में आपसी कलह  कि स्थिति होना . इत्यादि प्रकार के कारण हो सकते हैं. तो घर में धन का अभाव का होना किसी एक करण पर डिपेंड नहीं करता है इसके बहुत से कारण हो सकते हैं. 



कारण चाहे जो भी हो लेकिन अगर घर में धन का अभाव है तो उस धन के अभाव का असर घर के सदस्यों पर पड़ता है ,और कोई भी छात्र एक घर का ही सदस्य होता है अतः धन के अभाव का असर उस छात्र पर भी बढ़ेगा . और जब छात्र धन का अभाव महसूस करेगा तो उसके जीवन में तनाव आएगा ही, क्योंकि पढ़ाई लिखाई की चीजें, उससे छूटे स्टेशनरी का सामान ट्यूशन, स्कूल ,कॉलेज की फीस इत्यादि का मैनेजमेंट धन के द्वारा ही किया जाता है , और चुके धन का भाव है इसलिए जिंदगी में तनाव होगा ही होगा. 



घर में खाने पीने की चीजों को लेकर तनाव- कई बार तो अधिकतर देखा गया है कि कुछ घरों में लड़ाई झगड़े का कारण जो होता है वह खाने पीने की चीजों को लेकर हो जाता है, कोई कहता है कि मुझे वजह खाने को नहीं मिली या मुझे बहुत ही कम खाने को मिली कोई कहता है की चीजें रखी गई थी तुम सही उत्तर नहीं दे रहे हो, इस तरह के विवाद का कारण भी अधिकतर पाया गया है घरों में, वैसे तो यह बात सुनने में काफी छोटी और मामूली लगती है . लेकिन जब यही बात रंग पकड़ती है तो फिर माथा गर्म हो जाता है, लोग तनाव में आकर एक दूसरे से लड़ने लगते हैं. और अपने ही घर के लोगों का निरादर करने लगते हैं या यूं कह लें कि एक दूसरे का निरादर करना शुरू कर देते हैं. 


अब कोई भी छात्र घर में ही रहता है तो घर में होने वाले इन चीजों का असर उसकी पढ़ाई लिखाई और उसके जीवन पर पड़ने लगता है, समस्या तब बढ़ जाती है जब एक ही चीज की किच किच रोज-रोज होने लगती है. फिर  यह छोटी छोटी बातें किसी भी छात्र के जीवन में परेशानी ला देती है. 



घर में अगर कोई शराबी है तो उससे तनाव- 


घर में अगर कोई व्यक्ति शराबी होता है तो  तमाम तरह के तनाव उत्पन्न होने लगते हैं और उससे होने वाले तनाव से घर के सदस्य परेशान होने लगते हैं. अगर बात उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे क्षेत्रों की करे तू यहां पर इस तरह की चीजें ज्यादा आपको देखने को मिल जाएगी और लगभग हर घर में ही देखने को मिलेगी. एक शराबी आदमी का कोई भरोसा नहीं रहता है कि कब वह क्या कर दे. क्योंकि शराब पीने के बाद उसके मन की स्थिति सही नहीं रहती है वह अच्छा खराब कुछ नहीं समझ  पाता है. और घर में बिना वजह का लड़ाई झगड़ा, अपशब्द भाषा यूज करना तथा सामानों की तोड़फोड़ करना इस तरह की चीजें वह करने लगता है. 

 घर में कोई शराबी है तो वह घर के सदस्य को परेशान करता है, और घर के सदस्यों में से एक सदस्य छात्र भी होता है जो कि इन चीजों से परेशान हो जाता है. अतः छात्र जीवन में घर के तनाव भी बहुत ही ज्यादा सहने पड़ते हैं बस यह तनाव और लोगों को दिखाता नहीं है. 



कोई भी छात्र घर का तनाव सह लेता  है क्योंकि उस समय उसके पास  सहने की उर्जा ज्यादा होती है. अधिकतर छात्र घर में विवाद होने पर भी सुबह वे स्कूल या कॉलेज या ट्यूशन या कोचिंग बहुत ही खुशी भाव से जाते हैं, उनके चेहरे पर घर के तनाव का भाग नहीं दिखता है. ऐसा नहीं है कि उन्हें घर का तनाव असर नहीं करता है, बस वे  इन चीजों को लोगों के सामने किसी भी तरह से दिखाना नहीं चाहते है. 



छात्र-छात्राओं की युवा अवस्था की परेशानी- 



कक्षा 9, कक्षा 10, कक्षा 11 और कक्षा 12 में पढ़ने वाले छात्र और छात्राएं अधिकतर अपनी युवा अवस्था को लेकर परेशान रहते हैं, इस समय शरीर में विशेष प्रकार का बदलाव होता है और इस बदलाव को अधिकतर छात्र और छात्राएं तनाव के रूप में सह रहे होते हैं. इस तरह की कक्षा में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को जीवन के बारे में उतना ज्यादा जानकारी नहीं होती है और ना ही कोई उन्हें बताने वाला होता है कि सही क्या है गलत क्या है ? अपने मन से जो उन्हें समझ में आता है वह करने लगते हैं ज्यादातर चीजें वह गलत जगहों से ही सीख लेते हैं और गलत लोगों से. 



अधिकतर छात्र छात्राएं फिल्मों से ज्यादा सीखते हैं, फिल्मों के स्टाइल को ज्यादा फॉलो करने लगते हैं और इसी वजह से उन्हें परेशानी का सामना भी करना पड़ता है क्योंकि उन्हें इन सब जगह में केवल बिना -वजह की चीजें और फालतू चीजें बताई जाती है. 

ज्यादातर युवा किसी लड़की के चक्कर में फस जाते हैं ,उसी तरह  युवतीआ भी किसी लड़की के चक्कर में फस जाती है और एक दूसरे के शारीरिक  प्रेम को पाने के लिए आतुर रहते हैं, अगर शारीरिक प्रेम होने की संभावना उन्हें नहीं दिखती है, तो इसकी पूर्ति वे  

हस्तमैथुन के रूप में करने लगते हैं, जिससे उनको उस समय तक आनंद आता है जब तक वे  हस्तमैथुन करते हैं बाद में उन्हें केवल चिड़चिड़ापन और परेशानी ही मिलता है, और सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे इस चीज को समझ नहीं पाते हैं क्योंकि वह केवल आनंद के पीछे भागने लगते हैं और इसी आनंद से वह आग की तरह  जलते रहते हैं बस उन्हें पता नहीं चलता है. 


हस्तमैथुन है सबसे बड़ी परेशानी की वजह- 


आपने ऊपर पढ़ा  हो होगा कि छात्र कैसे अपने युवा अवस्था में परेशान रहते हैं, और अधिकतर यही पाया गया है कि अधिकतर छात्र हस्तमैथुन को लेकर परेशान रहते हैं, ऐसा वह इसलिए करते हैं क्योंकि ऐसा करने से होने आनंद मिलता है, और वह यह नहीं जानते हैं कि यहां आनंद उनका कितना बड़ा नास कर रहा है, बस में लगे रहते हैं और जब तक वे जानेंगे तब तक उनका बहुत ही ज्यादा  क्षय  हो चुका होगा. अधिकतर छात्र यह सब ब्लू फिल्म देखकर करते हैं, वैसे  तो साला यही दी जाती है कि यह सब गलत आदतें केवल जीवन को बर्बाद करेंगे और दिमाग को कबाड़ करेंगे तथा शरीर को भी कमजोर करेंगे, इसलिए इस तरह की आदतों को ना पकड़े और अगर पकड़ भी लिए हैं तो छोड़ देना ही बेहतर होगा, 


गौतम बुध का यह विचार सर्वदा याद रखें " कामवासना अग्नि की तरह है" जैसे अग्नि शरीर को जला देती है वैसे ही कामवासना इंसान को अंदर से जला देती है.



एंड्राइड मोबाइल की गलत -


 आजकल एंड्राइड मोबाइल की गलत लत पकड़ चुकी है लोगों को, बच्चे -बूढ़े ,जवान ,स्त्री - औरतें सभी इस गलत लत का शिकार हो चुके हैं और हो रहे हैं भी. व्हाट्सएप और फेसबुक ने लोगों को जैसे जकड़ रखा है, इसका यूज केवल अगर लोग सीमा तक करते तो ठीक था लेकिन दिन और रात इसी में लगे रहते हैं, इससे वे अपना समय और एनर्जी तो नुकसान करते ही हैं, साथ ही अपना बुद्धि विवेक भी खो देते हैं. क्योंकि मोबाइल से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव दिमाग को डिफ्यूज करती है. अतः सलाह यही दी जाती है कि एंड्राइड मोबाइल का कम से कम प्रयोग करें और अपने जीवन को स्वस्थ और मधुर बनाए रखें.


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