DoctoR Ki Jaankari /डॉक्टर की सबसे बड़ी डिग्री/डॉक्टर क्या है/डॉक्टर के बारे में जानकारी






डॉक्टर कैसे बने-Doctor Kaise Bane ?


 जिंदगी के सामने तमाम तरह के  ऑप्शन मौजूद रहते हैं अब हम कौन सा ऑप्शन चुनकर किस रास्ते में जाना चाहते हैं यह हमारे ऊपर डिपेंड करता है, जब हम क्लास नाइंथ  या 

टेंथ में होते हैं . तभी दिमाग में यह बात कहीं ना कहीं आने लगती है, कि आगे क्या करना है ? 

डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है, यह दूसरे किसी अन्य कमर्शियल क्षेत्र में जाना है, इस तरह की तमाम बातें दिमाग में आती रहती है. और कभी-कभी तो  समझ में नहीं आता है कि हम करें तो करें क्या करें इन सभी में से . कौन सा रास्ता चुने जो जिंदगी के लिए फायदेमंद होगा. 



जिंदगी में पढ़ाई का चयन कैसे करें( how to select subjects stream in career )- 



जब दिमाग में तमाम तरह की बातें हैं कि कौन सा रास्ता चुनना है तो पहले खुद में यह देखें कि आपको पसंद क्या है ? उसके अलावा यह भी देखें कि जो चीजें आपको पसंद है उसे करने में आपकी शक्ति क्या है (what is power )?  क्योंकि ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि चीजें जो आपको पसंद हो लेकिन उसको करने की शक्ति ही आप में ना हो तो ऐसी स्थिति में विषय का चयन करने से पहले यह सब समझ लेना बहुत ही जरूरी है, इसलिए जो भी विषय आप चुने तो चुनने से पहले इस बात का ध्यान रखें , उस विषय में आप की पकड़ अच्छी है या नहीं, अगर उस विषय में अच्छी पकड़ नहीं है, तो फिर उसे छोड़ देना ही बेहतर होगा. 



लेकिन ऐसा बहुत कम ही देखा गया है कि किसी सब्जेक्ट में आपका इंटरेस्ट हो और उसमें नालेज ना हो . ऐसी स्थिति बहुत ही कम या यूं कहा जाए कि कभी- कबार देखने को मिलती है . 



3इडियट फिल्म की कहानी- 




आपने 3इडियट फिल्म देखा होगा, इस फिल्म में एक्टर यही कहता है कि आपको वही विषय चुनना चाहिए जिसमें आपका इंटरेस्ट हो, जिसमें आप पैशनेट हो यही दो बातें वह कहता है, इसे कुछ हद तक सही माना जा सकता है लेकिन पूर्णता सत्य मानना मूर्खता होगी , क्योंकि किसी फील्ड में इंटरेस्ट होने से ही आपको उस फील्ड की नॉलेज नहीं हो जाएगी बल्कि इसके साथ-साथ आपको किसी भी फील्ड में इंटरेस्ट से केवल आपको उस फील्ड में नालेज नहीं हो जाती है, बल्कि इंटरेस्ट के साथ-साथ उसमें काम भी करना होता है, और काम अब तक ही कर पाएंगे जब  नॉलेज को अच्छी तरह से आप सीख पाएंगे . आदेश नहीं सीख पा रहे हैं ना उतना मेहनत नहीं कर रहे हैं तो फिर आप उस फंड में पैसेनेट नहीं है , इस तरह से देखा जाए तो इंटरेस्ट अलग चीज होता है और पैशनेट होना अलग चीज होता है . 


थ्री ईडियट फिल्म (3idiot movie)  देखकर अधिकतर लोगों ने अपने इंटरेस्ट के बेसिस पर ही सब्जेक्ट को चुना लेकिन यह भी देखा गया कि वे  उस सब्जेक्ट (subject) में पारंगत ना हो सके . इसलिए इंटरेस्ट होना ही कि कोई जरूरी नहीं है उस सब्जेक्ट को लेते समय उसे भविष्य में आप कितना आगे ले जा सकते हैं यह भी ध्यान देना बहुत ही जरूरी है . 



किसी कठिन विषय को लेने के बजाय सरल विषय कितने लोग सब्जेक्ट का चयन इस वजह से करते हैं कि लोग इस सब्जेक्ट को लेने से उनका खूब वाहवाही करेंगे जबकि उस सब्जेक्ट में उनको ना ही इंटरेस्ट होता है और ना ही उसमें कुछ नॉलेज (knowledge)  होता है और ना ही उन्हें ऐसा महसूस होता है कि वह उस सब्जेक्ट को लेकर बहुत आगे ज्यादा जा सकते हैं फिर भी वह उस सब्जेक्ट को लेते हैं क्योंकि कहीं ना कहीं उनके मन में यह बात बैठ गई है इस सब्जेक्ट को लेने से लोग उनकी खूब वाहवाही करेंगे. 

यह वाहवाही का कंस्ट्रक्ट उन्हें शायद उन्हें अपने घर से आता है या रिश्तेदारों से आता है या अगल बगल से ,यहां अगल बगल का मतलब पास पड़ोस से है . और इसी सब के चक्कर में वे अपना केरियर बर्बाद कर लेते हैं. 



आई थी डॉक्टर बनने बन गए फटीचर- She had become a doctor to become a doctor



अगर आप डॉक्टर बनने की सोच ही लिए हैं तो आपको पता होगा कि इसमें पीसीबी स्ट्रीम होता है तथा डॉक्टर बनने के लिए आपको 12वीं में PCB स्ट्रीम होना चाहिए वैसे तो यह आपको 11वीं  में ही ले लेना चाहिए लेकिन 12वीं के बाद ही आप डॉक्टर का एग्जाम देते हैं जिसको की  नीट की परीक्षा (neet examination)   बोलते हैं . 

यहां पर आप टाइटल देख रहे होंगे कि लिखा गया है कि आए थे डॉक्टर बनने और बन गए फटीचर, क्योंकि ज्यादातर यही देखा गया है कि कुछ लोग डॉक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं और शुरुआत के दिनों में उस सपने पर खूब काम करते हैं लेकिन थोड़े ही दिनों बाद उनकी  जोश, खत्म हो जाती है . 

और भी गलत चीजों में इंटरेस्ट लेने लगते है जैसे कि मोबाइल चलाना इधर-उधर घूमना तथापि फालतू की चीजों में इंटरेस्ट लेना , इससे क्या होता है कि उनका दिमाग डायवर्ट  (mind divert)  हो जाता है और जब दिमाग उनका डाइवर्ट हो जाता है तो पढ़ाई की दिशा से हट जाते हैं , और फिर डॉक्टर बनने के बजाय एकदम फटीचर बन जाते हैं. 



डॉक्टर बनने में मोबाइल रोड़ा है या फायदेमंद है - Mobile obstruction or beneficial in becoming a doctor -




आजकल मोबाइल कोई भी छात्र जरूर से जरूर चला रहा है . मोबाइल चलाने में आजकल मजा आता है और भारत में व्हाट्सएप तो खूब चल रहा है दिन भर लड़के पढ़ाई करते हैं और रात में वीडियो कॉलिंग करते हैं यही आजकल का पैटर्न  Pattern)   चल रहा है और वीडियो कॉलिंग में दो लड़कियां आपस में नहीं बात कर रहे होते हैं बल्कि  लड़के- लड़की आपस में बात कर रहे होते और यह परसेंटेज बहुत ही ज्यादा है इसका मतलब यह नहीं हुआ कि मोबाइल से दो लड़के बात नहीं करते हैं लेकिन लड़के और लड़कियां ज्यादा बात करते हैं . 



अब इसका यह भी मतलब नहीं है कि उनका बात करना खराब है . लेकिन उनका बात करना पढ़ाई से संबंधित हो तो ठीक है लेकिन वे पढ़ाई से संबंधित बातें ना करके या यूं कहें कि पढ़ाई से संबंधित बातें कम करके रोमांस की बातें ज्यादा करते हैं . उल्टी-सीधी बातें करना, गलत ढंग से वीडियो कॉलिंग करना, हस्तमैथुन करना, यह सब चीजें उनकी जीवनशैली  (Lifestyle)  में  आने लगती है , और इसका सीधा सीधा असर घर पर पड़ जाता है, और कहीं ना कहीं वे लोग भी इस बात को महसूस कर रहे होते हैं, उनके अंदर के मन से या आवाज भी निकलती है की अरे यह ठीक नहीं है ,ऐसा काम करोगे तो डॉक्टर नहीं बन पाओगे लेकिन वे उस अंदर की आवाज को अपने पैरों तले रौंद कर आगे बढ़ जाते हैं , 


शुरू शुरू में यह आवाज है कई बार निकलती है ऐसा नहीं है कि केवल एक ही बात निकलती है लेकिन जब हम कई बार उस अंदर से निकलने वाली आवाज रौद देते हैं तो फिर धीरे-धीरे वह आवाज भी निकलना बंद हो जाती है और फिर हमारा रास्ता साफ हो जाता है बुराई पर चलने का . यह सब चीजें बहुत ही छोटी छोटी होती है और काफी micro होती है इस पर हम जब पूरी तरह से ध्यान देते हैं तभी यह बातें समझ में आती है . 



अधिकतर टॉपर मोबाइल यूज नहीं करते हैं- Most toppers do not use mobile -


अगर आप अधिकतर टावर का इंटरव्यू देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि वह लोग तैयारी के दोनों कभी भी मोबाइल यूज़ नहीं किए, जबकि वे जानते थे कि मोबाइल से भी कुछ फायदा भी ले सकते थे लेकिन कहीं ना कहीं उनको पता था कि मोबाइल से उन्हें हानियां ज्यादा होंगी फायदा कम  , इसी वजह से उन्होंने उस फायदे को भी नजरअंदाज कर दिया , और अपने डॉक्टरी की तैयारी के दौरान कोई भी मोबाइल छुआ नहीं. एंड्राइड मोबाइल चलाने से बजाओ वे लोग सिंपल मोबाइल चलाते थे और बहुत ही जरूरी होने पर ही कॉल करते थे. 



तैयारी के दौरान सबसे बड़ा रोड़ा- The biggest obstacle during preparation -




तैयारी के दौरान सबसे बड़ा जो अरोड़ा किसी छात्र या छात्रा के सामने आता है वह होता है ऑपोजिट सेक्स के प्रति प्रेम, आजकल लड़के और लड़कियां दोनों ही धड़ल्ले से मोबाइल पर पोर्न वीडियो देख रहे हैं, घर में चोरी चोरी देख रहे हैं, हॉस्टल में चोरी चोरी देख रहे हैं, 


अगर उनको  देखने का  कहीं भी मौका नहीं मिलता है तो वह बाथरूम में जाकर चोरी-चोरी उल्टे सीधे वीडियो देखते हैं , उल्टी-सीधी वीडियो को देखकर वे लोग अपने आप को बैलेंस नहीं कर पाते है, तथा हस्तमैथुन करने लगते हैं, इस दौरान उन्हें असीम आनंद प्राप्त होता है, लेकिन यह अधिक होता है, इससे मानसिक ऊर्जा के साथ-साथ शारीरिक ऊर्जा  का भी पतन होता है , 




और कहीं ना कहीं उन्हें भी एहसास होता है लेकिन वे लोग इसे महसूस करना नहीं चाहते हैं वह बस केवल उस क्षणिक आनंद के पीछे पड़ जाते हैं और उसी में ना कहीं वे  अपने कैरियर की जीवन लीला भी समाप्त कर देते हैं . 



हस्तमैथुन से आनंद क्षणिक तो मिलता है लेकिन यह दिमाग को मोटा और चिड़चिड़ा बना देता है जिससे हमें चीजों को समझने में मुश्किल होती है साथ ही साथ या मानसिक थकावट और शारीरिक थकावट भी देता है , जिसके कारण हमें पढ़ाई पढ़ने में बहुत ही दिक्कत का सामना करना पड़ता है , हम उतनी ध्यान और एनर्जी से नहीं पढ़ पाते हैं जितना हमें पढ़ना चाहिए और पढ़ाई के नाम पर बस केवल खानापूर्ति ही करते हैं. 



100 में से 90% छात्रों असफलता का कारण यही है , इस तरह की असफलता के कारणों को कहीं  कायदे  से कहीं भी लिखा नहीं जाता है क्योंकि यह सब चीजें काफी छोटी होती है और लोग इन छोटी चीजों को जनरल में ले लेते हैं मतलब आम चीजों में ले लेते हैं और इसको इतना value नहीं देते हैं लेकिन इसमें  कितना महत्वपूर्ण चीज छुपा है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं जो लोग इसे जानते हैं वही सफल भी होते हैं . 




कुल मिला जलाकर आपको अपनी एनर्जी बचाकर रखनी है और छात्र  जीवन में , शारीरिक प्रेम रखने के बजाय आप अपने लक्ष्य से प्रेम रखें, क्योंकि जिंदगी में आपको वही काम देगा, शारीरिक सुख आप बाद में भी प्राप्त कर सकते हैं, इधर-उधर ताका झांकी का काम करने से अच्छा है कि अभी पढ़ लिया जाए , डॉक्टर बन लिया जाए और बाद में शादीशुदा जीवन व्यतीत करके आराम की जिंदगी जिया जाए . पत्नी जाएगी तो शारीरिक सुख भी मिलेगा और मानसिक सुख भी मिल जाएगा लेकिन उससे पहले डॉक्टर की परीक्षा तो दे दे . 




टीचर का नोट्स अलग बनाएं और अपना खुद का नोट अलग बनाएं- किसी भी परीक्षा के लिए नोट्स बहुत ही जरूरी होता है नोट्स बनाने में केवल मेहनत लगता है लेकिन अगर एक बार नोट्स बन जाता है तो फिर उसका फायदा भी जबरदस्त ढंग से मिलता है लेकिन यह सब बातें हम तभी समझ सकते हैं जब इन सब चीजों पर हम काम करें कभी भी आप टीचर का नोट अपने नोट से मिक्स मत करें. 


टीचर का नोट्स अलग बनाएं और अपना नोट्स अलग बनाएं, क्योंकि टीचर अपने नोट में बहुत सारी चीजें बताता है वह अपने ढंग से पढ़ कर आता है वह चीजों को समझाता है लेकिन जब आप अपने नोट्स बनाएंगे तो उसमें आप उन्हीं चीजों को लिखेंगे जो बहुत ही जरूरी है, और यह चीज अब अपने नजरिए से लिखेंगे, जवाब चीजों को अपने नजरिए से लिखेंगे तो उसे समझना और रिवीजन करना दोनों ही बहुत सरल हो जाता है खासकर के परीक्षा के दिनों में. 


फिर यहां पर कहा जा रहा है कि नोट्स बनाने में थोड़ा सा मेहनत लगता है यह थोड़ा सा उबाऊ  भी है लेकिन मजा तब आता है जब आप नोट से ही पढ़ते हैं , जब आप नोट से पढ़ते हैं तो आपको इतना ज्यादा आनंद आएगा कि आप बता नहीं सकते हैं, जब आप कोई टेक्स्ट वह पढ़ते हैं या किसी टीचर का नोट पढ़ते हैं तो वह टीचर उस नोट बुक का राइटर होता है वही जब आप टेक्स्ट बुक पढ़ते हैं तो टैक्स बुक का राइटर कोई और होता है लेकिन जब आप अपनी नोटबुक से पढ़ते हैं तो उस नो नोट बुक के राइटर आप रखते हैं . एक राइटर को अपना लिखा हुआ चीज जरूर समझ में आता है. 

तो यह सब चीजें समझने का है इतनी समझ के साथ अगर आप आगे बढ़ेंगे तो निश्चित तौर पर सफलता प्राप्त करेंगे ही करेंगे. 



लोग जहां पर गलतियां करते हैं वहीं पर आपको सही करना है - लॉग इन प्रकार की गलतियों को करते हैं और वही चीज आपको नहीं करना है यहां पर कुछ चीजों को बताया जा रहा है इसे ध्यान पूर्वक समझिएगा 


1. हस्तमैथुन को नहीं करना (प्यार के चक्कर में नहीं फसना)

2. टेक्स्ट बुक पर ही डिपेंडेंट नहीं रहना 

3. अपना नोट्स जरूर बनाएं 

4. ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करें 


अगर उपयुक्त चार बातों को अब सही ढंग से अनुसरण करेंगे तो इन्हीं चार बातों से ही आप डॉक्टर की परीक्षा को पास कर लेंगे जिससे को की नीट का एग्जामिनेशन कहते हैं . 


आपको 90% अपना ध्यान पहली बात पर लगाना है जिसमें लिखा गया है कि हस्तमैथुन नहीं करना है . 

इसको एकदम अच्छी तरह से करना है बाकी के तीन पर अगर आप हल्के से भी काम करेंगे तो भी काम चल जाएगा लेकिन पहला वाला सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है. 




किसी भी इंसान की तरक्की में औरतों का या लड़की का बहुत ही बड़ा हाथ होता है- अगर आप इस टाइटल को पढ़ रहे होंगे तो आपने अधिकतर देखा हो गया कि फिल्म में इसी तरह के डायलॉग ढेर मारे जाते हैं, और इसी तरह के डायलॉग आपको ढेर सारे छात्र तथा टीचर भी बोलते हुए मिलेंगे , नतीजा यह होता है कि एक माहौल बन जाता है जिससे आप अछूते नहीं रह जाते हैं, और कहीं ना कहीं आपको लगने लगता है कि हां यार यह सही बात है , किसी इंसान के विकास में औरत या लड़की का साथ  होना बहुत ही जरूरी है , और इसी डायलॉग को अपनाते हुए वह गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड बनाने पर लग जाते हैं, जोकि अंत में शारीरिक संबंध या हस्तमैथुन या दोनों पर जाकर रुकता है. 

तो इस तरह की फिल्मी डायलॉग या इस तरह के माहौल से आपको अपने आप को दूर रखना है . 



ब्रह्मचर्य का महत्व - Importance of Brahmacharya -



आजकल लोग मॉडर्न जमाना मानते हैं . उन्हें अगर चीजों को बताया जाए तो इसे पुराना कहकर  या  समझ कर फेंक देते हैं लेकिन आप खुद से सोच कर देखिए क्या हर पुरानी चीज खराब होती है , मॉडर्न होने का मतलब मूर्ख भी नहीं होता है, अगर हर पुरानी चीज खराब होती है तो आप देखिए कि आपके माता पिता धीरे धीरे बूढ़े होते जाएंगे .



एक तरह से देखा जाए तो वे लोग भी पुराने होते जाएंगे तो क्या वे   खराब हो जाते अगर कुछ लोग कहते हैं कि हां वह खराब हो जाते हैं तो यकीन मानिए उनकी सोच बहुत ही घटिया और गिरी हुई है इस तरह के लोग अगर अपनी जिंदगी में डॉक्टर बन भी जाए तो भी उनके बंदनी या ना बनने से कोई बहुत ज्यादा फायदा नहीं होने वाला है  क्योंकि इससे हो सकता है कि उनका फायदा हो जाए लेकिन उनके घर परिवार या अगल - बगल उनसे कोई भी फायदा मिलने वाला नहीं है. और अगर धर्म पुराण की पुरानी बातों को मानें तो केवल स्वार्थ के लिए जो जीता है उसका आगे पतन जरूर होता है , और होना भी चाहिए. 



पुराने जमाने में लोग, शिक्षा के दौरान ब्रम्हचर्य का बहुत ही महत्व देते थे क्योंकि वे लोग जानते थे कि ब्रह्मचर्य से जीवन को आगे बढ़ाया जा सकता है जो एक शक्ति की तरह है जिसको क्षय  नहीं करना है खासकर के छात्र जीवन के समय . ब्रह्म अक्षर का मतलब ही होता है कि आपको अपनी ऊर्जा को नष्ट नहीं करना है, संभोग आदि विषयों में आनंद नहीं लेना है आपको इस से परहेज करना है, 



स्त्री इच्छा के प्रति आकर्षण नहीं रखना है क्योंकि आप उस समय ज्ञान प्राप्त कर रहे होते हैं, तो इस तरह की चीजें हमें पुराने समय में सिखाई जाती थी, ज्ञान प्राप्ति के बाद ही कहा गृहस्थ जीवन जी सकते हैं. अगर व्यस्त जीवन का मतलब कुछ लोगों को नहीं समझ में आ रहा है तो बता दे कि इसमें पति पत्नी का ही जीवन होता है. जिसमें जाकर आप शारीरिक सुख पा सकते हैं क्योंकि उसके बाद आपको कुछ ज्यादा करना नहीं रहता है. 




ब्रह्मचर्य पालन एक ताप के समान है अर्थात तपस्या के समान है, जिस प्रकार तपस्या करने से एक योगी को कष्ट होता है लेकिन उसका फायदा उसे जरूर मिलता है उसी तरह ब्रह्मचर्य के पालन करने से आपको थोड़ा सा परेशानी जरूर होता है लेकिन हमको उसका फायदा बहुत ही ज्यादा मिलता है, ब्रह्मचर्य की तपस्या करने से , आपको मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक इन तमाम चीजों की वृद्धि होती है जिससे आपको ज्ञान जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगता है और ज्ञान प्राप्ति की तीव्र इच्छा भी होने लगती है .




आपको कोई कम बताएगा लेकिन अब बहुत ज्यादा सीखेंगे . यहां पर मानसिक , बौद्धिक और आध्यात्मिक सभी चीजों का मतलब बुद्धि बढ़ने से ही है . अतः आप ब्रह्मचर्य पालन अर्थात तपस्या करने की गुणवत्ता को समझें इसको समझने में थोड़ा सा को कठिनाई होगा और जब इसे आप समझ लेंगे तो इसको अब  अपने जीवन में उतारे क्योंकि समझना अलग चीज होता है और जीवन में उतारना अलग चीज होता है . 




कोई चीज  भले ही जल्दी समझ जाए लेकिन उसको जीवनशैली में उतारने में थोड़ा सा प्रयत्न लगता है जीवन शैली में वह चीज तभी उतरती है जब आप उस चीज के लिए प्रत्येक रोज मेहनत करते हैं उसकी आराधना करते हैं, उस बात को निरंतर अपनी सोच में रखते हैं, तभी जाकर वह विचार आपके जीवन शैली में आता है जिससे आपका जीवन धन्य होता है. 




किसी भी विचार को अपने जीवन शैली में उतारने के लिए आपको ठीक उसी तरह प्रयत्न करना है जैसे कि एक लोटे को आप प्रत्येक रोज अंदर से धोते हैं ताकि वह लौटा साफ रहे ठीक उसी तरह इस विचार से आपको अपने आप को धोना है ताकि यह विचार आपके साथ मन में आए और उज्जवलता कि किरण फैलाएं . 


 

चटकदार भोजन से परहेज करें- Avoid spicy food-



कामवासना इंसान को तभी परेशान करती है जब कोई व्यक्ति चटकदार भोजन के प्रति भागता रहता है और निरंतर भागता रहता है क्योंकि यह चटकदार भोजन आपके दिमाग को तो क्षणिक सुख दे देता है लेकिन लंबे समय का सुख नहीं दे पाएगा और ना ही यह ब्रह्मचर्य की तपस्या करने में सहायक सिद्ध होता है यह आपके मन को भटकाता है , चटकदार भोजन करने से इंद्रियां अपने बस में नहीं रहती है .



इंसान को बार बार सेक्स करने का मन करता है, और जब उसे कुछ नहीं मिलता है तो वह हस्तमैथुन ही कर कर अपनी प्यास बुझा लेता है, जब वह ऐसा कर ही देगा तब उसकी तपस्या कहां  रही अर्थात उस व्यक्ति ने ब्रह्मचर्य का पालन नहीं किया, अर्थात उसकी बुद्धि शक्ति का पतन हुआ, और जब बुद्धि शक्ति का पतन हो जाएगा तो ज्ञानी कैसे रहेगा, और जब ज्ञानी ही नहीं रहेगा तो NEET की परीक्षा कैसे पास करेगा ? 


 डॉक्टर का फुल फॉर्म - Doctor's Full Form -


गूगल पर लोग तमाम तरह की चीजें सर्च करते हैं जैसे डॉक्टर का फुल फार्म, अब यह भी चीज कोई पूछने की चीज है, वैसे इस तरह का क्वेश्चन पूछने वाले वही लोग होते हैं जो लोग थोड़ा कम पढ़े लिखे होते हैं फिर भी हम इस बात का उत्तर यहां दे देते हैं की DOCTOR शॉर्ट फॉर्म में Dr. लिखा जाता है यह ठीक उसी तरह है जैसे किसी इंजीनियर को शॉर्ट फॉर्म में Er. लिखा जाता है. तो अगर आप नेट जैसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं जिस तरह की फालतू की बातों का कोई मतलब नहीं है . 


डॉक्टर का पर्चा- Doctor's Form


गूगल पर इस चीज का भी खूब सर्च  किया जाता है कि भाई डॉक्टर का पर्चा क्या होता है? अब इस तरह की बातों का वही लोग प्रश्न करते हैं जो लोग बहुत ही कम पढ़े लिखे होते हैं जैसा कि अभी हमने ऊपर बताया, तो इसका क्या उत्तर दिया जाए आप लोग भी कमेंट करके जरूर बताइएगा, ताकि जो लोग इस तरह का प्रश्न पूछते हैं उनको भी एक उत्तर मिल सके हमारे छात्र बंधुओं से. 


डॉक्टर का स्पेलिंग-  Doctor's spelling


गूगल पर इस चीज का भी सर्च किया जाता है कि डॉक्टर का स्पेलिंग क्या होता है ? तो इस बात का भी उत्तर हमारे छात्र बंधु ही देंगे क्योंकि इतना बड़ा प्रश्न का उत्तर लिखना बहुत ही मुश्किल काम है और मुश्किल काम छात्र बंधु ही करें तो अच्छा है इसलिए आप कमेंट कर कर इसका उत्तर भी जरूर लिखें > 



डॉक्टर का फोटो - Doctor's spelling



कभी-कभी यह यह भी पाया गया है कि कुछ छात्र इच्छा रखते हैं कि भाई डॉक्टर दिखते कैसे हैं ? इसलिए इन सब चीजों को भी सर्च कर लेते हैं तो यह सब चीज अच्छी है क्योंकि जिस चीज के लिए आप काम कर रहे हैं वह चीज दिखती कैसी है ? तो उसे देख लेना चाहिए क्योंकि छात्र जो हैं उन फोटो में अपने आपको  रखकर देखते हैं जिससे उनको एक प्रेरणा मिलती है. जोकि अच्छी बात है देखना ही चाहिए अर्थात फोटो देखना ही चाहिए . 


एमबीबीएस डॉक्टर क्यों  बने -  Why did MBBS become a doctor?



एमबीबीएस   डॉक्टर क्यों बने सबसे पहली बात यही आती है .  अगर आपको लोगों की सेवा करनी है और साथ ही आपको पैसे की भी कमाई करनी है और साथ ही इज्जत भी पाना है तो डॉक्टर बनने का जो सपना है वह सही है क्योंकि यह प्रोफेशन ही ऐसा है कि आपको सर्विस देना पड़ता है, अब ऐसा नहीं है कि सर्विस देने के बाद अब कुछ नहीं मिलेगा अगर आप अच्छी सर्विस देते हैं, तो आपकी पापुलैरिटी बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है, 


अब जो पापुलैरिटी ज्यादा बढ़ेगी तो पेशेंट आएंगे ही, और जब पेशेंट आएंगे तो इनकम होगी  ही, तो इस तरह से देखा जाए तो सेवा के साथ-साथ कमाई भी है, और  अगर आप समाज में घूम रहे हैं   तो आप लोग देख ही रहे होंगे,  की एक डॉक्टर की इज्जत क्या होती है . तो एमबीबीएस डॉक्टर बनकर आप बहुत कुछ पा सकते हैं . अगर  आप एमबीबीएस डॉक्टर बन जाते हैं और आप में स्किल अच्छी है तो आपको वाकई में किसी भी चीज की कमी नहीं रहेगी. इज्जत ,धन- दौलत ,शोहरत सब आपको मिल जाएगा . बस एक बात आपको ध्यान रखनी है कि आप में टैलेंट और स्किल बहुत ही अच्छी होनी चाहिए .




एमबीबीएस डॉक्टर कैसे बने -  How to become an MBBS doctor



 जैसा कि  उबर बताया गया है कि एमबीबीएस डॉक्टर हमें क्यों बनना है  यहां पर हम जानेंगे कि हमें एमबीबीएस डॉक्टर कैसे बनना है, पहले एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए आपको ढेर सारे एक्जाम देने पड़ते थे जैसे कि पीएमटी  (  प्री मेडिकल टेस्ट )  , सीपीएमटी  (  कंबाइंड प्री मेडिकल टेस्ट )   इत्यादि करके ढेरों सारे एग्जाम होते थे, और सभी परीक्षा का उद्देश्य आप को डॉक्टर बनाना ही होता था. 



यहां पर हम केवल एमबीबीएस डॉक्टर की बात कर रहे हैं. लेकिन अब से ऐसा नहीं है अब एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए केवल आपको एक्  परीक्षा  देना पड़ेगा ,  और इस परीक्षा का नाम है    नीट  .   चुकी   डॉक्टर  बनाने के लिए ढेर सारी  परीक्षा  होते थे ,  इससे बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ता था, 



और निजी संस्थान बहुत ही ज्यादा पैसा छात्रों से वसूलते थे ,  तू ही सभी चीजों को कंट्रोल करने के लिए  गवर्नमेंट ने  केवल एक परीक्षा बना दी और वह है नीट , नेट की परीक्षा पास करने के बाद  आपको 6 साल का एमबीबीएस का कोर्स करना होता है  उसके बाद आप फूल फ्रेश डॉक्टर बन जाते  है. उसके बाद चाहे तो अब प्राइवेट  नौकरी   या  सरकारी नौकरी  क्षेत्रों में जाकर अपना कैरियर बना सकते हैं .





NEETexam ki taiyari kaise kare /how to prepare NEET exam in hindi  / NEET




 

एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए योग्यता-  Qualification to become MBBS Doctor-



एमबीबीएस डॉक्टर (mbbs doctor ) बनने के लिए आपको नीट की परीक्षा पास करनी होती है जैसा कि ऊपर बताया गया है,  अब  इस  नीट की प्रवेश परीक्षा देने के लिए एक छात्र की मिनिमम योग्यता भी निर्धारित की गई है ,  नीट  प्रवेश परीक्षा देने के लिए    आपको 12वीं पास होनी चाहिए, केवल 12 वीं पास ही  होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि आपको फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी के साथ बरहनी पास करनी है. और साथ ही साथ आपका 12वीं में 60% मार्क्स होना चाहिए, 60% से कम  नंबर ना हो. अन्यथा आप नीट का परीक्षा नहीं दे पाएंगे .




नीत प्रवेश परीक्षा के लिए उम्र की सीमा- Age limit for the NIT Entrance Examination-



 नीट  प्रवेश परीक्षा देने के लिए छात्रों की उम्र सीमा भी निर्धारित की गई है .  छात्रों की न्यूनतम आयु  17 वर्ष होनी चाहिए  और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए.  17 वर्ष से कम आयु के छात्र  नीट  की परीक्षा नहीं दे पाएंगे ,  वहीं 25 वर्ष से अधिक आयु के छात्र  भी नीट  की परीक्षा नहीं दे पाएंगे .




यानी जनरल कैटेगरी के अगर आप स्टूडेंट हैं तो आप की उम्र सीमा 17 से 25 वर्ष के बीच में होनी चाहिए. वहीं ओबीसी छात्रों के लिए उम्र में छूट 3 साल की है तथा sc-st के लिए उम्र में छूट 5 साल की है .  और भी ढेर सारी छूट है ज्यादा जानकारी के लिए आप  नीट  की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर जानकारी ले सकते  है.




अगर आप यह सीएसटी के स्टूडेंट हैं  तो आप अगर, 12वीं में 50% मार्क भी पाते हैं तो भी आप नेट की परीक्षा देने के लिए योग्य हो जाते हैं.





  नीट का सिलेबस  (Neet Syllabus )    -  




अब आइए  नीट के सिलेबस के बारे में कुछ जानकारी ले लेते हैं, क्योंकि सिलेबस के बारे में जानना बहुत ही जरूरी है, क्योंकि अगर जब तक आप सिलेबस नहीं जानेंगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा कि क्या पढ़ना है   और क्या  छोड़ना  है,  तो नीट के सिलेबस में यह है कि 3 सब्जेक्ट पढ़े जाते हैं


भौतिक विज्ञान  ( फिजिक्स)


 रसायन विज्ञान ( केमिस्ट्री)


 जीव विज्ञान  ( बायोलॉजी)


इन  3 विषयों की पढ़ाई की जाती है ,






 तो आइए फिजिक्स के बारे में जानते हैं   की  भौतिक विज्ञान में  में कौन-कौन सी चीजें पूछे जाती -


 किनेमैटिक्स


 फिजिकल वर्ल्ड  एंड मेजरमेंट


 लॉ ऑफ मोशन


 वर्क, एनर्जी  एंड पावर


 ग्रेविटेशन


 प्रॉपर्टी आफ बल्क मैटर


 थर्मोडायनेमिक्स


 बिहेवियर ऑफ परफेक्ट  गैस एंड काइनेटिक थ्योरी


 दोलन गति और तरंग 


 ऑप्टिक्स


 डुएल नेचर आफ मैटर एंड रेडिएशन


 इलेक्ट्रोस्टेटिक


 करंट इलेक्ट्रिसिटी


 मैग्नेटिक इफेक्ट आफ करंट एंड मैग्नेटिज्म


 इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन एंड अल्टरनेटिंग करंट


 इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स


  परमाणु और नाभिक


 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज





तू फिजिक्स में इतनी सारी चीजें आपको पूछे जाएंगे आपकी  नीट की परीक्षा में ,  अगर आपको फिजिक्स अपना ठीक करना तो आपको मैकेनिक बहुत ही अच्छे ढंग से आनी चाहिए, क्योंकि मैकेनिक्स एक ऐसा सब्जेक्ट है जो कि पूरे ही भौतिक विज्ञान का रीड का हड्डी है, यह अगर आपका ठीक हो गया तू लगभग पूरी  भौतिकविज्ञान पर आप की पकड़ बन जाती है .  इसके अलावा आपको  इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ,  लाइट और थर्मोडायनेमिक्स जैसे सेक्टर में भी अच्छी खासी नॉलेज प्राप्त करनी होगी .


अब आइए केमिस्ट्री   कि सिलेबस के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं , केमिस्ट्री का सिलेबस एक ऐसा सिलेबस होता है जिसके बारे में अगर आप अच्छी जानकारी रखते हैं तभी आप अच्छा माकपा पाएंगे क्योंकि अच्छी जानकारी का मतलब अच्छी तैयारी और अच्छी तैयारी का मतलब है  अच्छा  मार्क्स.





 केमिस्ट्री सिलेबस-   सम बेसिक कंसेप्ट ऑफ केमिस्ट्री


 स्ट्रक्चर आफ एटम


 क्लासिफिकेशन आफ एलिमेंट एंड पीरियोडिक सिटी इन प्रॉपर्टीज


 केमिकल बॉन्डिंग  एंड मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर


 स्टेट्स आफ मैटर :  गैस  एंड लिक्विड


 थर्मोडायनेमिक्स


    साम्यावस्था


 रेडॉक्स रिएक्शन


 हाइड्रोजन


 एस ब्लॉक एलिमेंट


 पी ब्लॉक एलिमेंट


 दैनिक केमिस्ट्री- सोम बेसिक प्रिंसिपल एंड टेक्निक्स


 हाइड्रोकार्बंस


 एनवायरमेंटल केमेस्ट्री


 सॉलि़ड स्टेट


 सलूशन


 इलेक्ट्रोकेमेस्ट्री


 केमिकल काइनेटिक्स


 सरफेस केमिस्ट्री


 जनरल प्रिंसिपल्स एंड प्रोसेस आफ आइसोलेशन   एंड  एलिमेंट


 डी एंड एफ ब्लॉक एलिमेंट


 कोऑर्डिनेशन कंपाउंड


 हेलो एल्केन एंड   हेलो  ARENES


 एल्कोहल, फिनायल   और   ईथर


 एल्डिहाइड, कीटोन, और कार्बोलिक एसिड


 ऑर्गेनिक कंपाउंड कंटेनिंग नाइट्रोजन


 बायोमोलीक्यूलिस


 पॉलीमर


 केमेस्ट्री इन एवरीडे लाइफ


 अब आइए जीव विज्ञान के सिलेबस के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं






 जीव विज्ञान का सिलेबस-  डायवर्सिटी इन लिविंग वर्ल्ड


 स्ट्रक्चरल ऑर्गेनाइजेशन  इन एनिमल्स  एंड प्लांट


 सेल स्ट्रक्चर एंड फंक्शन


 प्लांट फिजियोलॉजी


   मानव  फिजियोलॉजी


 रीप्रोडक्शन


 जेनेटिक  और  इवोल्यूशन


 बायोलॉजी  और  ह्यूमन वेलफेयर


 बायो टेक्नोलॉजी  और इसका प्रयोग


 इकोलॉजी  और इंवॉल्वमेंट





तो यह था सिलेबस के बारे में पूरी जानकारी अब यह बात करते हैं कि अगर  सिलेबस के बारे में हमारी जानकारी पूर्ण हो गई हो   तो उस  पूर्णता के साथ हम तैयारी कैसे करें .






नीट की तैयारी सेल्फ स्टडी     से  करना-   ( neet exam 2021 preperation by self study)



 अगर आप एमबीबीएस की परीक्षा  (mbbs exam) पास करना चाहते हैं और साथ यह भी चाहते हैं कि आप कोचिंग ना करके सेल्फ स्टडी करें तो उसके लिए सही तरीका क्या है what is right way  ?  कैसे पढ़ाई करें कि आप प्रवेश परीक्षा को आराम से निकाल ले,  



सबसे पहली बात यह है कि आपको सिलेबस के बारे में अच्छी जानकारी लेनी होगी,  कौन सा ऐसा टॉपिक है जहां से ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं ,  सबसे पहले आप को यही पता करना  होगा, जब यह आपको पता हो जाता है तो फिर आप  उन सभी  टॉपिक  को  स्टडी करें , और उन सभी टॉपिक में इतनी अच्छी तैयारी कर ले , कि उन सभी टॉपिक से जो भी क्वेश्चन पूछे जाएं  उसका लगभग 90% क्वेश्चन का उत्तर देने की क्षमता रखें ,  90% से कम नहीं होना चाहिए . 



 नोट्स बनाना जरूरी है (Examination notes) is necessary-


कितने छात्र ऐसे सोचते हैं की नोट्स बनाना कोई जरूरी का काम नहीं है, पीटी एक्जाम मे पुरा टेक्स्ट बुक कवर कर लेंगे, लेकिन जब एग्जाम आता है तो वह ऐसा नहीं कर पाते, कहीं न कहीं उनको  नोट  नहीं बनाने की जो कमी है उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है ,  जो की स्वभाविक है. जाहिर सी बात है फ्रेंड्स की एग्जाम टाइम (exam time ) में आपके पास इतना समय नहीं होता है कि आप सिलेबस को कवर कर पाए, सिलेबस कवर करने की बात तो छोड़िए  आप पूरा रिवीजन  revision नहीं भी नहीं कर पाएंगे ,  क्योंकि इतना ज्यादा समय आपके पास  समय नहीं रहता है कि आप पूरा टेक्स्ट बुक को कवर करें या उसे रिवीजन करें,  ऐसी हालत में आपको नोटबुक ही मदद करती है, हर पाठ का  3 या 4 पेज का नोटबुक ( note book)  बना ले,  और उसको अपनी अनुसार लिखें, अपनी भाषा में लिखे, जितना सरल हो सके उसे उतना सरल भाषा में अपनी तरह से लिखें, ताकि जब एग्जाम का समय आए तो उसे आप आसानी से  समझ सके.





ऐसा नहीं कि टीचर द्वारा बनाए गए नोट्स को ही  पढ़ें, उसे भी आप पढ़ सकते हैं, लेकिन अगर आप अपने ढंग से नोट बना लेंगे, तो आप बहुत ही ज्यादा समय की बचत कर लेंगे, क्योंकि जाहिर सी बात है फ्रेंड्स अगर आप अपने ढंग से चीजों को लिखेंगे, तो आपको उसे समझने में बहुत ही सरलता रहती है, यही सरलता समय को कट करती है, और आपका समय को बचत करती है, जो कि किसी भी प्रवेश परीक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है. हो सकता है कि आपको यह बात   निरर्थक  या बेकार  लगे   लेकिन जब आप इसे अप्लाई apply करेंगे तभी आपको इसका बेनिफिट समझ में आएगा .





सप्ताह में 5 दिन जरूर पढ़ाई करें ( 5 days study in a week )


अब आप यह सोच रहे होंगे, कि सप्ताह में 6 दिन पढ़ाई करने का कंसेप्ट क्या है ? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आपका सोचना बिल्कुल सही है, प्रत्येक दिन नियमित उठकर पढ़ाई करें, इन 6 दिन में कोशिश करें सभी सिलेबस को टच करते रहे , ताकि सभी सिलेबस कवर syllabus complete हो सके , अब जाहिर सी बात है कि विषयों को टाइम देंगे तभी वे कबर होंगे . उन विषयों पर ज्यादा ध्यान दें जिसमें आपकी पकड़ कमजोर है, और जिसमें आपको लगता है कि आप इसमें ज्यादा अच्छा कर सकते हैं उसमें अगर थोड़ा सा काम ध्यान देंगे तो भी काम चल जाएगा.




अब सप्ताह में 6 दिन पढ़ाई करने के बाद आपका दिमाग थक जाता है, क्योंकि आपको सिलेबस को पूरा करना भी जरूरी होता है , साथी बोर्ड एग्जामिनेशन board examination देना है इसका टेंशन रहता है, घर के गार्जियन का प्रेशर रहता है ,





ज्यादा मार्क्स (maximum marks) लाना है यह भी बात ध्यान में रखनी है, क्लास में अच्छा प्रदर्शन करना है यह बात भी दिमाग में हमेशा चलती रहती है, तो कुल मिला जुला कर हमारा दिमाग तनाव के बोझ से दबा रहता है, इतना ही नहीं आपको कोचिंग , स्कूल , होमवर्क (homework ) यह सब इतना ज्यादा करना पड़ता है कि दिमाग का थकना स्वभाविक है. 



ऐसी हालत में दिमाग को आराम देना बहुत ही जरूरी है, इसीलिए अगर सप्ताह में एक दिन आप नहीं पड़ेंगे तो आपके दिमाग की थकावट दूर हो जाएगी, और आप चुस्त और तंदुरुस्त हो कर पढ़ाई करेंगे, साथ ही आप विभिन्न प्रकार के तनाव से भी दूर रहेंगे, अब कितने पढ़ाकू जो लड़के होते हैं , वे लोग शाम होते-होते किताब उठा ही लेते हैं , तो यह ठीक नहीं है क्योंकि , सप्ताह का एक दिन मनोरंजन के लिए रखना बहुत ही जरूरी है और पूरी 24 घंटे 24 hrs.उस दिन आप पढ़ाई ना करें . इससे आपके दिमाग के मसल्स भी थकावट से दूर हो जाएंगे.


उस दिन अपना मित्रों से मिले जुले ,खेले कूदे और हो सके तो मूवी भी देख ले अगर आपका मन करे तो .


इस तरह से प्रोसीजर करके आप अपने दिमाग को चुस्त और तंदुरुस्त रखेंगे और साथ ही अच्छी तैयारी भी करेंगे .



रिवीजन प्रक्रिया (Revision process )


जब आप पढ़ाई करते हैं सुबह से लेकर शाम तक, कहने का मतलब यह हुआ कि अगर आप भोर में पढ़ाई करते हैं , फिर सुबह स्कूल जाते हैं , फिर कोचिंग करते हैं और अपनी भी पढ़ाई करते रहते हैं, इससे क्या होता है कि शाम होते होते दिमाग थक जाता है, वह फिर नहीं चीजों को कैप्चर करने के लायक नहीं रह जाता है , क्योंकि नई चीजों के सीखने के लिए एनर्जी की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है और साथ ही आपका दिमाग भी चुस्त और तंदुरुस्त होना चाहिए .





 इसीलिए आपको चाहिए कि शाम को केवल रिवीजन करें , या यूं समझे की अगर आपका दिमाग पढ़ते-पढ़ते जब थक जाए तो उस समय केवल रिवीजन करें, शाम के समय ही ऐसा आपको ज्यादातर लक्षण देखने को मिलेगा, जब भी आपको लगे कि आपके पास एनर्जी ज्यादा है आप अच्छा महसूस कर रहे हैं उस समय आप नई चीजें पढ़ें, 


कोशिश करिए कि जब आप के पास सबसे ज्यादा एनर्जी महसूस हो यानी सुबह के समय तो उस समय से सब्जेक्ट (subject )    को बड़े जिसमें आपका इंटरेस्ट कम , वह इसलिए क्योंकि उस सब्जेक्ट में आपका इंटरेस्ट कम है लेकिन पढ़ना भी तो जरूरी है, क्योंकि अगर उस सब्जेक्ट को नहीं पड़ेंगे तो उसमें नंबर कम आ जाएंगे , इसलिए उससे सुबह ही पढ़ ले . चाहे भले ही उसे आधे घंटे पड़े लेकिन उसे सुबह पढ़ ले. ताकि वह भी कोर्स कवर होता रहे .





रिवीजन  (Daily  revision )- 



अधिकतर यह देखा गया है कि छात्र केवल अपना ध्यान, ज्यादा से ज्यादा केवल नई चीजों को पढ़ने में ही लगाए रखते हैं, इससे क्या होता है कि वे पढ़ी हुई चीजें से अपना ध्यान हटा लेते हैं , और इससे वह चीजें धीरे-धीरे भूलने लगती है , इसलिए ऐसी गलती कभी ना करें, इसलिए चीजों को रिवीजन revision में रखने की आदत डालें, सबसे ज्यादा जो आनंद आता है वह रिवीजन करने में ही आता है , जब आपको रिवीजन करने की आदत पड़ जाएगी उस समय ही आपको इसका मजा समझ में आएगा, एक ही चीज को आप 50 से सौ बार रिवीजन कीजिए , अब इसका मतलब यह नहीं हुआ कि आपने केवल एक पाठ उठा लिया और उसे ही रोज रिवीजन कर रहे हैं .



रिवीजन हर चीज का करते रहे, हर सब्जेक्ट का करते रहे, रोज करते रहे, एक बार अगर आपको इसका लत पड़ गया, तो समझ लीजिए कि यह किसी भी नशे से आपको ज्यादा आनंद देगा इसकी गारंटी ली जाती है , जब आप एक हफ्ता तक इसी तरह रिवीजन करते रहिए, और यह ध्यान भी देते रहिए कि आपको कैसा फील हो रहा है, आपको वाकई में रिवीजन करने में मजा आ रहा है कि नहीं, तो उत्तर यही मिलेगा कि भाई वाकई में बहुत ही मजा आ रहा है, क्योंकि आपको खुद ही लगेगा कि आप कुछ कर ही नहीं रहे हैं और तैयारी आपकी बड़ी शानदार हो रही है . 



आप लोग सोच रहे होंगे कि बार-बार रिवीजन की बात क्यों कही जा रही है, अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि यह बिल्कुल सत्य है, बार-बार रिवीजन की बात इसलिए कही जा रही है, ताकि रिवीजन रूपी जो नशा है आपके दिमाग को अच्छी तरह से लग जाए, फिर इस नशे का वह आनंद मिलेगा जिसे आप शब्दों में बयां नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कुछ इस तरह के आनंद होते हैं जिसे केवल छात्री समझ सकता है, आपके ज्यादा जब नंबर आएंगे और टेस्ट में जब अच्छा करेंगे तब आपको इस नशे का असली मजा समझ में आएगा .



 कोचिंग  Join   -    



ज्यादातर यह भी समस्या  छात्रों के सामने आती है, की वे कोचिंग ज्वाइन करें  अथवा नहीं ज्वाइन करें ,   इस बात को लेकर   वे  उलझन में रहते हैं ,  तू कोचिंग का ज्वाइन करना और ना ज्वाइन करना यह सब छात्र की मानसिक सोच पर डिपेंड करता है, हर छात्र की मानसिक  सोच अलग अलग होती है, कोई छात्र होता है कि वह स्टडी करके परीक्षा देना चाहता है, तो कोई छात्र होता है कि वह कोचिंग करके प्रवेश परीक्षा देना चाहता है, अब छात्र को यदि लगता है कि वह बिना कोचिंग के ही  केवल सेल्फ स्टडी करके ही अच्छी तैयारी कर सकता है और प्रवेश परीक्षा को अच्छे ढंग से दे सकता है, तो उसे कोचिंग करने की कोई जरूरत नहीं ,   लेकिन अगर उसे कहीं लगता है कि नहीं कोचिंग   के बिना उसकी तैयारी अच्छी नहीं हो सकती  तो उसे कोचिंग करना चाहिए . क्योंकि जबरदस्ती   यह  कहा देना   की  उसे  कोचिंग की नहीं जरूरत है यह भी गलत है .  क्योंकि इस तरह की गलती कहीं न कहीं आपको प्रवेश परीक्षा में  असफलता  दिलाएगी . 



इसलिए किसी भी छात्र को जबरदस्ती का निर्णय नहीं लेना चाहिए . निर्णय किसी के बहकावे में आकर या दिखावा करने के आधार पर भी नहीं लेना चाहिए.  क्योंकि ज्यादातर छात्र निर्णय अपने सहपाठी के नकल पर लेते हैं. उनका   सहपाठी जो काम करता है वह भी वही काम करते हैं . और इससे क्या होता है कि कभी रिजल्ट सही मिलता है और कभी गलत मिलता है, 



ज्यादातर तो इस तरह के केस में गलत रिजल्ट ही मिलता है, क्योंकि आपका जो मित्र है वह टारगेट करके निर्णय ले रहा है, और आप जो निर्णय ले रहे हैं आप उसकी नकल करके ले रहे हैं. आपको पता नहीं कि  आपका टारगेट क्या है ,  अगर आपको अपना टारगेट पता भी है ,  और आप नकल करके निर्णय लेंगे तू भी आप अच्छी तरह से सफल नहीं हो पाएंगे .





इसलिए अपना निर्णय लेते समय आप स्वतंत्र रहे,  अब स्वतंत्र रहने का मतलब यह भी नहीं होता है कि आप लोगों  की सलाह लेना ही बंद कर दें,  आप अच्छे लोगों की सलाह लीजिए  फिर अपनी ढंग से अच्छी तरह से समझ लीजिए  उसके बाद निर्णय ले लीजिए. यही असली तरीका होता है डिसीजन लेने का. अगर आप लाइफ में अच्छी तरह से डिसीजन लेना सीख गए  तो आधी समस्या यूं ही खत्म हो जाती है.






 many  किताब फॉलो करने से बचें -    नीट की तैयारी में अधिकतर देखा गया है अधिकतर छात्र,   ब्रिलियंट बनने की कोशिश में  ज्यादा से ज्यादा किताब पढ़ने लगते हैं, इससे क्या होता है कि वह एक ही चीज को बार बार पढ़ते हैं, और इससे क्या होता है कि उनका समय नुकसान होता है, एक ही चीज को बार बार पढ़ना दूसरी किताबों से तभी ठीक रहता है जब उस चीज का कंसेप्ट आपको क्लियर  ना हो ,  क्योंकि अगर आप एक ही चीज को बार-बार   अध्ययन करेंगे  तो इसे मामूली फायदा आपको होगा और वह फायदा रिवीजन के रूप में होगा लेकिन इस मामले फायदे की  वजह से  आपका कुछ समय भी नुकसान होगा ,  अब यह मत समझिए कि रिवीजन करना समय की बर्बादी होती है, ज्यादा किताब फॉलो करना बेवजह का  यह नुकसानदायक है .



 समय प्रबंधन-  (Better Time Management )




पढ़ाई के साथ-साथ टाइम मैनेजमेंट का भी ध्यान रखें, एक निश्चित समय में ही पेपर को खत्म करने की कोशिश करें, क्योंकि देखिए कोई भी पेपर   एक निश्चित समय के लिए होता है, उस निश्चित समय में आपको उस पेपर को खत्म करना रहता है , 




इसलिए अपनी तैयारी आप ऐसी करें ,  की नीत के परीक्षा पेपर को आप उतने समय में हल कर सके, जितने समय में  यह परीक्षा हाल में दी जाती है .  उदाहरण के लिए यदि नीट की परीक्षा 2 घंटे की होती है, तो आप भी अपनी तैयारी कैसे करें कि आप 2 घंटे में पेपर को हल कर लेंगे,  और यह तभी संभव है जब आप  कुछ मॉडल पेपर को हल करेंगे, या प्रीवियस ईयर में पूछे गए  NEET      के  पेपर को हल करेंगे .  तू यह सब तरीके आपको अपनाना बहुत ही जरूरी है अगर आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो .



Once again thanks very much to give your valuable time ,keep ready to read other article and grow your knowledge .


आपका दिन शुभ हो , इसी तरह के अन्य आर्टिकल्स भी पढ़े 





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