Vocational Course 2019 In Hindi / Job / Salary / रोजगार की गारंटी दिलाते प्रोफेशनल कोर्स

रोजगार की गारंटी दिलाते प्रोफेशनल कोर्स

Vocational Course 2019 In Hindi / Job / Salary / रोजगार की गारंटी दिलाते प्रोफेशनल कोर्स


पहले अपना स्नातक फिर m. a , बीएड या एमबीए। इतनी लंबी पढ़ाई करने के बाद ही आमतौर पर छात्र किसी नौकरी में जाते हैं। लेकिन जो छात्र शुरू से ही रोजगार को लक्ष्य बनाकर कोर्स का चुनाव करते हैं उनके लिए बीए वोकेशनल फायदेमंद हो सकता है यह कोर्स वास्तव में ऐसे छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है जो स्नातक करते ही रोजगार पाना चाहते हैं b.a. वोकेशनल की शुरुआत वर्षों पहले की गई थी। दिल्ली विश्वविद्यालय में बकायदा इसको लेकर एक कॉलेज ही खोला गया था जिसका नाम है कॉलेज आफ वोकेशनल स्टडीज इसमें ऑफिस मैनेजमेंट, सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस, स्टोर कीपिंग से लेकर टूर एंड ट्रैवल जैसे कोर्स शुरू किए गए थे। बदलते वक्त के साथ इन कोर्स में बदलाव किया गया और नए नाम भी दिए गए जिनमें ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट , मार्केटिंग मैनेजमेंट एंड रिटेल बिजनेस ,टूरिज्म मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग एंड इंश्योरेंस , ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेक्रेटियल प्रैक्टिस , स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज तथा मैटेरियल मैनेजमेंट प्रमुख है। इस संस्थान की दूसरे कॉलेज ने भी अपने यहां छात्रों के लिए b.a. वोकेशनल कोर्स चलाएं है जिन्हें हाल के वर्षों में खूब पसंद किया गया है। साउथ दिल्ली के रामानुजन कॉलेज में 2 साल पहले भी एजुकेशनल कोर्स के तहत कई अनूठे कोर्स शुरू किए गए जिनमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ,बैंकिंग एंड फाइनेंस आदि शामिल है। ये कोर्स छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखकर इस तरह बनाए गए हैं कि वह चाहे तो 1 साल में डिप्लोमा 2 साल में एडवांस डिप्लोमा और 3 साल में डिग्री लेकर जा सकते हैं वोकेशनल कोर्स की दुनिया उद्योग जगत और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 45 साल पहले वोकेशनल कॉलेज खोला गया था जिसका मकसद छात्रों को स्नातक की पढ़ाई के दौरान रोजगार , कौशल प्रदान करना था इन कोर्स में मानव संसाधन प्रबंधन से लेकर बाजार प्रबंधन , खुदरा व्यवसाय पर्यटन से लेकर बीमा तथा ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस है स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज तथा मैटेरियल मैनेजमेंट शामिल है। 15 साल पहले इन कोर्स में काफी बदलाव लाया गया था क्योंकि बाजार में रोजगार की प्रकृति बदल गई थी। अब टाइपिंग का जमाना नहीं रहा लिहाजा कंप्यूटर कोर्स चलाया गया प्रबंधन क्षमता को विकसित करने के लिए लिहाज से कई कोर्स तैयार किए गए स्टोर मैनेजमेंट को मैटेरियल मैनेजमेंट के रूप में तब्दील कर दिया गया। वोकेशनल की देखा देखि तीन साल पहले कालिंदी और फिर रामानुजन कॉलेज में भी नये वोकेशनल कोर्स तैयार किए गए। रामानुजन में बैंकिंग एंड फाइनेंस तथा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में स्नातक की डिग्री देने का प्रावधान किया गया। इसके साथ ही यह भी इंतजाम किया गया है कि अगर कोई भी छात्र साल भर की पढ़ाई पूरी करके बाहर जाना चाहता है तो उसे डिप्लोमा मिलेगा 2 साल के बाद जाने पर उसे एडवांस्ड डिप्लोमा मिलेगा। तीन साल पर उसे स्नातक की डिग्री मिलेगी। यह कोर्स छात्रों के बीच धीरे - धीरे लोकप्रिय होता जा रहा है कुर्सी से जुड़े छात्र 3 साल का कोर्स पूरा करके जाना पसंद करते हैं। ताकि उन्हें बाजार में ढंग की नौकरी मिल सके। कालिंदी कॉलेज ने भी अपने यहां b.a. वोकेशनल के दो कोर्स शुरू किए हैं जिनमें एक वेब डिजाइनिंग है और दूसरा प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का है। इसी तरह हेल्थकेयर मैनेजमेंट और रिटेल मैनेजमेंट तथा आईटी का कोर्स भी ऑप्शनल स्कीम के तहत किया गया है। इन दोनों ही कोर्स में डिप्लोमा , एडवांस डिप्लोमा और डिग्री तक जाने का प्रावधान है। हालांकि 35 साल पहले शुरू हुए कॉलेज आफ वोकेशनल स्टडीज कॉलेज में छात्रों के बीच में छोड़कर जाने पर किसी तरह का सर्टिफिकेट नहीं मिलता था। इनके समान ही यमुना पार स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज ने मीडिया से जुड़ा कोर्स एडवांस्ड डिप्लोमा इन टीवी प्रोग्राम एंड न्यूज़ प्रोडक्शन तैयार किया है। लक्ष्मीबाई और दयाल सिंह साध्य जैसे कॉलेज में भी वोकेशनल आधारित कुछ पेपर शुरू किए जा चुके हैं जिनका मकसद छात्रों के बीच में रोजगार प्रशिक्षण देना है
दाखिले की शर्तें
इन कोर्स में आमतौर पर दाखिला कट ऑफ के आधार पर मिलता है लेकिन यह कटऑफ ऑनर्स के लोकप्रिय कोर्स के मुकाबले में कम होता है अंग्रेजी , अर्थशास्त्र और बीकॉम ऑनर्स जैसे लोकप्रिय कोर्स में जहा 90 % से ज्यादा अंक लाने वाले को दाखिला मिलता है, वही इन कोर्स में पचासी परसेंट (८५%) से 90% अंक लाने वाले छात्रों को दाखिला मिल जाता है हालांकि विश्वविद्यालय में ऐसे कोर्स में दाखिला का न्यूनतम प्रतिशत 40 ही है जिन्हें 12वीं में इससे कम अंक आए हैं उन्हें दाखिला नहीं दिया जाता। कहने का मतलब है यह है कि कम से कम 40 परसेंट के ऊपर मार्क्स होना चाहिए

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