MBBS Doctor kaise bane / NEET-Physics / NEET- Math


यदि आपको डॉक्टर बनना और आप चाहते हैं कि जल्द से जल्द आप डॉक्टर बन जाए तू या आर्टिकल शुरू से लेकर अंत तक पढ़ते रहिएगा ताकि जानकारी का कोई भी हिस्सा छूट न जाए. क्योंकि एक छोटी सी भूल आपका जिंदगी बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है . इसलिए छोटी-छोटी बातों को आप नजरअंदाज मत करते रहिएगा और कोशिश यही करिएगा की पूरा पोस्ट पर डालें क्योंकि यह आपके भविष्य का सवाल है.



MBBS Doctor kaise bane / NEET-Physics / NEET- Math


डॉक्टर बनने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रवेश

परीक्षाएं आयोजित की जाती है जिनमें से कुछ अत्यंत

प्रमुख इस प्रकार से है -


NEET - national eligibility cum entrance test
AIIMS- all India Institute of Medical Science AIPMT - all India pre medical test NEET- punjab medical entrance test

प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद

मेडिकल कॉलेज में दाखिला कैसे लें

( After passing the entrance exam

How to enroll in medical college ) -
प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद आपको मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना होता है और दाखिला लेने के बाद आप ग्रेजुएशन का पाठ्यक्रम शुरू कर सकते हैं. अर्थात फर्स्ट ईयर के फर्स्ट सेमेस्टर में आप प्रवेश कर जाते हैं लेकिन दाखिल आपको तभी मिलता है , जब आप काउंसलिंग में पार्टिसिपेट करते हैं और उनकी सारी रिक्वायरमेंट को पूरा करते हैं कुछ लोगों को काउंसलिंग के बारे में उतना जानकारी नहीं होता है क्योंकि वह उसे पहली बार फेस कर रहे होते हैं . आपको अच्छे कॉलेज का अच्छा ब्रांच मिले इसके लिए जरूरी है कि आपके पास काउंसलिंग की जानकारी होनी चाहिए अगर आपको इस तरह की जानकारी नहीं है और आप काउंसलिंग में इनकंफर्टेबल महसूस कर रहे हैं तो अपने साथ किसी अच्छे जानकार को ले जाइए जो आपको गाइड कर सकें .
प्रवेश परीक्षा के लिए उम्र की सीमा

(Age limit for entrance examination )-

ज्यादातर डॉक्टर की प्रवेश परीक्षा में जो उम्र सीमा निर्धारित की गई है अब आप 17 वर्ष से 25 वर्ष तक है. यहां पर मैं जनरल गडकरी की बात कर रहा हूं अगर छूट को मिला दिया जाए जैसे कि ओबीसी में छूट और sc/st की कैटेगरी में छूट तो scene कुछ और हो जाती है. वैसे यही देखा गया है अधिकतर की ओबीसी में या sc-st में आपको छूट मिलने से बहुत ही ज्यादा फायदा मिल सकता है बशर्ते आप इन कैटेगरी को बिलॉन्ग करते हो अर्थात इन कटहबरी से संबंधित हो.

डॉक्टर डिग्री प्राप्त करने के लिए

लिखित ब्रांच एस इस प्रकार से है-

(To get a doctor degree

The written branch is as follows-)


नीचे कुछ ब्रांचएस दी जा रही हैं जिनके द्वारा आप डॉक्टर की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं. मतलब आप चाहे तो MBBS डॉक्टर बन सकते हैं या बीएमएस डॉक्टर बन सकते हैं या फिर बीडीएस की डिग्री लेकर एक डेंटल डॉक्टर भी बन सकते हैं वैसे अगर डॉक्टर की डिग्री की बात करें तो जो सबसे दमदार डिग्री माना जाता है वह एमबीपीएस का ही माना जाता है.
Undergraduate medical degrees in India MBBS – Bachelor of Medicine, Bachelor of Surgery BDS – Bachelor of Dental Surgery BAMS – Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery BUMS – Bachelor of Unani Medicine and Surgery BHMS – Bachelor of Homeopathy Medicine and Surgery



बिना NEET की परीक्षा दिए डॉक्टर कैसे बने-

( How to become a doctor

without giving NEET exam )

ऊपर में आपने जितने भी डॉक्टर की ब्रांच देखी वह सभी आप तभी कर सकते हैं जब आप NEET की परीक्षा देते हैं.
लेकिन आप अगर डॉक्टर बनना चाहते हैं और साथ में यह भी चाहते हैं कि आप NEET की परीक्षा नहीं दे तो उसके लिए आप ऐसे कर सकते हैं अर्थात निम्नलिखित जगहों से आप यह कोर्स करके डॉक्टर बन सकते हैं.

Medical courses without NEET
Bachelor of Perfusion Technology or Bachelor of Science in Cardio-Pulmonary Perfusion Technology
Bachelor of Occupational Therapy
Bachelor of Science in Biotechnology

Bachelor of Technology in Biomedical Engineering

Bachelor of Science in Microbiology (Non-Clinical)
Bachelor of Science in Cardiac or Cardiovascular Technology
Bachelor of Respiratory Therapy Bachelor of Science in Nutrition and Dietetics
Bachelor of Science in Genetics

BYNS- Bachelor of Yoga and Naturopathy Sciences

B.V.Sc & AH- Bachelor of Veterinary Sciences and Animal Husbandry



How To Be a MBBS Doctor

एमबीबीएस डॉक्टर कैसे बने



डॉक्टर बनने के लिए सबसे जरूरी चीज है पढ़ाई यदि आप पढ़ने की इच्छा रखते हैं और पढ़ाई में इंटरेस्ट भी रखते हैं तो आपको सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता है. flexible smart hard work तो आपको करना ही पड़ेगा , और केवल हार्ड वर्क ही नहीं बल्कि हार्ड वर्क विद स्मार्टली आपको काम करना पड़ेगा . तभी आपको मनचाहा रिजल्ट मिलेगा.

एक डॉक्टर बनने के लिए जो सबसे पहली समस्या आती है वह है फिजिक्स की. डॉक्टर बनने के लिए जो मिनिमम क्वालीफिकेशन निर्धारित की गई है वह है फिजिक्स , केमिस्ट्री और बायो . कहने का मतलब यह हुआ कि आपका 12th मे यह सभी सब्जेक्ट होना चाहिए . तभी जाकर आप NEET के लिए अप्लाई कर सकते हैं .

ज्यादातर जो लड़के हैं वह केमिस्ट्री और बायो को तो आसानी से हैंडल कर लेते हैं , लेकिन फिजिक्स को हैंडल करना उनके लिए टेढ़ी खीर बन जाते है . क्यों PHYSICS एक ऐसा सब्जेक्ट है जिनमें मैथ शामिल होता है , और MATH बायो स्ट्रीम वालों का अच्छा नहीं होता है .. इसी वजह से ज्यादातर छात्रों की रैंकिंग खराब हो जाती है. क्योंकि वे फिजिक्स में ज्यादा कुछ अच्छा नहीं कर पाते है.



Physics for NEET-

डॉक्टर बनने के लिए फिजिक्स जरूरी है


अगर आपको डॉक्टर बनना है अपना फिजिक्स अच्छा करना ही पड़ेगा. फिजिक्स अच्छा करने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि, आप की दसवीं , ग्यारहवीं और बारहवीं की मैथ पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए . दसवीं का पूरा मैथ आप अच्छी तरह से लगा ले . और 11 वीं 12 वीं के मैथ में आप कुछ आधा जानकारी आप जरूर रख ले, जैसे कि अलजेब्रा का 50% मैथमेटिकल क्वेश्चन जरूर जरूर से सॉल्व कर ले, TRIGNOMETRY की अच्छी पकड़ बना ले. और कैलकुलस को तो पूरा 100 परसेंट हल करें . अर्थात मैथ कैलकुलस कि किताब को पूरा का पूरा लगा डाली . यही नहीं कैलकुलस की जो IIT लेवल की जो मैच है उसे भी सॉल्व कर लो क्योंकि इससे आपको बहुत ज्यादा फायदा मिल जाएगा .

फिजिक्स के क्वेश्चन में मैथ जो होता है वो डायरेक्टली नहीं पूछा जाता है बल्कि फिजिक्स के क्वेश्चन में मैथ ऑटोमेटिक चला आ जाता है , जिसे सॉल्व करना उन छात्रों के लिए कठिन हो जाता है जिनकी मैथ पर पकड़ अच्छी नहीं होती है.


सरकारी जगहों से डॉक्टरी का कोर्स करें-

( Do a doctor's course

from government places )


यदि आप एमबीबीएस डॉक्टर बनना चाहते हैं तो आपको चाहिए कि आप को किसी सरकारी जगह से ही या कोर्स करें क्योंकि अन्य जगहों पर यह कोर्स बहुत ही मारना होता है सरकारी जगहों पर आप 8 से 10 लाख रुपए मैं यह साडे 4 साल (4.5 years) वाला कोर्स आसानी से कर सकते हैं . और आप mbbs डॉक्टर बन जाएंगे . सबसे बड़ा फायदा इसका यह होता है कि आपके ऊपर पैसे का लोड नहीं पड़ता है क्योंकि हमारे भारतीय गार्जियन के पास बहुत ज्यादा पैसा नहीं होता है . क्योंकि हममें से ज्यादातर लोग मिडिल क्लास के लोग ही होते हैं और हम जीने -खाने में ही परेशान रहते हैं और हमारी गार्जियन इतना पैसा नहीं जुटा पाते कि वह छात्रों की भारी-भरकम fees को जमा कर सके. वैसे आपको इन ₹1000000 की चिंता तनिक भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि आपको पता होना चाहिए कि जैसे ही आप डॉक्टर बनते हैं आपको पैसों की बारिश होने लगती है. ऐसा बहुत ही कम देखा गया है कि लड़का MBBS डॉक्टर रहे और वह कुछ ही ना करें. इसलिए बेवजह की चिंता ना करें और आराम से नीट की परीक्षा दे तथा यह कोर्स करें.
गार्जियन जमीन और घर बेच कर

अपने बच्चे को डॉक्टर बनाते हैं

(Guardian by selling land and house Make your child a doctor)-
जैसा कि अभी हमने बताया कि हमारा देश बहुत ही गरीब है जितना डेटा हम लोगों को दिखा दिया जाता है न्यूज़ पेपर के माध्यम से या सोशल मीडिया के माध्यम से कि भारत अमीर हो रहा है ऐसा कुछ है नहीं भारत में अभी भी बहुत ही ज्यादा गरीबी है . ज्यादातर लोग खाने -खाने को तरस रहे हैं यह सब आप जानते ही होंगे . हो सकता है कि यह सब पढ़ने के बाद आप यह सोचे कि अरे यह क्या लिख दिया गया है ? हम तो डॉक्टर बनने चले थे , आप में से ज्यादातर लोग यही सोच रहे होंगे कि अरे यह क्या लिख दिया क्या है ? लेकिन कहीं ना कहीं आप इन चीजों से जूटे ही है , बस आपको उसको देखना है अर्थात कहने का मतलब यह हुआ कि आप भी इन सब चीजों से जुड़े रहते हैं बस आपको केवल ऑब्जरवेशन करना रहता है जोकि शायद ही कोई करता है . जितने भी मेडिकल की तैयारी छात्र कर रहे होते हैं उनमें से 100 में से 95% यही पाया गया है कि उनके गार्जियन जैसे नहीं तैसे ,पैसे की व्यवस्था कर कर अपने बच्चे को डॉक्टर की प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाते हैं और तैयारी कंप्लीट हो जाने के बाद कोर्स करने के लिए जो course fees की लागत आती है उसे जैसे नहीं तैसे पूरा करते हैं . बड़ी उपाय लगाकर पैसे का इंतजाम करते हैं और अपने बच्चों को पढ़ाते हैं, हां इसे किसी अमीर आदमी का बेटा नहीं समझ पाएगा क्योंकि उसकी जिंदगी उन सभी झंझट से नहीं गुजरी होती है जैसे एक गरीब बच्चे की गुजरती है . इसलिए हमने कहा था कि यह सब देखने या समझने के लिए ऑब्जरवेशन आधारित नजरिया होना चाहिए. कभी कभार यह भी देखा गया है कि अभिभावक अपने बच्चे को एमबीबीएस डॉक्टर बनाना चाहते हैं लेकिन पैसे की जब व्यवस्था नहीं हो पाती है तो वह अपना जमीन तक बेच देते हैं. और कभी-कभी तो ऐसा देखा गया है कि लोग अपना घर द्वार भी बेच देते हैं . तो कहने का मतलब यही हुआ कि लोग अपने कीमती चीजों का बलिदान देते हैं. अतः इसीलिए छात्र बंधुओं से अपील की जाती है कि वह अपने अभिभावक का निरादर ना करें खास करके जब वह डॉक्टर बन जाए तब और यह भी अब उसे समझना चाहिए कि कभी वह भी करीब था और उसकी भी स्थिति खराब थी इसलिए गरीब लोगों की अनदेखा भी न करें. वैसे भी धरती पर जिंदगी भर कोई साथ नहीं रहता है एक दिन सब कुछ चल ही जाना है. यह सब सोच समझकर अपने घर के गार्जियन के साथ तथा दूसरे अन्य गरीब लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें.



नीट की तैयारी के लिए कोचिंग कहां से करें

(Where to do coaching for NEET

preparation)-

अधिकतर यही देखा गया है कि छात्र यह पूछते रहते हैं एक दूसरे से कि नीट की तैयारी के लिए कोचिंग कहां से करें कभी यह प्रश्न हुए अपने माता-पिता से पूछते हैं तो कभी अपने मित्र से तो कभी अपने टीचर से, और पूछना भी चाहिए इसमें कोई खराब बात नहीं है ,क्योंकि चीजों का निर्णय पूछताछ करके ही लेना चाहिए और स्वयं का भी उस पर विचार होना चाहिए. वैसे आजकल कोचिंग करना फैशन हो गया है जिस तरह से छात्र के मन में यह बैठा दिया गया है कि आपका नेट का जर्मिनेशन तभी निकलेगा जब से आप कोचिंग करेंगे . अगर आप कोचिंग नहीं करेंगे तो आपका नेट का परीक्षा नहीं निकलेगा यह सब चीजें कहीं ना कहीं छात्र के मन मस्तिष्क में सेट हो गई है या यूं कह सकते हैं कि यह सब चीजें हमारे समाज द्वारा उनके दिमाग में घुमा फिरा कर कहीं ना कहीं से सेट कर दी गई है. कोचिंग करना कोई खराब बात नहीं है लेकिन आपको यह भी पता होना चाहिए कि आपको कोचिंग की जरूरत है या नहीं अगर आपको लगता है कि आपको कोचिंग करना चाहिए तो आपको कर लेना चाहिए अगर आपको लगता है कि नहीं हमें कोचिंग की कोई जरूरत नहीं है तो आपको नहीं करना चाहिए तो यह सब कुछ आपके ऊपर डिपेंड करता है कि आपकी तैयारी कैसी है आपका कहां स्ट्रांग पॉइंट है कहां weak पॉइंट है यह सब समझते हुए आपको कोचिंग में प्रवेश लेने का विचार करना चाहिए. केवल आपका मित्र कह रहा है या कोचिंग में पढ़ें रहा है यह सब का देखा - देखी करके आपको कोचिंग में प्रवेश नहीं लेना चाहिए बल्कि विचार करके और अपना खुद का ऑब्जरवेशन करके निर्णय लेना चाहिए वाकई मैं आपको उस कोचिंग की जरूरत है या नहीं. अधिकतर यह भी देखा गया है कि छात्र बिना कोचिंग का भी तैयारी करते हैं और सफल होते हैं. NEET की प्रवेश परीक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी होती है तो हो सकता है कि इन तीनों सब्जेक्ट में कोई दो सब्जेक्ट आपके बहुत ही अच्छे हो और NEET ENTRANCE EXAM के लेवल पर अच्छे हो तो आपको उन दो सब्जेक्ट में कोई भी कोचिंग की जरूरत नहीं है .हां जो सब्जेक्ट आपका NEET के लेवल पर तैयार नहीं है उसके लिए आप कोचिंग कर सकते हैं . तो आप यह देख ले कि आपका कहां आपका विक पॉइंट है उस WEAK पॉइंट के बेसिस पर आपको कोचिंग करनी है अगर आपको लगता है कि आपके सारे सब्जेक्ट NEET के लेवल पर तैयार नहीं है तो आप पूर्णत: कोचिंग कर लेनी चाहिए. नहीं तो अगर आपको लगता है कि आपके कुछ सब्जेक्ट अच्छे हैं और कुछ ही मैं आपको खराबी है या कमजोरी है तो उन सब्जेक्ट अर्थात किसी पार्टिकुलर सब्जेक्ट के लिए कोई ट्यूटर पकड़ने या कोचिंग ज्वाइन कर ले इससे क्या होगा कि आपका समय भी बचेगा और फालतू के झंझट से भी बचे रहेंगे क्योंकि कोचिंग में बिना मतलब का समय बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं है. आपको दूसरे अन्य सब्जेक्ट की भी तैयारी करनी है, और यह सब आप तभी कर पाएंगे जब आप खुद पड़ेंगे, क्योंकि अंततः पढ़ना आपही को है कोचिंग को नहीं, कोचिंग तो केवल गाइडलाइन देने के लिए होती है. अंतः अपनी पढ़ाई का भी VALUE समझे क्योंकि सेल्फी स्टडी को कहीं ना कहीं बेस्ट स्टडी भी माना गया है इस पर भी आपको विचार करना चाहिए. बहुत कुछ सोच समझकर जब आप चलेंगे तो ही आगे बढ़ पाएंगे. यह नहीं कि किसी का देखकर कुछ भी कर लिया वह भी चीजें अच्छी होती हैं लेकिन उसमें सफल होने के चांसेस बहुत ही कम होते हैं इसलिए अपने आपको निरीक्षण करते रहे कि कहां आपकी कमजोरी है कहां आपकी शक्ति है उसी के आधार पर आप निर्णय लीजिए और उस पर काम कीजिए तब आप सक्सेसफुल बनेंगे.

हस्तमैथुन है डॉक्टर बनने की सबसे बड़ी बाधा

(Masturbation is the biggest

obstacle to becoming a doctor)-

आप लोग समझ रहे होंगे कि अरे यह क्या लिख दिया गया है ? यह तो काफी प्राइवेट बात है इसको तो कोई खुलकर नहीं कहता लेकिन यकीन मानिए जो सबसे बड़ी छात्र के जीवन में बाधा आती है वह हस्तमैथुन की आती है ज्यादातर छात्र इसी हस्तमैथुन में लिप्त रहते हैं वह 2 दिन पढ़ेंगे या 3 दिन पढ़ेंगे और चौथे दिन हस्तमैथुन करते ही करते हैं और सारा ज्ञान बुद्धि विवेक उसी हस्तमैथुन में चला जाता है. और पूरा पढ़ाई का सत्यानाश हो जाता है. उमर और समय हो जाने पर मन में सेक्स का भाव आना नेचुरल है लेकिन उसी पर पूरे जोश के साथ निरंतर काम करना केवल मूर्खता के शिवाय और कुछ नहीं है . छात्रों ने यह भी कहीं ना कहीं पढ़ ली होते हैं या कहीं से सुन ली होती है कि हस्तमैथुन करना कहीं न कहीं शरीर के लिए फायदेमंद है और यह चीज ठीक है इससे शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. और इसी गलतफहमी में वे हस्तमैथुन करते जाते हैं और निरंतर करते जाते हैं. जिससे उनका मानसिक क्षय तो होता ही है साथ में साथ शारीरिक क्षय भी हो जाता है, और धीरे-धीरे वे लोग चिड़चिड़ा हो जाते हैं . हमारे शास्त्र में वीर्य को बहुत ही अच्छा बताया गया है, अगर शास्त्र के रक्त, मास,mazza का सिद्धांत माना जाए तो , रक्त से मांस बनता है मांस से mazza बनती है . और यह शरीर को बनाने में बहुत ही मदद करता है पूरे शरीर का आधार है यह वीर्य ही है.
हमारे शरीर पर जो चमक होती है वह वीर्य के कारण ही होती है या यु समझे कि हमारे मुख - मंडल पर जो चमक होती है वह वीर्य के कारण ही होती है जितना ज्यादा वीर्य रहेगा उतना ही ज्यादा आपका मुंह चमकीला दिखेगा और आपको किसी भी प्रकार की क्रीम पाउडर की भी जरूरत नहीं पड़ेगी आपके बाल काफी चमकीले होंगे आपको बोलने में किसी भी प्रकार की हकलाहट नहीं आएगी आप धाराप्रवाह बोलते चले जाएंगे यह सब वीर्य के कारण ही है. इसीलिए तो स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि उठो ,जागो और वीर्यवान हो जाओ.
वीर्य का नाश करने का मतलब यह हो गया कि जीवन का नाश. जब आप वीर्य का नाश कर रहे होते हैं तभी आपको आनंद आता है उसके बाद आपको दुख ही मिलता है, भला क्षय करके कोई सुख मिलता है, जो भी सुख मिलता है वह मात्र क्षणिक ही होता है अर्थ अर्थ थोड़ी देर का ही सुख मिलता है, अतः हमें वीर्य का नाश नहीं करना चाहिए. बल्कि उसका सम्मान करते हुए ,उसकी आराधना करते हुए, उसको बचा कर रखनी चाहिए, वीर को बचाना एक तपस्या करने के बराबर होता है जैसे तपस्या करने से थोड़ा सा कष्ट तो मिलता है लेकिन इसका फायदा जबरदस्त हमें मिलता है वही हाल यहां पर भी है
मन इन पांच इंद्रियों से मिलकर बना है, जो इस प्रकार से है-
1. देखने की इंद्रियां
2. सुनने की इंद्रियां
3. त्वचा की इंद्रियां
4. स्वाद की इंद्रियां
5. सूंघने की इंद्रियां अर्थात इन पांच इंद्रियों से ही मिलकर मन बना है और मन से ही बुद्धि है अर्थात मन से बुद्धि बनी हुई है अर्थात कहीं ना कहीं हमारी बुद्धि , इंद्रियों से जुटी हुई है इस तरह से अगर समझा जाए तो.हमारी बुद्धि पांच इंद्रियों से बनी है. इसीलिए तो हम जो भी चीज देखते , सुनते , छूते अर्थात स्पर्श करते हैं उसका प्रभाव हमारे मन मस्तिष्क पर जरूर पड़ता है. क्योंकि इन इंद्रियों से ही मन बना है और इस मन से ही बुद्धि है. हमारे शरीर में उपरोक्त यह पांच सबसे बड़ी इंद्रियां होती हैं इसके अलावा भी अन्य छोटी-मोटी इंद्रियों मिलकर मन बना हुआ है उस पर यहां चर्चा नहीं किया जा रहा है. यहां केवल मेन पांच इंद्रियों पर चर्चा किया जा रहा है. और भोग वासना का जो विचार होता है वह इंद्रियों के द्वारा ही आता है जैसे कोई हम मनचाही चीज देखते हैं तो देखने के लिए हम अपने देखने वाली इंद्रियों का प्रयोग करते हैं अर्थात आंख का प्रयोग करते हैं जिससे हमारे मन में विचार उत्पन्न होते हैं और उन विचारों से हमारी बुद्धि डगमग आती है खास करके जब वह विचार कामवासना वाले होते हैं . इसलिए कहा गया है कि हमें खराब चीज नहीं देखनी चाहिए और खराब चीजें नहीं सुननी चाहिए या ऐसी चीजों का स्पर्श नहीं करना चाहिए जो हमें कामवासना की तरफ ले जाए इंद्रियों पर विजय प्राप्त करके ही आप जितेंद्रिय बन सकते हैं. यहां पर जितेंद्र कहने का मतलब यही हुआ कि आपका मन आपके बस में हो अर्थात जिसने इंद्रियों को जीत लिया होता है उसे ही जितेंद्रीय कहा जाता है. जो जितेंद्रिय होता है वह अपने मन का स्वामी होता है उसका मन इधर-उधर नहीं भटकता और जो अपने मन का स्वामी होता है वह अपनी बुद्धि को कंट्रोल में करता है और फिर वह उससे उन सभी बड़े से बड़े काम को कर लेता है जिसे साधारण इंसान सोच भी नहीं पाता है. इंद्रियों को वश में करना कोई आसान काम नहीं है इसके लिए आपको मन की विपरीत चलना होता है. जब आप जितेंद्रीय बन जाते हैं तो आप है तो आप क्षय से बच हैं और जब आप का वीर्य नाश नहीं होता है तो आपकी बुद्धि अत्यंत ही तेज हो जाती है, और जितना ज्यादा आप का वीर्य पुराना होता जाएगा उतना ही ज्यादा आपकी बुद्धि तेज होती जाएगी और यह निरंतर ऊपर की ओर बढ़ती चली जाती है. और दिन पर दिन आपके चेहरे पर चमक बढ़ती जाती है साथ ही साथ आपके चेहरे पर शुद्धता का भाव भी दिखेगा, आपका एक बार का पड़ा- लिखा भी बहुत दिनों तक याद रहेगा आपको कोई चीज बार-बार याद करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. जिस तरह दिए को जलने के लिए तेल की जरूरत पड़ती है तथा गाड़ी को चलाने के लिए ईंधन की जरूरत पड़ती है उसी तरह इस बुद्धि को तेज करने के लिए वीर्य की जरूरत पड़ती है. ऐसा नहीं है कि केवल वीर्य से आपका मुख मंडल ही चमक पाता है इस के ढेर सारे फायदे हैं मुख मंडल की चमक के अलावा आपके बाल भी काले हो जाते हैं और आपके पूरे व्यक्तित्व पर इसका प्रभाव पड़ता है आपके शरीर पर मांस और ज्यादा दिखने लगते हैं . आपका शरीर सुडौल और काफी मजबूत दिखने लगता है हष्ट पुष्ट हो जाता है. तो जितना ज्यादा वीर्य आपके पास होगा आपका व्यक्तित्व उतना ही निखर जाएगा. यह सब बात आपको हो सकता है कि सुनने में पहली बार मामूली लगे लेकिन यकीन मानिए की यह सब आपको तब समझ में आएगा जब आप कम से कम साल 2 साल तक वीर्य को इकट्ठा कर लेंगे . वैसे अगर आप demo के तौर पर इसे देखना चाहते हैं तो मात्र 10 दिन अगर आप वीर्य इकट्ठा कर लेंगे तो भी उसका असर आपको अपने व्यक्तित्व पर दिखेगा . जैसा कि हमने पहले ही बताया था कि वीर्य को रोकने के लिए वीर की आराधना करनी पड़ती है अर्थात तपस्या करना पड़ता है क्योंकि जैसे तपस्या करने से हमें परेशानी तो होती है लेकिन उसका फल हमें बहुत ही अच्छा मिलता है ठीकउसी तरह वीर्य को कंट्रोल करने के लिए हमें क तपस्या करनी पढ़ती है और जब हम वीर्य को कंट्रोल कर लेते हैं तब हमारे तप की सिद्धि हो जाती है और हमें बहुत ही बड़ी तथा अलौकिक सफलता मिलती है . अतः अंत में यही कहा जा रहा है कि छात्र वीर्य की महत्ता को समझे. और इसका संरक्षण करें तथा खूब इसका लाभ उठाएं.


Conclusion -


अगर आप बताए गए उपरोक्त तरीके को फॉलो करेंगे तो आप मैथ में अच्छी खासी पकड़ बनाते हुए अपनी फिजिक्स की समस्या को जरूर जरूर से दूर कर लोगे . और नीट जैसे परीक्षा में एक अच्छा रैंक हासिल करेंगे, और अपना डॉक्टर बनने का सपना पूर्णता पूरा कर लेंगे आसानी के साथ.

आशा करता हूं कि यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा, कैरियर से जुड़ी जानकारी पाने के लिए, हमारी इस ऑफिसियल वेबसाइट पर लगातार विजिट करते हैं , इस पोस्ट को जरूर जरूर से शेयर करें व्हाट्सएप , फेसबुक टि्वटर , इंस्टाग्राम और सभी जगहों पर , ताकि यह इंफॉर्मेशन सबके पास पहुंच जाए l

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