दसवीं के बाद MBBS ki taiyari kaise kare / MBBS ke liye kya kare / NEETexam ki taiyari kaise kare /how to prepare NEET exam in hindi / NEET

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NEETexam ki taiyari kaise kare /how to prepare NEET exam in hindi  / NEET

नमस्कार मित्रों इस पोस्ट में आपका बहुत बहुत स्वागत है इस पोस्ट में हम जानेंगे की हम एमबीबीएस डॉक्टर कैसे बन सकते हैं , इसके लिए कौन सी एक्जाम देनी पड़ती है, कैसी पढ़ाई करनी पड़ती है , कोचिंग का क्या महत्व है , कोचिंग करे कि नहीं करें , सेल्फ स्टडी की मदद से एमबीबीएस की परीक्षा कैसे पास करें , और कितना घंटा पढ़ना पड़ता है इन सभी चीजों का हम डिटेल अध्ययन यहां पर करेंगे ,



करियर से जुड़ी तमाम तरह की जानकारी आपको हमारी इस वेबसाइट पर मिलती रहेगी इसलिए अगर कैरियर के बारे में पूरी तरह अच्छी जानकारी लेनी है तो हमारी साइट पर जरूर विजिट करते रहे क्योंकि यह साइट हमारे प्यारे मित्रों के लिए बनाई गई है वह भी शुद्ध हिंदी भाषा में ताकि कोई भी छात्र करियर से जुड़ी जानकारी आसानी से पा सके बिना कोई दिमागी कसरत किए हुए क्योंकि ज्यादातर जो वेबसाइट है वह इंग्लिश में है इससे इंग्लिश मीडियम के छात्र तो वेबसाइट में लिखे पोस्ट को अच्छी तरह से समझ जाते हैं लेकिन हिंदी मीडियम के छात्र उसे समझने में थोड़ा सा दिक्कत महसूस करते हैं इसी वजह से इस साइट को हिंदी मीडियम में बनाया गया है चुकी हमारे देश की मातृभाषा हिंदी है और हिंदी लगभग सभी लोग जानते हैं इसलिए सभी लोगों को यह जानकारी प्राप्त करना काफी सरल काम होगा.


MBBS का फुल फॉर्म क्या है

(What is the full form of )


The full form of MBBS in India is 'Bachelor of Medicine, Bachelor of Surgery'. However, MBBS is an abbreviation of Medicinae Baccalaureus Baccalaureus Chirurgiae, which is the term used for this course in Latin
एमबीबीएस डॉक्टर क्यों बने  (Why did MBBS become a doctor)-

एमबीबीएस डॉक्टर क्यों बने सबसे पहली बात यही आती है . अगर आपको लोगों की सेवा करनी है और साथ ही आपको पैसे की भी कमाई करनी है और साथ ही इज्जत भी पाना है तो डॉक्टर बनने का जो सपना है वह सही है क्योंकि यह प्रोफेशन ही ऐसा है कि आपको सर्विस देना पड़ता है,
अब ऐसा नहीं है कि सर्विस देने के बाद अब कुछ नहीं मिलेगा अगर आप अच्छी सर्विस देते हैं, तो आपकी पापुलैरिटी बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है, अब जो पापुलैरिटी ज्यादा बढ़ेगी तो पेशेंट आएंगे ही, और जब पेशेंट आएंगे तो इनकम होगी ही, तो इस तरह से देखा जाए तो सेवा के साथ-साथ कमाई भी है, और अगर आप समाज में घूम रहे हैं तो आप लोग देख ही रहे होंगे, की एक डॉक्टर की इज्जत क्या होती है . तो एमबीबीएस डॉक्टर बनकर आप बहुत कुछ पा सकते हैं .


अगर आप एमबीबीएस डॉक्टर बन जाते हैं और आप में स्किल अच्छी है तो आपको वाकई में किसी भी चीज की कमी नहीं रहेगी. इज्जत ,धन- दौलत ,शोहरत सब आपको मिल जाएगा . बस एक बात आपको ध्यान रखनी है कि आप में टैलेंट और स्किल बहुत ही अच्छी होनी चाहिए .



एमबीबीएस डॉक्टर कैसे बने (Why did MBBS become a doctor) -

जैसा कि उबर बताया गया है कि एमबीबीएस डॉक्टर हमें क्यों बनना है यहां पर हम जानेंगे कि हमें एमबीबीएस डॉक्टर कैसे बनना है, पहले एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए आपको ढेर सारे एक्जाम देने पड़ते थे जैसे कि पीएमटी ( प्री मेडिकल टेस्ट ) , सीपीएमटी ( कंबाइंड प्री मेडिकल टेस्ट )
इत्यादि करके ढेरों सारे एग्जाम होते थे, और सभी परीक्षा का उद्देश्य आप को डॉक्टर बनाना ही होता था. यहां पर हम केवल एमबीबीएस डॉक्टर की बात कर रहे हैं. लेकिन अब से ऐसा नहीं है अब एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए केवल आपको एक् परीक्षा देना पड़ेगा , और इस परीक्षा का नाम है नीट . चुकी डॉक्टर बनाने के लिए ढेर सारी परीक्षा होते थे , इससे बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ता था, और निजी संस्थान बहुत ही ज्यादा पैसा छात्रों से वसूलते थे , तू ही सभी चीजों को कंट्रोल करने के लिए गवर्नमेंट ने केवल एक परीक्षा बना दी और वह है नीट , नेट की परीक्षा पास करने के बाद आपको 6 साल का एमबीबीएस का कोर्स करना होता है उसके बाद आप फूल फ्रेश डॉक्टर बन जाते है. उसके बाद चाहे तो अब प्राइवेट नौकरी या सरकारी नौकरी क्षेत्रों में जाकर अपना कैरियर बना सकते हैं .



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एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए योग्यता (Qualification to become MBBS Doctor) -

एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए आपको नीट की परीक्षा पास करनी होती है जैसा कि ऊपर बताया गया है, अब इस नीट की प्रवेश परीक्षा देने के लिए एक छात्र की मिनिमम योग्यता भी निर्धारित की गई है , नीट प्रवेश परीक्षा देने के लिए आपको 12वीं पास होनी चाहिए, केवल 12 वीं पास ही होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि आपको फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी के साथ बरहनी पास करनी है. और साथ ही साथ आपका 12वीं में 60% मार्क्स होना चाहिए, 60% से कम नंबर ना हो. अन्यथा आप नीट का परीक्षा नहीं दे पाएंगे .



नीत प्रवेश परीक्षा के लिए उम्र की सीमा (Age limit for policy entrance exam) -

नीट प्रवेश परीक्षा देने के लिए छात्रों की उम्र सीमा भी निर्धारित की गई है . छात्रों की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए. 17 वर्ष से कम आयु के छात्र नीट की परीक्षा नहीं दे पाएंगे , वहीं 25 वर्ष से अधिक आयु के छात्र भी नीट की परीक्षा नहीं दे पाएंगे .


यानी जनरल कैटेगरी के अगर आप स्टूडेंट हैं तो आप की उम्र सीमा 17 से 25 वर्ष के बीच में होनी चाहिए. वहीं ओबीसी छात्रों के लिए उम्र में छूट 3 साल की है तथा sc-st के लिए उम्र में छूट 5 साल की है . और भी ढेर सारी छूट है ज्यादा जानकारी के लिए आप नीट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर जानकारी ले सकते है.


अगर आप यह सीएसटी के स्टूडेंट हैं तो आप अगर, 12वीं में 50% मार्क भी पाते हैं तो भी आप नेट की परीक्षा देने के लिए योग्य हो जाते हैं.
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नीट का सिलेबस (Neat syllabus -) -
अब आइए नीट के सिलेबस के बारे में कुछ जानकारी ले लेते हैं, क्योंकि सिलेबस के बारे में जानना बहुत ही जरूरी है, क्योंकि अगर जब तक आप सिलेबस नहीं जानेंगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा कि क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है, तो नीट के सिलेबस में यह है कि 3 सब्जेक्ट पढ़े जाते हैं
भौतिक विज्ञान ( फिजिक्स)
रसायन विज्ञान ( केमिस्ट्री)
जीव विज्ञान ( बायोलॉजी)
इन 3 विषयों की पढ़ाई की जाती है ,



तो आइए फिजिक्स के बारे में जानते हैं की भौतिक विज्ञान में में कौन-कौन सी चीजें पूछे जाती -
किनेमैटिक्स
फिजिकल वर्ल्ड एंड मेजरमेंट
लॉ ऑफ मोशन
वर्क, एनर्जी एंड पावर
ग्रेविटेशन
प्रॉपर्टी आफ बल्क मैटर
थर्मोडायनेमिक्स
बिहेवियर ऑफ परफेक्ट गैस एंड काइनेटिक थ्योरी
दोलन गति और तरंग
ऑप्टिक्स
डुएल नेचर आफ मैटर एंड रेडिएशन
इलेक्ट्रोस्टेटिक
करंट इलेक्ट्रिसिटी
मैग्नेटिक इफेक्ट आफ करंट एंड मैग्नेटिज्म
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन एंड अल्टरनेटिंग करंट
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स
परमाणु और नाभिक
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज



तू फिजिक्स में इतनी सारी चीजें आपको पूछे जाएंगे आपकी नीट की परीक्षा में , अगर आपको फिजिक्स अपना ठीक करना तो आपको मैकेनिक बहुत ही अच्छे ढंग से आनी चाहिए, क्योंकि मैकेनिक्स एक ऐसा सब्जेक्ट है जो कि पूरे ही भौतिक विज्ञान का रीड का हड्डी है, यह अगर आपका ठीक हो गया तू लगभग पूरी भौतिकविज्ञान पर आप की पकड़ बन जाती है . इसके अलावा आपको इलेक्ट्रोमैग्नेटिक , लाइट और थर्मोडायनेमिक्स जैसे सेक्टर में भी अच्छी खासी नॉलेज प्राप्त करनी होगी .
अब आइए केमिस्ट्री कि सिलेबस के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं , केमिस्ट्री का सिलेबस एक ऐसा सिलेबस होता है जिसके बारे में अगर आप अच्छी जानकारी रखते हैं तभी आप अच्छा माकपा पाएंगे क्योंकि अच्छी जानकारी का मतलब अच्छी तैयारी और अच्छी तैयारी का मतलब है अच्छा मार्क्स.



केमिस्ट्री सिलेबस- सम बेसिक कंसेप्ट ऑफ केमिस्ट्री
स्ट्रक्चर आफ एटम
क्लासिफिकेशन आफ एलिमेंट एंड पीरियोडिक सिटी इन प्रॉपर्टीज
केमिकल बॉन्डिंग एंड मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर
स्टेट्स आफ मैटर : गैस एंड लिक्विड
थर्मोडायनेमिक्स
साम्यावस्था
रेडॉक्स रिएक्शन
हाइड्रोजन
एस ब्लॉक एलिमेंट
पी ब्लॉक एलिमेंट
दैनिक केमिस्ट्री- सोम बेसिक प्रिंसिपल एंड टेक्निक्स
हाइड्रोकार्बंस
एनवायरमेंटल केमेस्ट्री
सॉलि़ड स्टेट
सलूशन
इलेक्ट्रोकेमेस्ट्री
केमिकल काइनेटिक्स
सरफेस केमिस्ट्री
जनरल प्रिंसिपल्स एंड प्रोसेस आफ आइसोलेशन एंड एलिमेंट
डी एंड एफ ब्लॉक एलिमेंट
कोऑर्डिनेशन कंपाउंड
हेलो एल्केन एंड हेलो ARENES
एल्कोहल, फिनायल और ईथर
एल्डिहाइड, कीटोन, और कार्बोलिक एसिड
ऑर्गेनिक कंपाउंड कंटेनिंग नाइट्रोजन
बायोमोलीक्यूलिस
पॉलीमर
केमेस्ट्री इन एवरीडे लाइफ
अब आइए जीव विज्ञान के सिलेबस के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं




जीव विज्ञान का सिलेबस- डायवर्सिटी इन लिविंग वर्ल्ड
स्ट्रक्चरल ऑर्गेनाइजेशन इन एनिमल्स एंड प्लांट
सेल स्ट्रक्चर एंड फंक्शन
प्लांट फिजियोलॉजी
मानव फिजियोलॉजी
रीप्रोडक्शन
जेनेटिक और इवोल्यूशन
बायोलॉजी और ह्यूमन वेलफेयर
बायो टेक्नोलॉजी और इसका प्रयोग
इकोलॉजी और इंवॉल्वमेंट

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तो यह था सिलेबस के बारे में पूरी जानकारी अब यह बात करते हैं कि अगर सिलेबस के बारे में हमारी जानकारी पूर्ण हो गई हो तो उस पूर्णता के साथ हम तैयारी कैसे करें .




नीट की तैयारी सेल्फ स्टडी से  करना (Preparing NEET with self study) -

अगर आप एमबीबीएस की परीक्षा पास करना चाहते हैं और साथ यह भी चाहते हैं कि आप कोचिंग ना करके सेल्फ स्टडी करें तो उसके लिए सही तरीका क्या है ? कैसे पढ़ाई करें कि आप प्रवेश परीक्षा को आराम से निकाल ले, सबसे पहली बात यह है कि आपको सिलेबस के बारे में अच्छी जानकारी लेनी होगी, कौन सा ऐसा टॉपिक है जहां से ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं , सबसे पहले आप को यही पता करना होगा, जब यह आपको पता हो जाता है तो फिर आप उन सभी टॉपिक को स्टडी करें , और उन सभी टॉपिक में इतनी अच्छी तैयारी कर ले , कि उन सभी टॉपिक से जो भी क्वेश्चन पूछे जाएं उसका लगभग 90% क्वेश्चन का उत्तर देने की क्षमता रखें , 90% से कम नहीं होना चाहिए .





नोट्स बनाना जरूरी है (Examination notes)-
कितने छात्र ऐसे सोचते हैं की नोट्स बनाना कोई जरूरी का काम नहीं है, पीटी एक्जाम मे पुरा टेक्स्ट बुक कवर कर लेंगे, लेकिन जब एग्जाम आता है तो वह ऐसा नहीं कर पाते, कहीं न कहीं उनको नोट नहीं बनाने की जो कमी है उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है , जो की स्वभाविक है. जाहिर सी बात है फ्रेंड्स की एग्जाम टाइम (exam time ) में आपके पास इतना समय नहीं होता है कि आप सिलेबस को कवर कर पाए, सिलेबस कवर करने की बात तो छोड़िए आप पूरा रिवीजन नहीं भी नहीं कर पाएंगे , क्योंकि इतना ज्यादा समय आपके पास समय नहीं रहता है कि आप पूरा टेक्स्ट बुक को कवर करें या उसे रिवीजन करें, ऐसी हालत में आपको नोटबुक ही मदद करती है, हर पाठ का 3 या 4 पेज का नोटबुक ( note book) बना ले, और उसको अपनी अनुसार लिखें, अपनी भाषा में लिखे, जितना सरल हो सके उसे उतना सरल भाषा में अपनी तरह से लिखें, ताकि जब एग्जाम का समय आए तो उसे आप आसानी से समझ सके.




ऐसा नहीं कि टीचर द्वारा बनाए गए नोट्स को ही पढ़ें, उसे भी आप पढ़ सकते हैं, लेकिन अगर आप अपने ढंग से नोट बना लेंगे, तो आप बहुत ही ज्यादा समय की बचत कर लेंगे, क्योंकि जाहिर सी बात है फ्रेंड्स अगर आप अपने ढंग से चीजों को लिखेंगे, तो आपको उसे समझने में बहुत ही सरलता रहती है, यही सरलता समय को कट करती है, और आपका समय को बचत करती है, जो कि किसी भी प्रवेश परीक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है. हो सकता है कि आपको यह बात निरर्थक या बेकार लगे लेकिन जब आप इसे अप्लाई करेंगे तभी आपको इसका बेनिफिट समझ में आएगा .

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सप्ताह में 6 दिन जरूर पढ़ाई करें ( 6 days study in a week )
अब आप यह सोच रहे होंगे, कि सप्ताह में 6 दिन पढ़ाई करने का कंसेप्ट क्या है ? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आपका सोचना बिल्कुल सही है, प्रत्येक दिन नियमित उठकर पढ़ाई करें, इन 6 दिन में कोशिश करें सभी सिलेबस को टच करते रहे , ताकि सभी सिलेबस कवर हो सके , अब जाहिर सी बात है कि विषयों को टाइम देंगे तभी वे कबर होंगे . उन विषयों पर ज्यादा ध्यान दें जिसमें आपकी पकड़ कमजोर है, और जिसमें आपको लगता है कि आप इसमें ज्यादा अच्छा कर सकते हैं उसमें अगर थोड़ा सा काम ध्यान देंगे तो भी काम चल जाएगा.




अब सप्ताह में 6 दिन पढ़ाई करने के बाद आपका दिमाग थक जाता है, क्योंकि आपको सिलेबस को पूरा करना भी जरूरी होता है , साथी बोर्ड एग्जामिनेशन देना है इसका टेंशन रहता है, घर के गार्जियन का प्रेशर रहता है ,



ज्यादा मार्क्स लाना है यह भी बात ध्यान में रखनी है, क्लास में अच्छा प्रदर्शन करना है यह बात भी दिमाग में हमेशा चलती रहती है, तो कुल मिला जुला कर हमारा दिमाग तनाव के बोझ से दबा रहता है, इतना ही नहीं आपको कोचिंग , स्कूल , होमवर्क यह सब इतना ज्यादा करना पड़ता है कि दिमाग का थकना स्वभाविक है. ऐसी हालत में दिमाग को आराम देना बहुत ही जरूरी है, इसीलिए अगर सप्ताह में एक दिन आप नहीं पड़ेंगे तो आपके दिमाग की थकावट दूर हो जाएगी, और आप चुस्त और तंदुरुस्त हो कर पढ़ाई करेंगे, साथ ही आप विभिन्न प्रकार के तनाव से भी दूर रहेंगे, अब कितने पढ़ाकू जो लड़के होते हैं , वे लोग शाम होते-होते किताब उठा ही लेते हैं , तो यह ठीक नहीं है क्योंकि , सप्ताह का एक दिन मनोरंजन के लिए रखना बहुत ही जरूरी है और पूरी 24 घंटे उस दिन आप पढ़ाई ना करें . इससे आपके दिमाग के मसल्स भी थकावट से दूर हो जाएंगे.
उस दिन अपना मित्रों से मिले जुले ,खेले कूदे और हो सके तो मूवी भी देख ले अगर आपका मन करे तो .
इस तरह से प्रोसीजर करके आप अपने दिमाग को चुस्त और तंदुरुस्त रखेंगे और साथ ही अच्छी तैयारी भी करेंगे .





रिवीजन प्रक्रिया (Revision process )
जब आप पढ़ाई करते हैं सुबह से लेकर शाम तक, कहने का मतलब यह हुआ कि अगर आप भोर में पढ़ाई करते हैं , फिर सुबह स्कूल जाते हैं , फिर कोचिंग करते हैं और अपनी भी पढ़ाई करते रहते हैं, इससे क्या होता है कि शाम होते होते दिमाग थक जाता है, वह फिर नहीं चीजों को कैप्चर करने के लायक नहीं रह जाता है , क्योंकि नई चीजों के सीखने के लिए एनर्जी की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है और साथ ही आपका दिमाग भी चुस्त और तंदुरुस्त होना चाहिए .




इसीलिए आपको चाहिए कि शाम को केवल रिवीजन करें , या यूं समझे की अगर आपका दिमाग पढ़ते-पढ़ते जब थक जाए तो उस समय केवल रिवीजन करें, शाम के समय ही ऐसा आपको ज्यादातर लक्षण देखने को मिलेगा, जब भी आपको लगे कि आपके पास एनर्जी ज्यादा है आप अच्छा महसूस कर रहे हैं उस समय आप नई चीजें पढ़ें, कोशिश करिए कि जब आप के पास सबसे ज्यादा एनर्जी महसूस हो यानी सुबह के समय तो उस समय से सब्जेक्ट को बड़े जिसमें आपका इंटरेस्ट कम , वह इसलिए क्योंकि उस सब्जेक्ट में आपका इंटरेस्ट कम है लेकिन पढ़ना भी तो जरूरी है, क्योंकि अगर उस सब्जेक्ट को नहीं पड़ेंगे तो उसमें नंबर कम आ जाएंगे , इसलिए उससे सुबह ही पढ़ ले . चाहे भले ही उसे आधे घंटे पड़े लेकिन उसे सुबह पढ़ ले. ताकि वह भी कोर्स कवर होता रहे .

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रिवीजन करना ना भूले (Don't forget for revision )-

अधिकतर यह देखा गया है कि छात्र केवल अपना ध्यान, ज्यादा से ज्यादा केवल नई चीजों को पढ़ने में ही लगाए रखते हैं, इससे क्या होता है कि वे पढ़ी हुई चीजें से अपना ध्यान हटा लेते हैं , और इससे वह चीजें धीरे-धीरे भूलने लगती है , इसलिए ऐसी गलती कभी ना करें, इसलिए चीजों को रिवीजन में रखने की आदत डालें, सबसे ज्यादा जो आनंद आता है वह रिवीजन करने में ही आता है , जब आपको रिवीजन करने की आदत पड़ जाएगी उस समय ही आपको इसका मजा समझ में आएगा, एक ही चीज को आप 50 से सौ बार रिवीजन कीजिए , अब इसका मतलब यह नहीं हुआ कि आपने केवल एक पाठ उठा लिया और उसे ही रोज रिवीजन कर रहे हैं .




रिवीजन हर चीज का करते रहे, हर सब्जेक्ट का करते रहे, रोज करते रहे, एक बार अगर आपको इसका लत पड़ गया, तो समझ लीजिए कि यह किसी भी नशे से आपको ज्यादा आनंद देगा इसकी गारंटी ली जाती है , जब आप एक हफ्ता तक इसी तरह रिवीजन करते रहिए, और यह ध्यान भी देते रहिए कि आपको कैसा फील हो रहा है, आपको वाकई में रिवीजन करने में मजा आ रहा है कि नहीं, तो उत्तर यही मिलेगा कि भाई वाकई में बहुत ही मजा आ रहा है, क्योंकि आपको खुद ही लगेगा कि आप कुछ कर ही नहीं रहे हैं और तैयारी आपकी बड़ी शानदार हो रही है . आप लोग सोच रहे होंगे कि बार-बार रिवीजन की बात क्यों कही जा रही है, अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि यह बिल्कुल सत्य है, बार-बार रिवीजन की बात इसलिए कही जा रही है, ताकि रिवीजन रूपी जो नशा है आपके दिमाग को अच्छी तरह से लग जाए, फिर इस नशे का वह आनंद मिलेगा जिसे आप शब्दों में बयां नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कुछ इस तरह के आनंद होते हैं जिसे केवल छात्री समझ सकता है, आपके ज्यादा जब नंबर आएंगे और टेस्ट में जब अच्छा करेंगे तब आपको इस नशे का असली मजा समझ में आएगा .



कोचिंग ज्वाइन करना (Join coaching) -

ज्यादातर यह भी समस्या छात्रों के सामने आती है, की वे कोचिंग ज्वाइन करें अथवा नहीं ज्वाइन करें , इस बात को लेकर वे उलझन में रहते हैं , तू कोचिंग का ज्वाइन करना और ना ज्वाइन करना यह सब छात्र की मानसिक सोच पर डिपेंड करता है, हर छात्र की मानसिक सोच अलग अलग होती है, कोई छात्र होता है कि वह स्टडी करके परीक्षा देना चाहता है, तो कोई छात्र होता है कि वह कोचिंग करके प्रवेश परीक्षा देना चाहता है, अब छात्र को यदि लगता है कि वह बिना कोचिंग के ही केवल सेल्फ स्टडी करके ही अच्छी तैयारी कर सकता है और प्रवेश परीक्षा को अच्छे ढंग से दे सकता है, तो उसे कोचिंग करने की कोई जरूरत नहीं , लेकिन अगर उसे कहीं लगता है कि नहीं कोचिंग के बिना उसकी तैयारी अच्छी नहीं हो सकती तो उसे कोचिंग करना चाहिए . क्योंकि जबरदस्ती यह कहा देना की उसे कोचिंग की नहीं जरूरत है यह भी गलत है .
क्योंकि इस तरह की गलती कहीं न कहीं आपको प्रवेश परीक्षा में असफलता दिलाएगी . इसलिए किसी भी छात्र को जबरदस्ती का निर्णय नहीं लेना चाहिए . निर्णय किसी के बहकावे में आकर या दिखावा करने के आधार पर भी नहीं लेना चाहिए. क्योंकि ज्यादातर छात्र निर्णय अपने सहपाठी के नकल पर लेते हैं. उनका सहपाठी जो काम करता है वह भी वही काम करते हैं . और इससे क्या होता है कि कभी रिजल्ट सही मिलता है और कभी गलत मिलता है, ज्यादातर तो इस तरह के केस में गलत रिजल्ट ही मिलता है, क्योंकि आपका जो मित्र है वह टारगेट करके निर्णय ले रहा है, और आप जो निर्णय ले रहे हैं आप उसकी नकल करके ले रहे हैं. आपको पता नहीं कि आपका टारगेट क्या है , अगर आपको अपना टारगेट पता भी है , और आप नकल करके निर्णय लेंगे तू भी आप अच्छी तरह से सफल नहीं हो पाएंगे .



इसलिए अपना निर्णय लेते समय आप स्वतंत्र रहे, अब स्वतंत्र रहने का मतलब यह भी नहीं होता है कि आप लोगों की सलाह लेना ही बंद कर दें, आप अच्छे लोगों की सलाह लीजिए फिर अपनी ढंग से अच्छी तरह से समझ लीजिए उसके बाद निर्णय ले लीजिए. यही असली तरीका होता है डिसीजन लेने का. अगर आप लाइफ में अच्छी तरह से डिसीजन लेना सीख गए तो आधी समस्या यूं ही खत्म हो जाती है.




बहुत
बहुत किताब फॉलो करने से बचें (Avoid following too many books)-


नीट की तैयारी में अधिकतर देखा गया है अधिकतर छात्र, ब्रिलियंट बनने की कोशिश में ज्यादा से ज्यादा किताब पढ़ने लगते हैं, इससे क्या होता है कि वह एक ही चीज को बार बार पढ़ते हैं, और इससे क्या होता है कि उनका समय नुकसान होता है, एक ही चीज को बार बार पढ़ना दूसरी किताबों से तभी ठीक रहता है जब उस चीज का कंसेप्ट आपको क्लियर ना हो , क्योंकि अगर आप एक ही चीज को बार-बार अध्ययन करेंगे तो इसे मामूली फायदा आपको होगा और वह फायदा रिवीजन के रूप में होगा लेकिन इस मामले फायदे की वजह से आपका कुछ समय भी नुकसान होगा , अब यह मत समझिए कि रिवीजन करना समय की बर्बादी होती है, ज्यादा किताब फॉलो करना बेवजह का यह नुकसानदायक है .





बहुत किताब फॉलो करने से बचें (Avoid following too many books)-

पढ़ाई के साथ-साथ टाइम मैनेजमेंट का भी ध्यान रखें, एक निश्चित समय में ही पेपर को खत्म करने की कोशिश करें, क्योंकि देखिए कोई भी पेपर एक निश्चित समय के लिए होता है, उस निश्चित समय में आपको उस पेपर को खत्म करना रहता है , इसलिए अपनी तैयारी आप ऐसी करें , की नीत के परीक्षा पेपर को आप उतने समय में हल कर सके, जितने समय में यह परीक्षा हाल में दी जाती है . उदाहरण के लिए यदि नीट की परीक्षा 2 घंटे की होती है, तो आप भी अपनी तैयारी कैसे करें कि आप 2 घंटे में पेपर को हल कर लेंगे, और यह तभी संभव है जब आप कुछ मॉडल पेपर को हल करेंगे, या प्रीवियस ईयर में पूछे गए NEET के पेपर को हल करेंगे . तू यह सब तरीके आपको अपनाना बहुत ही जरूरी है अगर आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो .

CONCLUSION-


नीट की परीक्षा देने के लिए आप अच्छी तैयारी कर ले, नोट्स बना ले, मॉडल पेपर हल करें, परीक्षा के दिनों में नई चीजें पढ़ने के जगह पुरानी चीजों का रिवीजन करें , टाइम मैनेजमेंट का ध्यान रखें. अपना समय बर्बाद होने से बचाएं, और अपनी सेहत का अच्छी ढंग से ख्याल करें . अगर इतना सब कुछ आप केयर करेंगे तो NEET में सफल होने से आपको कोई नहीं रोक सकता , तो यह था NEET के बारे में पूरी जानकारी आशा करता हूं कि यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा, इसी तरह की करियर से जुड़ी जानकारी पाने के लिए हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब कीजिए और इस पर हमेशा विजिट करते रहिए, क्योंकि यह वेबसाईट केवल छात्र मित्रों के लिए ही बनाई गई है वह भी पूरी हिंदी भाषा मे . इस पोस्ट में अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, जय हिंद वंदे मातरम.

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