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high school / borad exam me jyda marks kaise laye / up board

दसवीं बोर्ड परीक्षा में ज्यादा नंबर पाने के उपाय (how to find maximum marks in high school board exam in hindi ) -

high school / borad exam me jyda marks kaise laye / up board

ज्यादातर छात्र नौवीं की परीक्षा पास करके जब दसवीं में पहुंचते हैं , उनके ऊपर ज्यादा लोड आ जाता है, चाहे वह छात्र सीबीएसई बोर्ड का हो, या किसी राज्य बोर्ड का , दसवीं की परीक्षा ऐसी परीक्षा होती है जिसमें बहुत ही ज्यादा प्रेशर रहता है, छात्रों को पहली बार बोर्ड का एग्जामिनेशन (Board - examination ) देना पड़ता है, यह एग्जामिनेशन होम एग्जामिनेशन से बहुत ही अलग होता है, क्योंकि इसमें एनवायरमेंट बिल्कुल अलग होता है. आपको एक अलग इकोसिस्टम में आकर परीक्षा देनी होती है.
अगर आप दसवीं की परीक्षा (10th exam ) दे रहे हैं तो अगर कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान रखेंगे तो आप तनाव से भी बच जाएंगे और ज्यादा से ज्यादा मार्क्स भी प्राप्त कर सकेंगे .

सप्ताह में 6 दिन जरूर पढ़ाई करें ( 6 days study plans in a week ) -
अब आप यह सोच रहे होंगे, कि सप्ताह में 6 दिन पढ़ाई करने का कंसेप्ट (concept ) क्या है ? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आपका सोचना बिल्कुल सही है, प्रत्येक दिन नियमित उठकर पढ़ाई करें, इन 6 दिन में कोशिश करें सभी सिलेबस को टच करते रहे , ताकि सभी सिलेबस कवर हो सके , अब जाहिर सी बात है कि विषयों को टाइम ( time ) देंगे तभी वे कबर होंगे . उन विषयों पर ज्यादा ध्यान दें जिसमें आपकी पकड़ कमजोर है, और जिसमें आपको लगता है कि आप इसमें ज्यादा अच्छा कर सकते हैं उसमें अगर थोड़ा सा काम ध्यान देंगे तो भी काम चल जाएगा.



अब सप्ताह में 6 दिन पढ़ाई करने के बाद आपका दिमाग थक जाता है, क्योंकि आपको सिलेबस को पूरा करना भी जरूरी होता है , साथी बोर्ड एग्जामिनेशन ( Board exam ) देना है इसका टेंशन रहता है, घर के गार्जियन का प्रेशर रहता है ,
ज्यादा मार्क्स ( maximum marks ) लाना है यह भी बात ध्यान में रखनी है, क्लास में अच्छा प्रदर्शन करना है यह बात भी दिमाग में हमेशा चलती रहती है, तो कुल मिला जुला कर हमारा दिमाग तनाव के बोझ से दबा रहता है, इतना ही नहीं आपको कोचिंग (coaching ) , स्कूल (school ) , होमवर्क ( Home Work ) यह सब इतना ज्यादा करना पड़ता है कि दिमाग का थकना स्वभाविक है. ऐसी हालत में दिमाग को आराम देना बहुत ही जरूरी है, इसीलिए अगर सप्ताह में एक दिन आप नहीं पड़ेंगे तो आपके दिमाग की थकावट ( tiredness ) दूर हो जाएगी, और आप चुस्त और तंदुरुस्त हो कर पढ़ाई करेंगे, साथ ही आप विभिन्न प्रकार के तनाव (tension ) से भी दूर रहेंगे, अब कितने पढ़ाकू जो लड़के होते हैं , वे लोग शाम होते-होते किताब उठा ही लेते हैं , तो यह ठीक नहीं है क्योंकि , सप्ताह का एक दिन मनोरंजन के लिए रखना बहुत ही जरूरी है और पूरी 24 घंटे (24 hrs ) उस दिन आप पढ़ाई (study ) ना करें . इससे आपके दिमाग के मसल्स भी थकावट से दूर हो जाएंगे.
उस दिन अपना मित्रों से मिले जुले ,खेले कूदे और हो सके तो मूवी भी देख ले अगर आपका मन करे तो .
इस तरह से प्रोसीजर करके आप अपने दिमाग को चुस्त और तंदुरुस्त रखेंगे और साथ ही अच्छी तैयारी भी करेंगे .
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रिवीजन प्रक्रिया (revision process ) -
जब आप पढ़ाई करते हैं सुबह से लेकर शाम तक, कहने का मतलब यह हुआ कि अगर आप भोर में पढ़ाई करते हैं , फिर सुबह स्कूल जाते हैं , फिर कोचिंग (coaching ) करते हैं और अपनी भी पढ़ाई करते रहते हैं, इससे क्या होता है कि शाम होते होते दिमाग थक जाता है, वह फिर नहीं चीजों को कैप्चर करने के लायक नहीं रह जाता है , क्योंकि नई चीजों के सीखने के लिए एनर्जी ( energy ) की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है और साथ ही आपका दिमाग भी चुस्त और तंदुरुस्त होना चाहिए , इसीलिए आपको चाहिए कि शाम को केवल रिवीजन करें , या यूं समझे की अगर आपका दिमाग पढ़ते-पढ़ते जब थक जाए तो उस समय केवल रिवीजन करें, शाम के समय ही ऐसा आपको ज्यादातर लक्षण देखने को मिलेगा, जब भी आपको लगे कि आपके पास एनर्जी ज्यादा है आप अच्छा महसूस कर रहे हैं उस समय आप नई चीजें पढ़ें, कोशिश करिए कि जब आप के पास सबसे ज्यादा एनर्जी ( energy ) महसूस हो यानी सुबह के समय तो उस समय से सब्जेक्ट को बड़े जिसमें आपका इंटरेस्ट कम , वह इसलिए क्योंकि उस सब्जेक्ट में आपका इंटरेस्ट कम है लेकिन पढ़ना भी तो जरूरी है, क्योंकि अगर उस सब्जेक्ट ( subjects ) को नहीं पड़ेंगे तो उसमें नंबर कम आ जाएंगे , इसलिए उससे सुबह ही पढ़ ले . चाहे भले ही उसे आधे घंटे पड़े लेकिन उसे सुबह पढ़ ले. ताकि वह भी कोर्स कवर होता रहे .

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रिवीजन करना ना भूले ( Don't forget for revision ) -
अधिकतर यह देखा गया है कि छात्र केवल अपना ध्यान, ज्यादा से ज्यादा केवल नई चीजों को पढ़ने में ही लगाए रखते हैं, इससे क्या होता है कि वे पढ़ी हुई चीजें से अपना ध्यान हटा लेते हैं , और इससे वह चीजें धीरे-धीरे भूलने लगती है , इसलिए ऐसी गलती कभी ना करें, इसलिए चीजों को रिवीजन (revision ) में रखने की आदत डालें, सबसे ज्यादा जो आनंद आता है वह रिवीजन करने में ही आता है , जब आपको रिवीजन करने की आदत पड़ जाएगी उस समय ही आपको इसका मजा समझ में आएगा, एक ही चीज को आप 50 से सौ बार रिवीजन कीजिए , अब इसका मतलब यह नहीं हुआ कि आपने केवल एक पाठ उठा लिया और उसे ही रोज रिवीजन Daily revision ) कर रहे हैं .
रिवीजन हर चीज का करते रहे, हर सब्जेक्ट का करते रहे, रोज करते रहे, एक बार अगर आपको इसका लत पड़ गया, तो समझ लीजिए कि यह किसी भी नशे से आपको ज्यादा आनंद देगा इसकी गारंटी ली जाती है , जब आप एक हफ्ता तक इसी तरह रिवीजन करते रहिए, और यह ध्यान भी देते रहिए कि आपको कैसा फील हो रहा है, आपको वाकई में रिवीजन करने में मजा आ रहा है कि नहीं, तो उत्तर (answer ) यही मिलेगा कि भाई वाकई में बहुत ही मजा आ रहा है, क्योंकि आपको खुद ही लगेगा कि आप कुछ कर ही नहीं रहे हैं और तैयारी आपकी बड़ी शानदार हो रही है . आप लोग सोच रहे होंगे कि बार-बार रिवीजन की बात क्यों कही जा रही है, अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि यह बिल्कुल सत्य है, बार-बार रिवीजन की बात इसलिए कही जा रही है, ताकि रिवीजन रूपी जो नशा है आपके दिमाग को अच्छी तरह से लग जाए, फिर इस नशे का वह आनंद मिलेगा जिसे आप शब्दों में बयां नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कुछ इस तरह के आनंद होते हैं जिसे केवल छात्री समझ सकता है, आपके ज्यादा जब नंबर आएंगे और टेस्ट (test ) में जब अच्छा करेंगे तब आपको इस नशे का असली मजा समझ में आएगा .
conclusion- regular study par dhyan de aur revision karna na bhule
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